दिल्ली का जंतर-मंतर देश की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। हालांकि, पिछले एक महीने से भी अधिक समय से यहां जारी एक विरोध प्रदर्शन ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस प्रदर्शन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने एक चौंकाने वाला आरोप लगाया है। उन्होंने साफ तौर पर दावा किया है कि इस आंदोलन के पीछे कोई स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि भारत को कमजोर और बर्बाद करने की साजिश रचने वाली वैश्विक ताकतें काम कर रही हैं।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और विदेशी संरक्षण का आरोप
इंद्रेश कुमार ने अपने बयान में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और उसके समर्थकों पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर जो युवा और छात्र इकट्ठा हुए हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि उनके आंदोलन का इस्तेमाल कुछ खास विदेशी संस्थाओं और ताकतों द्वारा अपने छिपे हुए एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
RSS नेता के अनुसार, ये अंतरराष्ट्रीय शक्तियां भारत की तरक्की से भयभीत हैं। उनका मकसद सिर्फ यही है कि भारत एक विकसित, आर्थिक रूप से मजबूत और शिक्षित राष्ट्र के रूप में उभरने से रुक जाए। इंद्रेश कुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक देश की जनता इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे के असली चेहरों को नहीं पहचान लेती, तब तक ये षड्यंत्रकारी ताकतें देश के अंदरूनी माहौल को खराब करती रहेंगी।
विकास और बर्बादी के बीच की जंग
इंद्रेश कुमार ने वर्तमान भारत की तस्वीर को एक ‘रोल मॉडल’ के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में भारत की एक अलग पहचान बन रही है। हजारों-लाखों स्टार्टअप्स के उभरने और तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम ने वैश्विक मंच पर भारत को एक प्रेरणास्थल बना दिया है।
उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया भारत की तरक्की, इसके युवाओं के नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति की तारीफ कर रही है, तब यहां कुछ लोग सड़कों पर उतरकर नकारात्मकता फैलाने का काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार जो विकास के काम कर रही है, उसमें हर नागरिक को भागीदार बनना चाहिए, न कि उसे रोकने वाले तत्वों के साथ खड़े होना चाहिए।
युवाओं से एक भावनात्मक अपील
जंतर-मंतर पर डटे हुए युवाओं को संबोधित करते हुए इंद्रेश कुमार ने एक बेहद भावनात्मक और तार्किक अपील की। उन्होंने कहा कि युवा ऊर्जा को सकारात्मक मूल्यों को अपनाने और देश निर्माण में लगाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आज हम जो कदम उठा रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल कायम करेंगे।
उन्होंने युवाओं से पूछा कि जब वैश्विक ताकतें भारत की शिक्षा, समृद्धि, खुशहाली और सद्भाव को तोड़ने की कोशिश कर रही थीं, तब क्या हमारा कर्तव्य नहीं है कि इस षड्यंत्र को नाकाम करें? क्या हमें अपने बच्चों को यह नहीं सिखाना चाहिए कि हमने देश को बर्बाद होने से कैसे बचाया?”
‘अच्छा नहीं कर सकते, तो बर्बाद तो मत करो’
अपने संबोधन के अंत में इंद्रेश कुमार ने एक करारी विचार रखा। उन्होंने कहा कि अगर आप देश या समाज के लिए कुछ अच्छा नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम इतना तय करें कि आप इसे बर्बाद भी नहीं करेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि अगर आपको दूसरों को अच्छा काम करते हुए देखने में दिक्कत होती है, या आप ईर्ष्या के कारण उस काम को खराब करने की कोशिश करते हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा व्यवहार किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है और ऐसा बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।
























