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गाड़ी मालिकों की बल्ले-बल्ले! अब 3 साल तक नंबर नहीं बदलेगा

इस बदलाव का सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिलेगा जो नौकरी के कारण बार-बार राज्यों के बीच स्थान बदलते हैं। इनमें सरकारी कर्मचारी, निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी, बैंकिंग सेक्टर के लोग और प्रोजेक्ट या कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर दूसरे राज्यों में जाने वाले कर्मचारी शामिल हैं।

वाहन मालिकों के लिए सरकार का नया तोहफा, आसान होंगे नियम

HIGHLIGHTS

  • सरकार का बड़ा फैसला, दूसरे राज्य में नंबर बदलने से राहत
  • वाहन मालिकों को बड़ी राहत, अब नहीं होगी बार-बार परेशानी
  • दूसरे राज्य जाने वालों के लिए खुशखबरी, बदलेगा पुराना नियम
  • कार-बाइक वालों के लिए बड़ी खबर, सरकार ने बदले नियम
  • अब दूसरे राज्य में चलाएं गाड़ी, नंबर बदलने की टेंशन खत्म

देश में नौकरी, कारोबार या अन्य कारणों से एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले लाखों वाहन मालिकों के लिए केंद्र सरकार जल्द ही बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो लोगों को दूसरे राज्य में जाने के बाद अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर बदलवाने की परेशानी से काफी राहत मिल सकती है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य उन लोगों की परेशानियों को कम करना है, जिन्हें नौकरी या किसी असाइनमेंट के कारण कुछ वर्षों के लिए दूसरे राज्य में रहना पड़ता है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

अब एक साल की जगह तीन साल तक नहीं बदलना होगा रजिस्ट्रेशन

मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी गाड़ी को दूसरे राज्य में 12 महीने से अधिक समय तक इस्तेमाल करता है, तो उसे वहां नया रजिस्ट्रेशन नंबर लेना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति की गाड़ी दिल्ली नंबर की है और वह महाराष्ट्र में एक साल से ज्यादा समय तक रहता है, तो उसे महाराष्ट्र का नंबर लेने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।

इस प्रक्रिया में कई तरह के दस्तावेज, टैक्स से जुड़ी औपचारिकताएं और समय की परेशानी होती है। कई लोगों को कुछ समय बाद वापस अपने पुराने राज्य में लौटने पर फिर से रजिस्ट्रेशन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार इस अवधि को बढ़ाकर तीन साल किया जा सकता है। यानी अगर कोई व्यक्ति दूसरे राज्य में तीन साल तक रहता है तो उसे तुरंत अपना वाहन नंबर बदलने की जरूरत नहीं होगी।

किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

इस बदलाव का सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिलेगा जो नौकरी के कारण बार-बार राज्यों के बीच स्थान बदलते हैं। इनमें सरकारी कर्मचारी, निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी, बैंकिंग सेक्टर के लोग और प्रोजेक्ट या कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर दूसरे राज्यों में जाने वाले कर्मचारी शामिल हैं।

अक्सर ऐसा होता है कि किसी कर्मचारी का ट्रांसफर दो या तीन साल के लिए दूसरे राज्य में हो जाता है। ऐसे में वर्तमान नियम के कारण उसे वाहन रजिस्ट्रेशन बदलने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि कुछ समय बाद उसे वापस अपने गृह राज्य लौटना होता है। सरकार का मानना है कि नियमों में बदलाव से लोगों को अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी और जीवन आसान बनाने के उद्देश्य को बढ़ावा मिलेगा।

BH सीरीज नंबर वालों से अलग होगी सुविधा

सरकार पहले ही भारत सीरीज यानी BH नंबर प्लेट की सुविधा शुरू कर चुकी है। इसका उद्देश्य भी ऐसे लोगों को राहत देना था जिनका काम लगातार अलग-अलग राज्यों में रहता है।

हालांकि BH सीरीज नंबर हर वाहन मालिक के लिए उपलब्ध नहीं है। कई लोग इसके पात्र नहीं होते हैं। ऐसे वाहन मालिकों के लिए यह नया नियम काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

हालांकि वाहन रजिस्ट्रेशन की समस्या कम होने के बावजूद रोड टैक्स से जुड़ा मुद्दा अभी भी बना हुआ है। देश के अलग-अलग राज्यों में वाहन टैक्स की दरें अलग-अलग हैं।

जब कोई व्यक्ति दूसरे राज्य में वाहन ले जाता है तो कई बार उसे टैक्स संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रजिस्ट्रेशन अवधि बढ़ाने से पूरी समस्या खत्म नहीं होगी।

वाहन मालिकों को वास्तविक राहत तब मिलेगी जब राज्यों के बीच रोड टैक्स व्यवस्था को सरल बनाया जाएगा। इसके लिए टैक्स ट्रांसफर की डिजिटल सुविधा और एक समान प्रक्रिया की जरूरत है, जिससे लोगों को अलग-अलग राज्यों के नियमों में उलझना न पड़े।

ट्रैफिक चालान व्यवस्था में भी होगा बदलाव

मोटर वाहन कानून में प्रस्तावित बदलाव सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है। सरकार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े छोटे मामलों को भी आसान बनाने की योजना बना रही है।

प्रस्ताव के तहत कुछ छोटे ट्रैफिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की तैयारी है। इसका मतलब यह होगा कि ऐसे मामलों को सीधे अदालत में भेजने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर ही निपटाया जा सकेगा।

इसके लिए राज्यों को एक अधिकृत अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो जुर्माने और चालान से जुड़े मामलों का समाधान कर सके। साथ ही राज्यों को डिजिटल व्यवस्था तैयार करनी होगी, ताकि प्रक्रिया ऑनलाइन और तेज हो सके।

Sandhya Samay News

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