गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के प्रमुख फर्नीचर ब्रांड ‘इंटेरियो बाय गोदरेज’ (Interio by Godrej) ने अपना नया व्हाइटपेपर जारी किया है, जिसका शीर्षक है — “बियॉन्ड द स्क्रीन्स: द राइज़ ऑफ़ स्मार्ट लर्निंग स्पेसिस” (Beyond the Screens: The Rise of Smart Learning Spaces)। यह रिपोर्ट बताती है कि भारत भर के स्कूल किस तरह तकनीक आधारित पढ़ाई को अपना रहे हैं और असरदार स्मार्ट लर्निंग माहौल तैयार करने के लिए किन चीजों की जरूरत है।
स्मार्ट क्लासरूम में तकनीक और लचीलापन
‘इंटेरियो बाय गोदरेज’ के वर्कस्पेस एंड एर्गोनॉमिक्स रिसर्च सेल द्वारा तैयार यह अध्ययन बताता है कि तकनीक, आरामदायक फर्नीचर और फ्लेक्सिबल क्लासरूम लेआउट मिलकर छात्रों की भागीदारी, आपसी सहयोग और सीखने की क्षमता को कैसे बेहतर बना सकते हैं। इस रिसर्च में विभिन्न विषयों, क्षेत्रों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के 19 से 28 वर्ष के छात्रों के विचार शामिल किए गए हैं।
स्मार्ट कक्षाओं से बदलता शिक्षा का स्वरूप
अध्ययन के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए इंटेरियो बाय गोदरेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बी2बी बिजनेस के प्रमुख समीर जोशी ने कहा, “भारत की शिक्षा व्यवस्था में 14.71 लाख से अधिक स्कूल हैं और इनमें 24.69 करोड़ से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में सीखने के वातावरण की गुणवत्ता भविष्य के शैक्षणिक परिणामों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत 1.47 लाख करोड़ रुपये के सरकारी निवेश ने तकनीक-सक्षम कक्षाओं को अपनाने की प्रक्रिया को तेज किया है। कक्षा अब केवल जानकारी देने की जगह नहीं रह गई है; यह ऐसा वातावरण बन रही है, जहां सहयोग, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच को विकसित किया जाता है।
स्मार्ट लर्निंग स्पेस: शिक्षा का भविष्य
“स्कूलों ने डिजिटल तकनीकों को अपनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन बदलाव का अगला चरण ऐसे लर्निंग स्पेस तैयार करना है, जहां तकनीक के साथ बेहतर डिजाइन, एर्गोनॉमिक्स, लचीलापन और आराम का भी ध्यान रखा जाए। गोदरेज इंटरियो में हमारा मानना है कि शिक्षा का भविष्य केवल स्मार्ट उपकरणों पर निर्भर नहीं है, बल्कि स्मार्ट लर्निंग स्पेस पर भी निर्भर है, जो शिक्षकों को बेहतर ढंग से पढ़ाने और छात्रों को बेहतर तरीके से सीखने में सक्षम बनाते हैं।”
श्वेतपत्र में यह भी कहा गया है कि केवल तकनीक के इस्तेमाल से लर्निंग एनवायरमेंट में बदलाव नहीं लाया जा सकता। स्क्रीन की स्पष्ट दृश्यता, बेहतर ध्वनि व्यवस्था, कक्षा का उपयुक्त लेआउट, एर्गोनॉमिक फर्नीचर, भरोसेमंद रखरखाव और एकीकृत लर्निंग स्पेस भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इन सभी पहलुओं को साथ लेकर चलने से ही तकनीक शिक्षा के क्षेत्र में सार्थक और प्रभावी परिणाम दे सकती है।
























