बिल्डिंग सीलिंग और जुर्माने की संभावना तेज़

Delhi News: जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि साल की शुरुआत में सरकार ने लोगों, हाउसिंग यूनिट्स, संस्थानों और उद्योगों को राहत देने के लिए डीजेबी के इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज को कम और आसान कर दिया था। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद नागरिकों और व्यवसायों को बोझ से राहत देना था।

जल विभाग ने करोड़ों का राजस्व नुकसान का खुलासा

HIGHLIGHTS

  • पांच साल का डेटा मिलान कर कार्रवाई की तैयारी
  • 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर नए नियम लागू
  • बिल्डरों और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
  • दिल्ली सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में बड़ा बदलाव
  • अब बिना भुगतान के प्रॉपर्टी नहीं होगी मंजूर

Delhi News: दिल्ली सरकार ने उन सभी इमारतों को सील करने का निर्णय लिया है, जिनके लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड चार्ज (IFC) का भुगतान नहीं किया गया है। इस कदम के तहत, जल विभाग ने दिल्ली नगर निगम (MCD) से राजधानी के पिछले पांच वर्षों के बिल्डिंग प्लान रिकॉर्ड की मांग की है। यदि इन बिल्डिंग्स ने निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किया, तो उनके प्रॉपर्टी को सील किया जा सकता है। इस संबंध में दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

जल मंत्री का बयान और कार्रवाई की तैयारी

जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि साल की शुरुआत में सरकार ने लोगों, हाउसिंग यूनिट्स, संस्थानों और उद्योगों को राहत देने के लिए डीजेबी के इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज को कम और आसान कर दिया था। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद नागरिकों और व्यवसायों को बोझ से राहत देना था। हालांकि, अब उन्हें पाया गया है कि कई बड़ी हाउसिंग सोसाइटियों और बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स ने इन नियमों का उल्लंघन किया है।

प्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रारंभिक आंतरिक जांच में पता चला है कि कई हाउसिंग सोसाइटियों ने बिना इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज का भुगतान किए बिल्डिंगें खड़ी कर दी हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि बिल्डरों और डीजीबी अधिकारियों के बीच मिलीभगत हो सकती है। इन मामलों में न सिर्फ जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि संबंधित प्रॉपर्टीज को भी सील किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सरकार ने एमसीडी से पिछले पांच वर्षों में अनुमोदित सभी बिल्डिंग प्लान का डेटा मांगा है। इस डेटा का मिलान अपने रिकॉर्ड से किया जाएगा, जिसमें जल बोर्ड को भुगतान किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज की जानकारी भी शामिल है। जहां भी कोई अनियमितता पाए जाएगी, वहां मूल राशि के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा।

बड़ी संपत्तियों की जांच और वित्तीय नुकसान

आंतरिक अनुमान के अनुसार, राजधानी में लगभग 300 ऐसी संपत्तियां हैं जिनका क्षेत्रफल 3000 वर्ग मीटर या उससे अधिक है, और जिनके लिए अभी तक कोई IFC चार्ज जमा नहीं किया गया है। इन प्रॉपर्टियों की वजह से दिल्ली जल बोर्ड को करीब 2000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ है। प्रवेश वर्मा ने यह भी कहा कि सरकार ने इस सिस्टम में बदलाव कर इसे अधिक पारदर्शी, सरल और निष्पक्ष बना दिया है।

उन्होंने आगे बताया कि, अब 200 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। साथ ही, अधिकारियों द्वारा अनावश्यक नाप-जोख या परेशान करने की प्रक्रिया को भी समाप्त कर दिया गया है। पुराने सिस्टम में जहां लोगों को 15-16 लाख रुपये तक का भुगतान करना पड़ता था, अब वह रकम घटाकर लगभग 2-3 लाख रुपये कर दी गई है। इस बदलाव का मकसद नागरिकों को राहत देना और प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

आईएफसी चार्ज का महत्व

दिल्ली में 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर नए या अतिरिक्त निर्माण के लिए दिल्ली जल बोर्ड आईएफसी चार्ज वसूल करता है। यह चार्ज पानी और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से पहले वसूला जाता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में इस नीति में बदलाव की मंजूरी दी थी, जिससे प्रक्रिया आसान और पारदर्शी हो गई है। खास बात यह है कि इन परिवर्तनों का सबसे अधिक फायदा फैक्टरियों और इंडस्ट्रियल यूनिट्स को हुआ है, क्योंकि इससे निर्माण की शुरुआती लागत में काफी कमी आई है।

नागरिकों और व्यवसायों के लिए भी नियमों का पालन कर उनका अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, और सभी को अपने पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इस कदम से दिल्ली में जल संसाधनों का सुव्यवस्थित और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित होगा, और नियमानुसार निर्माण कार्यों को प्रोत्साहन मिलेगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now