Ekdant Sankashti Chaturthi 2026: हिन्दू धर्म में प्रत्येक तिथि का अपना विशेष महत्व होता है। अमान्त हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख माह (जबकि पूर्णिमान्त कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आज को एकदन्त संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाई जा रही है। इस दिन भगवान गणेश के एकदन्त रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आस्था और भक्ति का यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
कौन हैं एकदन्त गणेश?
शाब्दिक अर्थों में ‘एकदन्त’ का तात्पर्य ‘एक दाँत वाले गणेश जी’ से है। सनातन धर्म में भगवान गणेश के कुल आठ प्रमुख रूपों को ‘अष्टविनायक’ कहा जाता है। एकदन्त गणेश इन्हीं अष्टविनायक रूपों में से एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्वरूप माने जाते हैं। मान्यता है कि इस रूप की उपासना से व्यक्ति की बुद्धि का विकास होता है और मन की अशांति दूर होती है।
एक दाँत टूटने के पीछे की रोचक पौराणिक कथा
हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार गणेश जी के एकदन्त होने के पीछे एक दिलचस्प प्रसंग है। एक बार भगवान परशुराम भगवान शिव से भेंट करने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे। तभी गणेश जी, जो कि शिव-पार्वती के द्वारपाल थे, ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
इस रुकावट पर क्रोधित होकर भगवान परशुराम ने अपने अमोघ परशु (फरसा) से गणेश जी पर प्रहार कर दिया। गणेश जी ने इस प्रहार को अपने एक दाँत पर झेला, जिससे उनका एक दाँत टूटकर गिर गया। तब से भगवान गणेश ‘एकदन्त’ के रूप में ही प्रसिद्ध हुए।
संकष्टी व्रत का महत्व
संकष्टी चतुर्थी के दिन भक्त पूरे दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं। शाम के समय चन्द्रोदय के बाद भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धूप, दीप, लाल पुष्प, दूर्वा और लड्डू आदि का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद चन्द्र दर्शन करके ही व्रत का पारण किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकदन्त संकष्टी चतुर्थी के दिन किए गए व्रत और पूजन से जातक के जीवन के सभी प्रकार के संकष्ट (कष्ट) दूर होते हैं और कार्यों में आने वाली बाधाएं कट जाती हैं। आज देशभर के गणेश मंदिरों में भक्तों का जमावड़ा उमड़ता हुआ देखा गया, जहाँ सुबह से ही भगवान एकदन्त की भव्य शृंगार आरती का आयोजन किया गया।
























