PV Sindhu created history: भारतीय बैडमिंटन में एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश की दिग्गज शटलर पीवी सिंधु ने अपने शानदार खेल का डंका बजाते हुए जापान ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह कोई आम जीत नहीं है, क्योंकि सिंधु इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता को जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं। फाइनल मुकाबले में उनका सामना जापान की दिग्गज और मौजूदा विश्व चैंपियन अकाने यामागुची से था, लेकिन सिंधु ने उन्हें धूल चटाते हुए सीधे गेमों में 21-17, 21-17 से शिकस्त दी।
30वीं भिड़ंत में सिंधु का पलड़ा भारी
बैडमिंटन जगत में पीवी सिंधु और अकाने यामागुची की जोड़ी को हमेशा से ही एक बेहद प्रतिस्पर्धी रिवलरी माना जाता है। जापान ओपन के फाइनल में यह दोनों खिलाड़ी कोर्ट पर अपने करियर की 30वीं बार आमने-सामने थीं। इस रोमांचक मुकाबले में सिंधु ने न सिर्फ यामागुची को हराया, बल्कि आमने-सामने के रिकॉर्ड को 16-14 के स्कोर के साथ अपने पक्ष में कर लिया। यह जीत सिंधु के मानसिक और शारीरिक दोनों तरीकों से बेहतरीन फॉर्म में होने का प्रमाण है।
फाइनल में यामागुची के सामने बेअसर दिखीं सिंधु
जापान की धरती पर यामागुची के सामने जबरदस्त घरेलू दबाव था, लेकिन सिंधु ने इस दबाव को पूरी तरह से नकार दिया। पूरे मैच में भारतीय शटलर ने आक्रामक बैडमिंटन खेली। उनके शॉट्स में जो तेजी और प्रेसिजन (सटीकता) थी, उसका कोई जवाब यामागुची के पास नहीं था। चाहे वो कोर्ट के कोनों में ड्रॉप शॉट हों या फिर पावर-पैक स्मैश, सिंधु ने हर तरीके से जापानी खिलाड़ी को चकमा दिया। यही वजह रही कि दोनों गेम का अंत एक जैसे स्कोर (21-17) पर हुआ और सिंधु ने बड़ी ही आसानी से मैच को अपने नाम किया।
जापान ओपन जीतने के क्या हैं खास मायने?
पीवी सिंधु के करियर में यह जीत कई लिहाज से बेहद अहम और ऐतिहासिक मानी जा रही है। इस जीत को समझने के लिए कुछ खास बिंदुओं पर गौर करना होगा:
- पहला भारतीय विजेता: जापान ओपन के इतिहास में सिंधु पहली ऐसी भारतीय महिला या पुरुष शटलर हैं, जिसने इस प्रतियोगिता का खिताब अपने देश लाया है।
- पहला BWF Super 750 खिताब: यह उनके करियर का पहला BWF Super 750 टाइटल है, जो विश्व बैडमिंटन में काफी उच्च स्तरीय टूर्नामेंट माना जाता है।
- विदेशी धरती पर 4 साल बाद जीत: साल 2022 में सिंगापुर ओपन जीतने के बाद से लेकर अब तक, सिंधु भारत से बाहर किसी बड़े खिताब पर कब्जा नहीं कर पाई थीं। लगभग 4 साल के लंबे इंतजार के बाद उन्होंने इस सूखे को खत्म किया है।
- विश्व चैंपियन को हराने का दम: फाइनल में उनके सामने मौजूदा विश्व चैंपियन खड़ी थीं। ऐसे में यामागुची को उनके ही घर में हराना सिंधु के आत्मविश्वास को लेकर एक बड़ा संदेश देता है।
- 2024 का पहला विश्व टूर खिताब: इससे पहले इस साल सिंधु ने घरेलू मैदान पर सैयद मोदी इंटरनेशनल जीता था, लेकिन जापान ओपन उनका इस साल का पहला ‘बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर’ टाइटल है।
बीडब्ल्यूएफ रैंकिंग में होगा बड़ा उछाल
प्रदर्शन के उतार-चढ़ाव का सामना करना हर खिलाड़ी की किस्मत में होता है। इस साल की शुरुआत में चोट और लगातार अच्छे प्रदर्शन से दूर रहने की वजह से पीवी सिंधु की बीडब्ल्यूएफ (BWF) रैंकिंग गिरकर 18वें नंबर तक पहुंच गई थी। लेकिन हार मानने वालों में सिंधु का नाम नहीं है।
अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे अपनी रैंकिंग सुधारी और फाइनल से पहले ही वह दुनिया की टॉप-10 शटलर्स में वापसी कर 9वें स्थान पर पहुंच गई थीं। जापान के ओपन जैसे बड़े टूर्नामेंट में फाइनल तक का सफर तय करने और विश्व चैंपियन को हराने से उन्हें मिलने वाले भारी रैंकिंग पॉइंट्स से, उनकी रैंकिंग में और जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा। वह जल्द ही टॉप-5 में वापसी कर सकती हैं।

























