भारतीय कृषि क्षेत्र आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। ग्लोबल जलवायु परिवर्तन, उपभोक्ताओं की बदलती जीवनशैली और बाजार के तेजी से बदलते घरानों ने कृषि-व्यवसायों के लिए नए नियम लिख दिए हैं। अब सिर्फ बीज और खाद बेचने का दौर नहीं रहा। आज की डिमांड एक व्यापक और समावेशी कृषि तंत्र की है। इसी परिवर्तन के केंद्र में गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड (GODREJ AGROVET) की नई पारी है, जिसकी कमान सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील कटारिया संभाल रहे हैं।
हाल के वर्षों में कंपनी ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है—वह पहली बार ₹10,000 करोड़ के वार्षिक राजस्व के आंकड़े को पार कर गई है। लेकिन ये आंकड़ा सिर्फ वित्तीय सफलता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी रणनीति का नतीजा है जिसमें किसी एक फसल या उत्पाद से अलग हटकर एक मजबूत और विविधतापूर्ण व्यापारिक मॉडल अपनाया गया है। आइए समझते हैं कि गोदरेज एग्रोवेट भारतीय कृषि के भविष्य को कैसे तराश रहा है:
ग्राहक-केंद्रित सोच: हर रणनीति की नींव
कंपनी की नई विकास यात्रा का आधारशिला एक बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली विचार है—’ग्राहक की जरूरत से पहले उत्पाद नहीं, बल्कि जरूरत को समझकर उत्पाद बनाना’। भारतीय कृषि-मूल्य श्रृंखला (Agriculture Value Chain) में तीन प्रमुख शख्सियतें हैं:
- किसान: जो अपनी उपज और आमदनी बढ़ाना चाहता है।
- खाद्य प्रसंस्कर्ता (Food Processors): जिन्हें बेहतरीन क्वालिटी का कच्चा माल चाहिए।
- अंतिम उपभोक्ता: जो स्वास्थ्य और सुविधा को प्राथमिकता दे रहा है।
गोदरेज एग्रोवेट की हर नई इन्वेस्टमेंट, रिसर्च और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी इन तीनों की बदलती जरूरतों को पूरा करने पर फोकस कर रही है।
‘कपास-केंद्रित’ सोच से बाहर का सफर
कृषि क्षेत्र में मौसम और मार्केट की अनिश्चितताएं हमेशा बनी रहती हैं। अगर कोई कंपनी सिर्फ एक फसल या एक राज्य पर निर्भर रहे, तो एक खराब मौसम पूरे बिजनेस को थमा सकता है। इसी चुनौती का जवाब देते हुए कंपनी के ‘क्रॉप केयर बिजनेस’ ने बड़ा बदलाव किया है। पहले इस डिवीजन की लगभग 45% आमदनी सिर्फ कपास के खरपतवार नाशकों से आती थी।
आज, कंपनी ने इस जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया है। अब वह फफूंद नाशक (Fungicides) और कीटनाशक सेगमेंट में अपनी पकड़ बनाने के साथ-साथ मक्का और धान जैसी अन्य प्रमुख फसलों में भी तेजी से विस्तार कर रही है। इससे बिजनेस ज्यादा रेजिलिएंट (मजबूत) बना है।
वैल्यू-एडेड फूड्स का दौर
भारतीय थाली में प्रोटीन की मात्रा बढ़ रही है। बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती जागरूकता के कारण लोग अब सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि ‘सही भोजन’ चाहते हैं। डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर में क्वालिटी और सुविधा की मांग आसमान छू रही है।
इस मौके को भुनाने के लिए, गोदरेज एग्रोवेट ने अपने फूड और डेयरी बिजनेस को अगले लेवल पर ले जाने की योजना बनाई है। कंपनी का फोकस अब कच्चे दूध या मांस को बेचने से आगे बढ़कर, मजबूत कंज्यूमर ब्रांड्स बनाने और वैल्यू-एडेड (मूल्यवर्धित) उत्पादों की रेंज को बढ़ाने पर है।

डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग से वैल्यू कैप्चर करना
ऑयल पाम व्यवसाय में गोदरेज एग्रोवेट ने लंबी अवधि की रणनीति अपनाई थी। अब उसके नतीजे सामने आ रहे हैं। कंपनी के बड़े पैमाने पर लगाए गए ऑयल पाम के बागान अब उत्पादन के लायक स्टेज में आ गए हैं।
लेकिन कंपनी सिर्फ कच्चा तेल निकालकर बाजार में बेचने पर भरोसा नहीं कर रही। वह ‘डाउनस्ट्रीम’ प्रोसेसिंग क्षमताओं को विकसित कर रही है। इसका मतलब है कि अब कच्चे तेल से ‘स्पेशलिटी फैट्स’ जैसे उच्च-मूल्य वाले उत्पाद बनाए जाएंगे। इससे खेत से लेकर फैक्ट्री तक की पूरी सप्लाई चेन में मुनाफा बना रहेगा।
तकनीक और कृषि परामर्श: खेतों तक विज्ञान पहुंचाना
आज के दौर में एक अच्छा कीटनाशक या उर्वरक खरीदना ही काफी नहीं है। आधुनिक कृषि की जरूरत है वैज्ञानिक जानकारी की। किस फसल को किस समय कित्रा पानी चाहिए? मिट्टी में कौन सा पोषक तत्व कम है? इन सवालों के जवाब के लिए गोदरेज एग्रोवेट अपने प्रोडक्ट्स के साथ-साथ ‘एग्री-एडवायजरी सर्विसेज’ को बढ़ावा दे रहा है। तकनीक और जमीनी स्तर पर किसानों से जुड़ाव मिलाकर, कंपनी का लक्ष्य किसानों की प्रॉडक्टिविटी (उत्पादकता) को बढ़ाना और खेती को एक टिकाऊ और प्रॉफिटेबल बिजनेस बनाना है।






















