श्रद्धा तिवारी
आज के दौर में फर्नीचर खरीदना कोई साधारण लेनदेन नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसा अनुभव बन चुका है जहां तकनीक और आपकी पसंद का अनूठा मेल होता है। भारत के लीडिंग फर्नीचर ब्रांड्स में से एक, इंटेरियो बाय गोदरेज ने इसी क्रांति को अंजाम दिया है।
पिछले तीन वर्षों के दौरान, कंपनी ने अपने तकनीक-आधारित अप्रोच के चलते अपने ऑनलाइन या ई-कॉमर्स कारोबार में जबरदस्त 14 गुना की वृद्धि दर्ज की है। आइए गहराई से समझते हैं कि कैसे इंटेरियो ने पारंपरिक खुदरा बिक्री के तरीकों को ताक पर रखकर एक बिल्कुल नया और डिजिटल अनुभव ग्राहकों को दिया है।
AI और 3D तकनीक से बदला फर्नीचर चुनने का तरीका
कभी सोचिए है कि कोई सोफा या बेड आपके कमरे में असल में कैसा दिखेगा? अक्सर हमें कल्पना करनी पड़ती है, लेकिन इंटेरियो ने इस कमी को तकनीक के जरिए दूर किया है। ब्रांड ने अपनी वेबसाइट और ऐप पर ऐसे टूल्स को इंटीग्रेट किया है जो सिर्फ सामान दिखाने तक सीमित नहीं हैं। जैसे ही आप अपनी पसंद या रूम का साइज डालते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपको बेस्ट ऑप्शन्स सुझाता है।
ग्राहक अपने घर की एक खाली जगह का वीडियो या फोटो अपलोड करके वहां फर्नीचर को वर्चुअली सेट कर सकते हैं। इसकी मदद से आप अपने रूम का एक पूरा लेआउट तैयार कर सकते हैं। जरूरत के हिसाब से रंग, साइज और डिजाइन में बदलाव करवाने की आजादी।
इन डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों में खरीदारी (कन्वर्जन रेट) में 6% का एक बड़ा सुधार देखा गया है। यह आंकड़ा बताता है कि जब ग्राहक को सही नजरिया मिलता है, तो उसका भरोसा बढ़ता है।
आंकड़े बयां करते हैं सफलता की कहानी
तकनीक के इस्तेमाल से इंटेरियो के ई-कॉमर्स रेवेन्यू में जो उछाल आया है, वह बेहद प्रभावशाली है। पिछले तीन सालों में 14 गुना वृद्धि के साथ, आज कंपनी के कुल फर्नीचर कारोबार में ऑनलाइन चैनल की हिस्सेदारी 15% तक पहुंच चुकी है।
लेकिन, ऑनलाइन ऑर्डर देना आधा काम है, असली चुनौती उसे सही समय पर और सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की होती है। इंटेरियो ने अपनी डिलीवरी और इंस्टॉलेशन की पहुंच को बेहद व्यापक बनाया है। जहां पहले यह सेवा महज 1,200 पिनकोड्स तक सीमित थी, वहीं अब यह 20,000 से अधिक पिनकोड्स को कवर करती है। इसके अलावा, राज्यों की राजधानियों में तो ग्राहकों को 24 घंटे के भीतर उनका फर्नीचर डिलीवर करके इंस्टॉल करने की सुविधा दी जा रही है।
ऑफलाइन स्टोर्स से ‘एक्सपीरियंस हब्स’ में बदले शोरूम
क्या ऑनलाइन की इस तगड़ी ग्रोथ के बाद फिजिकल स्टोर्स का कोई महत्व नहीं रहा? इंटेरियो का जवाब है- बिल्कुल है, लेकिन उनका रोल बदल गया है। रीब्रांडिंग के बाद कंपनी ने ‘प्रोडक्ट-सेंट्रिक’ मॉडल को छोड़ दिया और ‘एक्सपीरियंस-सेंट्रिक’ मॉडल अपनाया। अब 20 बड़े शहरों में मौजूद 137 स्टोर्स को केवल फर्नीचर रखने की जगह बनाकर एक तरह के टेक-लैब में तब्दील कर दिया गया है।
यहां ग्राहक सीधे डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करते हैं और डिजाइन कंसल्टेंट्स के साथ बैठकर अपने घर का डिजाइन फाइनल करते हैं। यह एक बेहतरीन ऑमनीचैनल रणनीति है, जहां ऑनलाइन और ऑफलाइन की दुनिया आपस में गुथी हुई है।
बदलते भारत और शहरी परिवारों की नई जरूरतें
इंटेरियो के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और कंज्यूमर बिजनेस के हेड, डॉ. देव नारायण सरकार के अनुसार, भारत में रहन-सहन का तरीका तेजी से बदल रहा है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक शहरीकरण बढ़ रहा है। परिवारों का आकार छोटा हो रहा है और घरों की जगह सीमित है।
आज का ग्राहक वह फर्नीचर नहीं चाहता जो सिर्फ जगह घेरे, बल्कि वह ऐसे मल्टी-फंक्शनल समाधान चाहता है जो उसके लाइफस्टाइल में फिट बैठे और बदलती जरूरतों के साथ ढल सके। डॉ. सरकार का मानना है कि इंटेरियो सिर्फ लकड़ी और कपड़ा नहीं बेच रहा, बल्कि वह ग्राहकों को उनके स्पेस का सही इस्तेमाल करने में मदद कर रहा है।
बैकएंड में तकनीक का इस्तेमाल
ग्राहकों को सामने जो शानदार अनुभव मिल रहा है, वह किसी जादू से नहीं हो रहा। इसके पीछे कंपनी के बैकएंड ऑपरेशन में भी भारी तकनीकी अपग्रेडेशन किया गया है। इंटेरियो ने अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए ‘रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन’ पर भरोसा किया है।
इसका मतलब है कि ऑर्डर लेने से लेकर उसे वेयरहाउस तक पहुंचाने, डिलीवरी बॉय्स को असाइन करने और इंस्टॉलेशन टीम को अलर्ट भेजने तक की पूरी प्रक्रिया अब मैनुअल नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड सप्लाई-चेन प्लेटफॉर्म के जरिए होती है। इस कनेक्टेड टेक्नोलॉजी सिस्टम से गलतियों की गुंजाइश खत्म हो गई है और ग्राहकों को मिलने वाली सर्विस की रफ्तार दोगुनी हो गई है।


























