संध्या समय न्यूज
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापारिक तनातनी (टैरिफ वॉर) को खत्म करने की दिशा में शुक्रवार को एक बड़ी कामयाबी मिली है। दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते’ (India-US Trade Deal) के ढांचे की घोषणा की है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ में भारी कटौती का ऐलान किया है, जबकि भारत ने अमेरिकी सामानों की खरीद बढ़ाने और रूस से तेल आयात को लेकर बड़े कदम उठाने पर सहमति जताई है।
अमेरिका ने घटाया भारतीय सामान पर टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में किए गए ऐलान के मुताबिक, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर देगा। शुक्रवार को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर करके टैरिफ के 25 फीसदी हिस्से को तुरंत प्रभाव से हटा दिया है। यह कदम भारत के रूसी तेल आयात को कम करने की प्रतिबद्धता के बाद उठाया गया है, जिसे अमेरिका यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद के रूप में देख रहा था। अब भारत अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात करने पर सहमत हो गया है। 18 फीसदी की यह दर अधिकांश भारतीय निर्यात जैसे वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, हस्तशिल्प और घरेलू सजावट के सामान पर लागू होगी। हालांकि, भारत को कुछ विमानों, विमान पुर्जों और ऑटो कंपोनेंट्स पर टैरिफ में छूट या कम दर मिलेगी।
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भारत की बड़ी प्रतिबद्धता: 500 अरब डॉलर का आयात
इस डील के तहत भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने का वादा किया है। इसमें तेल, गैस, कोकिंग कोयला, रक्षा उपकरण, विमान और एआई (AI) डेटा सेंटर्स के लिए इस्तेमाल होने वाले तकनीकी उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा, भारत अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर भी शुल्क कम करेगा या समाप्त कर देगा, जिसमें सूखे अनाज, मेवे, फल, सोयाबीन तेल और शराब प्रमुख हैं।
भारतीय कारोबारियों के लिए अवसर
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस विकास का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फ्रेमवर्क भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार तक पहुंच को आसान बनाएगा। इससे विशेष रूप से भारत के किसानों, मछुआरों और एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। गोयल ने बताया कि इस औपचारिक व्यापार समझौते पर मार्च तक हस्ताक्षर हो सकते हैं।
नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाने पर भी सहमति
टैरिफ कटौती के अलावा, दोनों देशों ने व्यापारिक बाधाओं को दूर करने पर भी सहमति बनाई है। भारत ने कृषि उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों और संचार उपकरणों पर लंबे समय से चली आ रही नॉन-टैरिफ बाधाओं को खत्म करने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों पक्ष छह महीने के भीतर आयातित उत्पादों के लिए अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और लाइसेंसिंग मानकों को मान्यता देने वाले समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखेंगे।
सामरिक और आर्थिक महत्व
यह समझौता चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को विविधीकरण देने की रणनीतिक जरूरत को देखते हुए किया गया है। दोनों देशों ने संवेदनशील प्रौद्योगिकियों पर निर्यात नियंत्रणों को लागू करने और चीन की “गैर-बाजार नीतियों” के मुद्दे पर मिलकर काम करने की बात कही है। इस डील के साथ, दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में भारी उछाल आने की संभावना है।


























