Know the complete rules for Rajya Sabha elections: पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के बाद एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। चुनाव आयोग ने उन तीन सीटों पर उपचुनाव कराने का फैसला किया है, जो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन सांसदों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। इस बीच कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या कोई सामान्य भारतीय नागरिक भी राज्यसभा का चुनाव लड़ सकता है या इसके लिए किसी राजनीतिक दल से जुड़ना जरूरी होता है।
दरअसल, राज्यसभा भारत की संसद का उच्च सदन है। इसके सदस्यों का चुनाव लोकसभा की तरह सीधे जनता नहीं करती, बल्कि संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक (MLAs) मतदान के जरिए अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। ऐसे में आम नागरिक के लिए चुनाव लड़ने और जीतने की प्रक्रिया लोकसभा चुनाव से काफी अलग होती है।
क्या कोई भी भारतीय नागरिक राज्यसभा चुनाव लड़ सकता है?
भारतीय संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करता है तो वह राज्यसभा चुनाव लड़ सकता है। यानी कानून किसी भी योग्य भारतीय नागरिक को चुनाव लड़ने का अधिकार देता है। हालांकि, चुनाव लड़ने का अधिकार और चुनाव जीतने की संभावना दोनों अलग-अलग बातें हैं।
राज्यसभा चुनाव लड़ने के लिए क्या हैं पात्रता की शर्तें?
राज्यसभा का उम्मीदवार बनने के लिए कुछ जरूरी योग्यताओं को पूरा करना अनिवार्य है। उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए। उसकी न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए। उसका नाम भारत के किसी भी संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए। उम्मीदवार केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए, जब तक कि कानून के तहत उसे विशेष छूट प्राप्त न हो। इसके अलावा उम्मीदवार को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अन्य प्रावधानों का भी पालन करना होता है। यदि कोई व्यक्ति इन सभी शर्तों को पूरा करता है तो वह राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकता है।
राज्यसभा चुनाव में कितनी फीस या जमानत राशि जमा करनी पड़ती है?
अक्सर लोग इसे चुनाव लड़ने की फीस समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में यह एक सुरक्षा जमा राशि होती है। सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 10,000 रुपये जमा करने होते हैं। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह राशि 5,000 रुपये निर्धारित है। यह राशि चुनाव आयोग के पास सुरक्षा जमा के रूप में रहती है। यदि उम्मीदवार चुनाव में तय सीमा तक वोट हासिल कर लेता है तो यह राशि वापस कर दी जाती है। अन्यथा यह जब्त हो जाती है।
केवल फीस जमा करने से नहीं लड़ सकते चुनाव
राज्यसभा चुनाव में केवल जमानत राशि जमा कर देना पर्याप्त नहीं होता। उम्मीदवार को वैध नामांकन दाखिल करने के लिए विधायकों का समर्थन भी जरूरी होता है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार, किसी उम्मीदवार के नामांकन पत्र का प्रस्ताव राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाना चाहिए। इसके लिए कम से कम 10 विधायक या विधानसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों के 10 प्रतिशत (जो भी कम हो) का समर्थन आवश्यक होता है। यही कारण है कि बिना राजनीतिक समर्थन के किसी निर्दलीय उम्मीदवार के लिए चुनाव मैदान में उतरना भी काफी कठिन हो जाता है।
राज्यसभा चुनाव में मतदान कैसे होता है?
राज्यसभा चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं कराया जाता। इसमें केवल संबंधित राज्य के विधायक मतदान करते हैं। चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल हस्तांतरणीय मत के आधार पर होता है।
इस प्रणाली का उद्देश्य विधानसभा में राजनीतिक दलों की वास्तविक ताकत के अनुपात में राज्यसभा में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। इसलिए जिस दल के पास विधानसभा में अधिक विधायक होते हैं, उसके उम्मीदवार के जीतने की संभावना भी अधिक रहती है।
आम आदमी के लिए चुनाव जीतना क्यों मुश्किल माना जाता है?
कानूनी रूप से कोई भी पात्र नागरिक राज्यसभा चुनाव लड़ सकता है, लेकिन व्यवहारिक रूप से चुनाव जीतना आसान नहीं होता।
इसके पीछे कई कारण हैं—
- चुनाव में आम जनता मतदान नहीं करती।
- वोट केवल विधायक डालते हैं।
- नामांकन के लिए भी विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है।
- अधिकांश विधायक अपनी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को ही वोट देते हैं।
- निर्दलीय उम्मीदवार के पास पर्याप्त राजनीतिक समर्थन नहीं होने पर जीत की संभावना बेहद कम रह जाती है।
यही वजह है कि राज्यसभा में अधिकांश सदस्य किसी न किसी राजनीतिक दल के टिकट पर ही चुने जाते हैं।
सुरक्षा जमा राशि कब वापस मिलती है?
नामांकन के समय जमा की गई सुरक्षा राशि हर उम्मीदवार को वापस नहीं मिलती। निर्वाचन नियमों के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार चुनाव में डाले गए कुल वैध मतों का कम से कम एक-छठा (16.6 प्रतिशत) वोट प्राप्त कर लेता है, तो उसकी सुरक्षा जमा राशि वापस कर दी जाती है। यदि उम्मीदवार इस न्यूनतम सीमा तक वोट हासिल नहीं कर पाता, तो उसकी जमानत जब्त कर ली जाती है।
हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की तीन सीटें खाली हो गई थीं। इन्हीं रिक्त सीटों को भरने के लिए चुनाव आयोग ने राज्यसभा उपचुनाव कराने की घोषणा की है। इन चुनावों में राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक मतदान करेंगे और नए सांसदों का चयन करेंगे।
























