Delhi News: दिल्ली में दशकों से अनिश्चितता के साए में जी रहे लाखों लोगों के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को ‘As is, Where is’ (जैसा है, जहां है) के आधार पर नियमित किया जाएगा। इस फैसले से दिल्ली के लगभग 50 लाख निवासियों के अपने घर का मालिकाना हक पाने का सपना साकार होगा और संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी।
मंगलवार को नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस दूरगामी निर्णय की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला दिल्ली के शहरी विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।
‘पीएम-उदय’ को मिली नई रफ्तार, डीडीए से राजस्व विभाग को जिम्मा
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में ‘पीएम उदय’ (PM-UDAY) योजना की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य निवासियों को उनके घरों का मालिकाना हक देना था। हालांकि, यह योजना डीडीए (DDA) के अधीन होने और जटिल कागजी कार्रवाई के चलते अपेक्षाकृत धीमी रही और अब तक करीब 40 हजार मकानों का ही नियमितीकरण हो सका था।
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अब केंद्र सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह सरल बना दिया है। नियमितीकरण का काम अब डीडीए की बजाय दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग को दे दिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अब आवेदन के मात्र 45 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
1511 कॉलोनियों को मिलेगी नियमितीकरण की सौगात
सरकार के इस नए मास्टर प्लान के तहत दिल्ली की कुल 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 कॉलोनियों को नियमितीकरण की श्रेणी में शामिल किया गया है। शेष बची कॉलोनियों पर तकनीकी मूल्यांकन के बाद निर्णय लिया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत, पात्रता पूरी करने वाले निवासियों को राजस्व विभाग की ओर से ‘कन्वेयंस डीड’ (Conveyance Deed) जारी की जाएगी, जो संपत्ति के पूर्ण मालिकाना हक का वैधानिक प्रमाण होगा। आवेदकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए डिजिटल इंटरफेस को और अधिक मजबूत किया गया है।
‘अवैध’ का टैग हटने से लोगों में खुशी
‘As is, Where is’ के सिद्धांत का अर्थ है कि वर्तमान निर्माण की स्थिति को स्वीकार करते हुए उसे कानूनी मान्यता दी जाएगी। इससे उन हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके घर मौजूदा बिल्डिंग बायलॉज के कुछ कड़े मापदंडों पर खरे नहीं उतर रहे थे। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इमारतों की सुरक्षा मानकों और सार्वजनिक उपयोगिता की भूमि (जैसे नाली, सड़क) पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
संगम विहार, बुराड़ी और उत्तम नगर जैसे सघन आबादी वाले क्षेत्रों के निवासियों ने इस फैसले का हर्षजनक स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि दशकों से वे ‘अवैध’ के टैग के साथ जी रहे थे, जिससे उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से कई बार झुकना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें भी अपने शहर में सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिलेगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र के इस फैसले का दिल्ली की राजनीति पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। इस कदम से दिल्ली के एक बड़े वोट बैंक पर सीधा असर देखने को मिल सकता है। भाजपा इसे ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में प्रचारित कर रही है, वहीं दिल्ली सरकार के स्तर पर राजस्व विभाग के माध्यम से इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी और माननीय केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी का दिल्ली की जनता की ओर से आभार।
आज का दिन दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत, सम्मान और अधिकार का नया अध्याय लेकर आया है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने वर्षों से अनदेखी इस पीड़ा को… pic.twitter.com/ndVFcngc2S
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) April 7, 2026
आने वाले महीनों में दिल्ली के रियल एस्टेट मार्केट और शहरी परिदृश्य में इस फैसले के व्यापक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। अब सबकी निगाहें दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग पर हैं कि वह 45 दिन के इस जनकल्याणकारी लक्ष्य को कितनी तेजी से पूरा करता है।
























