भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे पुराने टूर्नामेंट दलीप ट्रॉफी 2026-27 के चैंपियन का फैसला अब बस कुछ ही दिनों में हो जाएगा, लेकिन खिताब की राह में आमने-सामने होने वाली दो टीमों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। इस सीजन की पहली बड़ी ट्रॉफी ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच तय हुई है। जहां ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन पहले सेमीफाइनल में जीत दर्ज करते हुए फाइनल में पहुंच चुकी थी, वहीं दूसरे सेमीफाइनल में तिलक वर्मा के नेतृत्व वाली साउथ जोन ने नॉर्थ जोन को 7 विकेट से हराकर फाइनल का टिकट काट लिया। सबसे खास बात यह रही कि टीम को जीत के मुहाने तक पहुंचाने का काम खुद कप्तान ने अपने बल्ले से किया।
सेमीफाइनल का आखिरी दिन था सबसे रोमांचक
बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस में खेले जा रहे इस मुकाबले का आखिरी दिन यानी बुधवार, 2 सितंबर का दिन पूरे मैच का सबसे रोमांचक दिन साबित हुआ। साउथ जोन ने यहां नॉर्थ जोन की दूसरी पारी को 297 रन पर सिमटकर अपने पक्ष में कर लिया। याद रहे कि पहली पारी में साउथ जोन को 117 रन की बढ़त मिली हुई थी, इसलिए नॉर्थ जोन की पारी ढेर होने के बाद साउथ के सामने जीत के लिए सिर्फ 182 रन का लक्ष्य खड़ा हुआ।
भुई और जगदीशन की अच्छी शुरुआत, फिर आए झटके
182 रन का लक्ष्य भले ही आसान लगे, लेकिन फाइनल की सीट के लिए लड़ रही टीमें आसानी से रास्ता छोड़ने वाली नहीं थीं। साउथ जोन के ओपनर रिकी भुई और नारायण जगदीशन ने 64 रन की मजबूत साझेदारी करके टीम को अच्छी शुरुआत दी। लेकिन इसके बाद नॉर्थ जोन के गेंदबाजों ने तेजी से विकेट लिए और 102 रन पर साउथ के 3 विकेट गिर चुके थे। इस स्थिति में मैच अभी भी किसी भी ओर पलट सकता था और दबाव पूरी तरह साउथ जोन की ओर था।
कप्तान तिलक वर्मा ने अपने बल्ले से लिखा फाइनल का सपना
ठीक इसी समय, जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत थी, कप्तान तिलक वर्मा ने मैच की तकदीर को अपने बल्ले से लिख दिया। दबाव में खेलते हुए तिलक ने नाबाद 51 रन की शांत लेकिन प्रभावी पारी खेली। एक ओर विकेट गिरते देखे, दूसरी ओर धैर्य नहीं खोया। आखिरकार उन्हीं के बल्ले से विजयी चौका निकला और साउथ जोन 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल करते हुए फाइनल में पहुंच गई।
पहली पारी का शतक थी जीत की असली बुनियाद
अगर सिर्फ दूसरी पारी के 51 रन को देखकर तिलक की कारगिरी को तौला जाए, तो यह अधूरा अंदाजा होगा। पहली पारी में जब टीम मुश्किल में थी, तब तिलक ने बेहतरीन 116 रन का शतक खेलकर न सिर्फ पारी को संभाला, बल्कि टीम को 117 रन की बड़ी बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों पारियों मिलाकर उनके बल्ले से 167 रन निकले, जो इस जीत की सबसे बड़ी वजह बने।
ईशान किशन की ईस्ट जोन कर रही है फाइनल का इंतजार
जब साउथ जोन सेमीफाइनल में जीत की करतबगरी दिखा रही थी, उधर ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन पहले सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुकी थी। अब दोनों कप्तान खुद अपनी टीमों की बल्लेबाजी की कमान संभालेंगे, जो फाइनल को और दिलचस्प बनाता है.
तिलक वर्मा के लिए लाल गेंद की कसौटी पर बड़ी जीत
टी20 में अपनी पहचान बना चुके तिलक वर्मा के लिए लंबे फर्मैट में ऐसी पारियां करियर के लिहाज से बेहद अहम हैं। लाल गेंद की क्रिकेट में धैर्य, तकनीक और मानसिक मजबूती की कसौटी होती है, और इस सेमीफाइनल में तिलक ने दोनों पारियों में यह सब साबित कर दिखाया। ऐसे प्रदर्शन से राष्ट्रीय सेलेक्टर्स के सामने उनकी क्लेम भी मजबूत होती है।

























