UP News: उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर अपराध निरोधक इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए कानपुर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय ‘डिजिटल अरेस्ट’ गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने लोगों को डिजिटल अरेस्ट और मोटे निवेश के झांसे में फंसाकर देशभर से लगभग 125 करोड़ रुपये की ठगी की है। पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 8 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है।
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि इस करोड़ों के खेल में कई प्रतिष्ठित बैंकों के कर्मचारी भी शामिल थे, जिन्होंने मोटी कमीशन की लालच में ठगों की मदद की।
एच ब्लॉक पर इनपुट पर शुरू हुई थी कार्रवाई
पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल के निर्देश पर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान थाना बर्रा पुलिस को एच ब्लॉक पेट्रोल पंप के पास प्राइमरी स्कूल के निकट कुछ संदिग्ध लोगों के बैठने की सूचना मिली। पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर तीन लोगों को पकड़ा। कड़ाई से पूछताछ के बाद साइबर फ्रॉड की ऐसी परतें खुलीं जिसने पुलिस महकमे को हैरान कर दिया। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के कुल 8 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए 8 आरोपी
पकड़े गए शातिर आरोपीों की पहचान सोनू शर्मा, सतीश पांडेय, साहिल विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह, तनिष गुप्ता, अमित सिंह, अमित कुमार और आशीष कुमार के रूप में हुई है।
4 स्टेप में देते थे ठगी को अंजाम
पूछताछ में गिरोह का चौंकाने वाला मॉड ऑपरेंडी सामने आया है। ये ठग चार चरणों में काम करते थे जो कि बैंकों में सेंध यूपी ग्रामीण बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, एक्सिस बैंक और यूको बैंक जैसे संस्थानों के भ्रष्ट कर्मचारियों को 5 से 10 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर गिरोह से जोड़ा गया।
फर्जी ट्रस्ट और करंट अकाउंट इन बैंक कर्मियों की मदद से फर्जी दस्तावेजों और फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन के आधार पर ऐसे करंट अकाउंट खोले गए, जिनमें लेन-देन की कोई ऊपरी सीमा (Limit) नहीं थी। डिजिटल अरेस्ट का खौफ आम आदमी को फोन पर पुलिस या एजेंसी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दी जाती थी या फिर हाई रिटर्न वाले इन्वेस्टमेंट का झांसा देकर करोड़ों रुपये इन फर्जी खातों में ट्रांसफर करवाए जाते थे।
सबूतों को मिटाना जैसे ही किसी खाते की शिकायत साइबर सेल पहुंचती, बैंक में बैठा गिरोह का आदमी तुरंत पूरी रकम निकाल लेता और खाता बंद करवा देता, जिससे पुलिस को ‘मनी ट्रेल’ (पैसे का पीछा) तक नहीं पहुंच पाती थी।
करोड़ों के ट्रांजेक्शन के मिले ठोस सबूत
पुलिस की प्रारंभिक जांच में दो मुख्य बैंक खातों से क्रमशः 53 करोड़ और 66 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। वहीं, एक अन्य खाते से 5 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन सामने आया है। पुलिस को नवी मुंबई में 58 करोड़ रुपये की एक ठगी के मामले का भी इसी गैंग से सीधा लिंक मिला है, जिससे इनके अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता चला है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें ठगी का पूरा डेटा और बैंक कर्मियों से हुई बातचीत के अहम सबूत मौजूद हैं।
























