All-Women Everest Expedition Team: भारत के लिए एक ऐसा दिन जो हर भारतवासी के लिए गर्व और उत्साह का प्रतीक बन गया। इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) की पहली सर्व-महिला एवरेस्ट अभियान टीम ने आज दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) पर अपना झंडा गाड़ दिया है। यह केवल एक पर्वतारोहण की सफलता नहीं है, बल्कि यह ‘नारी शक्ति’ की अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का जीता-जागता प्रमाण है।
सुबह 06:52 बजे शुरू हुई जीत की गाथा
माउंट एवरेस्ट के दक्षिणी कॉल (South Col) मार्ग से चढ़ाई करते हुए, टीम की पहली महिला पर्वतारोही ने आज सुबह 06:52 बजे शिखर पर कदम रखा। यह क्षण उस लंबी और कठिन यात्रा का सबसे ऊंचा स्तर था, जिसमें हिमचालों, तेज हवाओं और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

लेकिन सबसे खास बात यह रही कि अभियान की शुरुआत से लेकर अंत तक टीम का एकता और समर्पण अडिग रहा। पहले सफलता के स्पर्श के बाद, धीरे-धीरे पूरी टीम शिखर पर पहुंची। सबसे खुशी की बात यह है कि अभियान में शामिल सभी 11 महिला क्लाइम्बर्स (Women Climbers) सुरक्षित रूप से शिखर पर पहुंचने में सफल रहीं। इस तरह यह 100 प्रतिशत सफल अभियान बन गया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
दक्षिणी कॉल मार्ग: कठिनाइयों की परीक्षा
एवरेस्ट की चढ़ाई कभी आसान नहीं होती, लेकिन ‘साउथ कॉल रूट’ (South Col Route) को माउंट एवरेस्ट का सबसे लोकप्रिय और साथ ही सबसे कठिन मार्गों में से एक माना जाता है। यह नेपाल की तरफ से चढ़ाई है, जहां ‘हिलेरी स्टेप’ और ‘जीनवा स्पर’ जैसी खतरनाक चट्टानें और गहरी खाईयां पर्वतारोहियों का हौसला तोड़ती हैं।
History made on Mount Everest. 🇮🇳#ITBP’s first-ever All-Women Expedition summited Mount Everest (8,848 m) via the South Col Route on 21 May 2026. With the first summit at 0652 hrs, all 11 women climbers reached the top. Proud moment for India. @PIB_India @PIBHomeAffairs pic.twitter.com/mtocQg2IK1
— ITBP (@ITBP_official) May 22, 2026

आईटीबीपी की इन बेटियों ने न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी इन चुनौतियों का सामना किया। मंगलवार की सुबह जब वे शिखर पर पहुंचीं, तो वहां का तापमान शून्य से काफी नीचे था और हवाओं की रफ्तार भयावह थी। फिर भी, तिरंगे को ऊंचा फहराने का जज्बा उनमें कहीं ज्यादा था।
आईटीबीपी: सरहदों की रक्षा से लेकर शिखरों की विजय तक
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) हमेशा से ही देश की सुरक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में तैनात रहती है। हिमालय की गोद में रहने वाले इन जवानों के लिए पहाड़ दूसरा घर है। लेकिन यह पहला मौका था जब आईटीबीपी ने एक पूरी तरह से महिलाओं की टीम को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर भेजा।
यह अभियान केवल रिकॉर्ड तोड़ने के लिए नहीं था, बल्कि यह एक संदेश था—कि भारतीय महिलाएं कोई भी सीमा पार कर सकती हैं। चाहे वह सीमा पर हो या आकाश में। इन महिला कांस्टेबलों ने अपनी प्रशिक्षण अवधि के दौरान जो कड़ी मेहनत और अनुशासन दिखाया, वह किसी भी सैन्य अकादमी के लिए प्रेरणास्पद है।
देश को किया गौरवान्वित
जैसे ही खबर आई कि सभी 11 महिला पर्वतारोही सुरक्षित रूप से शिखर पर पहुंच गई हैं, देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई। यह भारत की बेटियों की क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का एक अवसर था। सोशल मीडिया पर लोग इन शेरनियों को बधाई दे रहे हैं और उनके अभियान की सराहना कर रहे हैं।
ITBP की इस पहली ऑल-विमेन एवरेस्ट एक्सपीडिशन ने साबित कर दिया है कि मंजिलें चाहे कितनी भी ऊंची क्यों न हों, हौसले अगर बुलंद हैं तो हर पहाड़ टल जाता है। 21 मई 2026 का यह दिन भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। देश इन बहादुर बेटियों को सलाम करता है, जिन्होंने तिरंगे को 8,848 मीटर की ऊंचाई पर फहराकर देश का नाम रोशन किया है। यह भारत के लिए एक वास्तव में गौरव का क्षण है। जय हिंद!






















