Dangerous River Shanay-Timpishka Story: धरती पर तरह-तरह की नदियां बहती हैं। कुछ नदियों का पानी बर्फ से भी ज्यादा ठंडा होता है, तो कुछ की लहरें इतनी शांत होती हैं कि जीवन को सीने लगाने का मन करता है। लेकिन प्रकृति के नियम कभी-कभी हमारी समझ से परे होते हैं। क्या आपने कभी किसी ऐसी नदी के बारे में सुना है जिसका पानी इतना गर्म है कि उसमें जानवर उबलकर मर जाते हैं? शायद यह सुनने में किसी काल्पनिक कहानी या फिल्म की पटकथा जैसा लगे, लेकिन यह सच है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
‘शानाय-टिम्पिश्का’ (Shanay-Timpishka) क्या है?
बता दें कि दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में स्थित देश पेरू (Peru) के घने अमेजन वर्षावनों के बीच एक ऐसी ही दहशतदेह और अनोखी नदी बहती है, जिसके बारे में जानकर वैज्ञानिकों के भी होश उड़ गए थे। इस रहस्यमयी और खतरनाक नदी को दुनिया भर में “Boiling River” के नाम से जाना जाता है। स्थानीय आदिवासी भाषा में इसे ‘शानाय-टिम्पिश्का’ कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है “बॉयल्ड विद द हीट ऑफ द सन” (सूरज की गर्मी से उबलना)। यह नदी अपनी विलक्षण और जानलेवा विशेषताओं के चलते दुनिया भर के प्रकृति प्रेमियों, भूविज्ञानियों और शोधकर्ताओं के लिए एक बड़े रहस्य बनी हुई है।
कितना खतरनाक है इस नदी का पानी?
बता दें कि आम तौर पर किसी नदी का पानी हमारे शरीर के तापमान से कम होता है, लेकिन शानाय-टिम्पिश्का का किस्सा बिल्कुल उल्टा है। शोधकर्ताओं द्वारा किए गए मापन के अनुसार, इस नदी के कुछ खास हिस्सों में पानी का तापमान तकरीबन 100 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। यानी सीधे शब्दों में कहें तो, यहां का पानी खौलने की कगार पर होता है।
बता दें कि नदी के सतह पर लगातार भारी मात्रा में भाप उठती रहती है। ऐसे में अगर कोई इंसान, जानवर या पक्षी सीधे इस गर्म पानी के संपर्क में आ गया, तो सेकंडों में उसकी त्वचा बुरी तरह से झुलस जाएगी। छोटे जीव-जंतुओं, मछलियों या पक्षियों का तो इसमें गिरना मौत के समान है, क्योंकि इतनी तेज गर्मी में उनके बचने की कोई गुंजाइश नहीं बचती है। हालांकि, पूरी नदी का पानी 100 डिग्री पर नहीं उबलता, लेकिन कई स्थानों पर तापमान 80 से 90 डिग्री के बीच बना रहता है, जो जानलेवा है।
ज्वालामुखी के बिना नदी के उबलने का रहस्य
देखा जाए तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस नदी का पानी इतना गर्म क्यों है? हम जानते हैं कि दुनिया में जहां-जहां गर्म पानी के झरने या उबलती नदियां हैं, वहां आमतौर पर किसी न किसी सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcano) की मौजूदगी होती है। लेकिन शानाय-टिम्पिश्का नदी के मामले में यह नियम काम नहीं करता। इस नदी के आस-पास के कई किलोमीटर के दायरे में कोई भी ज्वालामुखी मौजूद नहीं है।
तो फिर यह अद्भुत और खतरनाक तापमान कहां से आ रहा है? वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे धरती के गर्भ की अविश्वसनीय ताकत काम कर रही है। दरअसल, यह एक भू-तापीय तंत्र (Geothermal System) है।
अमेजन के जंगलों में होने वाली भारी बारिश का पानी जमीन के अंदर गहराई तक चला जाता है। जमीन की गहराई में मौजूद फॉल्ट लाइन्स (दरारें) और चट्टानों के बीच यह पानी धरती के गर्म कोर के करीब पहुंच जाता है। वहां मौजूद अत्यधिक गर्म चट्टानें इस पानी को तेजी से गर्म कर देती हैं। फिर यह उबला हुआ पानी दबाव के कारण वापस सतह की तरफ आता है और नदी के रूप में बहने लगता है। यही कारण है कि बिना किसी ज्वालामुखी के भी यह नदी लगातार उबलती रहती है।
स्थानीय जनजातियों का विश्वास और विज्ञान की पुष्टि
दिलचस्प बात यह है कि जब तक पश्चिमी विज्ञान इस नदी को खोज नहीं पाया था, तब तक पेरू की स्थानीय आदिवासी जनजातियां इसके बारे में सदियों से जानती थीं। उनके लिए यह नदी कोई जलस्रोत नहीं, बल्कि एक पवित्र और अत्यंत शक्तिशाली स्थान था। वे इसकी गर्मी का इस्तेमाल जड़ी-बूटियों को उबालने और अपने दैनिक जीवन में भी करते थे, हालांकि वे नदी के उन हिस्सों से सैकड़ों फीट दूर रहते थे जहां पानी जानलेवा रूप से गर्म था।
जब आधुनिक वैज्ञानिकों ने यहां पहुंचकर तापमान मापा, तब जाकर दुनिया ने इस अद्भुत प्राकृतिक निर्माण को मान्यता दी। आज यह नदी पृथ्वी पर मौजूद सबसे बड़े भू-तापीय जलस्रोतों में से एक मानी जाती है।
आज भी ‘शानाय-टिम्पिश्का’ वैज्ञानिकों के लिए एक बड़े शोध का विषय बना हुआ है। शोधकर्ता लगातार इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में पानी इतनी गहराई से ऊपर कैसे आ रहा है और क्या इसके तंत्र में भविष्य में कोई बदलाव आ सकता है? इसके अलावा, इतनी अधिक गर्मी और एसिडिक पानी में कुछ विशेष प्रकार के कीटाणुओं और बैक्टीरिया के जीवित बचे रहना भी जीवविज्ञान के लिए एक नई उम्मीद जगाता है।

























