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महंगाई का दोहरा झटका: आम आदमी को लग सकता है दूध झटका

Double blow of inflation: देश की अग्रणी डेयरी कंपनी 'गो चीज' और 'गोवर्धन' ब्रांड की मालिक पराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन के अनुसार, मई में दूध की कीमतें 2-3 फीसदी बढ़ चुकी हैं। लेकिन अगर मुख्य दूध उत्पादक राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) में बारिश सामान्य से कम रही, तो जुलाई तक दूध 3 से 4 फीसदी और महंगा हो सकता है।

एल नीनो की मार से फिर से दूध होगा महंगा

HIGHLIGHTS

  • कम बारिश और सूखे से दूध की कीमतों में उछाल
  • जुलाई तक दूध चार फीसदी तक महंगा हो सकता है
  • चारे की कमी से आम आदमी के बजट पर बोझ
  • मौसम के मिजाज से तय होगी दूध की नई कीमत
  • जुलाई में दूध के दाम फिर से बढ़ने का अनुमान

Double blow of inflation: देश में आम आदमी की रसोई का बजट एक बार फिर से बिगड़ने के कगार पर है। कुछ हवा का झोंका और कुछ बादलों की कमी इस बार सीधा आपके गिलास में दूध की कीमत को महंगा कर सकती है। हाल ही में अमूल, मदर डेयरी और पराग मिल्क फूड्स जैसी दिग्गज कंपनियों ने दूध के दाम में 2 से 3 फीसदी की बढ़ोतरी करके लोगों के बजट को झटका दिया था। लेकिन अब एक नई रिपोर्ट से सामने आया है कि जुलाई या अगस्त तक दूध की कीमतें और 3 से 4 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। इस पूरे संकट के पीछे मौसम का एक खास पैटर्न ‘एल नीनो’ (El Nino) और कम बारिश का डर सामने आ रहा है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

क्या है ‘एल नीनो’ और इसका दूध से क्या कनेक्शन?

प्रशांत महासागर में बनने वाला ‘एल नीनो’ एक मौसमी चक्र है, जो दुनिया भर में मौसम को बेतहाशा प्रभावित करता है। भारत के संदर्भ में एल नीनो का सीधा मतलब ‘कमजोर मानसून’ या सूखा पड़ना है। जब बारिश कम होती है, तो चारे की फसलें (जैसे बाजरा, ज्वार, चारा) सूख जाती हैं। डेयरी उद्योग पूरी तरह से हरे और सूखे चारे पर निर्भर है। चारे की कमी होने पर दूध देने वाले पशुओं का पोषण प्रभावित होता है, जिससे सीधे तौर पर दूध का उत्पादन घट जाता है। मांग बराबर होने के बावजूद जब आपूर्ति कम होती है, तो कीमतों में भारी उछाल आता है।

गर्मी और लू का असर भी भारी

एल नीनो और बारिश के अलावा इस समय उत्तर और पश्चिम भारत में लू (हीटवेव) भी पड़ रही है। तेज गर्मी में मवेशियों को तरल पदार्थों और पानी की ज्यादा जरूरत होती है। पानी की कमी और तपती धूप के कारण जानवरों में तनाव बढ़ता है, जिससे उनके दूध देने की क्षमता करीब 10 से 15 फीसदी तक गिर जाती है। तमिलनाडु की सरकारी डेयरी ‘आविन’ ने तो लू के चलते दूध की सप्लाई को कम करने का फैसला लिया है, जो यह दर्शाता है कि हालात कितने गंभीर हैं।

डेयरी इंडस्ट्री की चिंता और भविष्यवाणी

देश की अग्रणी डेयरी कंपनी ‘गो चीज’ और ‘गोवर्धन’ ब्रांड की मालिक पराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन देवेंद्र शाह के अनुसार, मई में दूध की कीमतें 2-3 फीसदी बढ़ चुकी हैं। लेकिन अगर मुख्य दूध उत्पादक राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) में बारिश सामान्य से कम रही, तो जुलाई तक दूध 3 से 4 फीसदी और महंगा हो सकता है।

किसानों पर क्या पड़ता है असर?

आमतौर पर जब सूखा पड़ता है, तो किसानों और पशुपालकों के पास जानवरों को खिलाने के लिए पैसे या चारा नहीं बचता। ऐसे में वे मवेशियों की संख्या कम करने लगते हैं, यानी उन्हें मंडियों में बेच देते हैं। इससे दूध का उत्पादन अचानक गिर जाता है और बाजार में कीमतें आसमान छूने लगती हैं।

सरकार और कंपनियां क्या तैयारी कर रही हैं?

इस आसमानी महंगाई से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र के पशुपालन आयुक्त किरण पाटिल ने स्पष्ट कहा है कि एल नीनो के कारण चारे की कमी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने पशुपालकों से अभी से चारे की फसलों की योजना बनाने और जलसंचय पर ध्यान देने की अपील की है। कई प्राइवेट डेयरी कंपनियां भी किसानों के साथ मिलकर चारे को लेकर लंबी अवधि की योजनाओं पर काम कर रही हैं।

अमूल और मदर डेयरी का क्या कहना है?

हालांकि, सबको इतनी जल्दी घबराने की जरूरत नहीं है। देश की सबसे बड़ी डेयरी कंपनी अमूल के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता का मानना है कि अभी एल नीनो का कोई तत्काल असर दूध की उपलब्धता पर नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि अमूल कोई भी निर्णय लेने से पहले मानसून की प्रगति पर नजर रखेगा। कम बारिश का असर आमतौर पर पूरे देश पर एक जैसा नहीं पड़ता, बल्कि यह कुछ खास इलाकों तक सीमित रहता है।

वहीं, मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने भी यह साफ किया कि चारे की स्थिति अभी चिंता का विषय नहीं बनी है। उन्होंने बताया कि कंपनी राज्य-दर-राज्य अपने खरीद नेटवर्क में हो रही गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रही है और जहां भी जरूरत महसूस होगी, वहां बचाव के उपाय किए जाएंगे।

आम आदमी को क्या करना चाहिए?

दूध भारतीय थाली का अनिवार्य हिस्सा है। चाय से लेकर दही, छाछ, पनीर और मिठाइयों तक, दूध का इस्तेमाल हर जगह होता है। अगर जुलाई-अगस्त तक दूध 4 फीसदी और महंगा होता है, तो इसका असर सीधे आपके महीने के किराने के बजट पर पड़ेगा। हालांकि, अभी मौसम के बदलाव और मानसून की रफ्तार पर सबकी नजरें टिकी हैं। फिलहाल, आम आदमी के लिए बेहतर यही होगा कि वह अपने महीने के बजट को थोड़ा और टाइट रखने की तैयारी कर ले, क्योंकि मौसम के इस खेल में बारिश के बादल ही अब राहत की आखिरी उम्मीद हैं।

Sandhya Samay News

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