दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर मैदान में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों को लेकर एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसा का शिकार हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं और देश भर से आए युवा छात्रों के इस जुटान पर प्रशासन ने बल प्रयोग का रास्ता अख्तियार किया। पुलिस द्वारा किए गए इस लाठीचार्च के बाद राजनीतिक गलियारों में भारी उबाल देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर सवाल खड़े करते हुए सरकार से बेकसूर छात्रों से तुरंत सार्वजनिक माफी की मांग रखी है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दी जा रही हिंसक रूप की तकदीर
सूत्रों के अनुसार, सोमवार को जंतर-मंतर पर जमा हुए छात्रों का उद्देश्य केवल अपनी आवाज को संसद तक पहुंचाना था। एजुकेशन पेपर लीक की साजिश के खिलाफ यह धरना पूरी तरह से लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा था, लेकिन तभी अचानक पुलिस बल ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के लाठियां चलानी शुरू कर दीं। इस दौरान कई छात्रों के चोट लगने की खबरें सामने आई हैं। राहुल गांधी ने इस पूरे एक्शन को न सिर्फ निंदनीय बल्कि पूरी तरह से अमानवीय और शर्मनाक करार दिया है। उनका कहना है कि जिस तरह से युवाओं के साथ बर्बरता की गई है, वह लोकतंत्र के लिए कलंक है।

‘मोदी देश के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री’
राहुल गांधी ने अपने बयान में केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नरेंद्र मोदी देश के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री साबित हो रहे हैं। उनका आरोप है कि जब देश का नौजवान अपने अधिकारों और रोजगार के लिए सड़कों पर उतरता है, तो सरकार उसे सुनने के बजाय लाठियों से कुचलने का काम करती है। CJP के इस आंदोलन को कुचलने के लिए राज्य शक्ति के दुरुपयोग को उन्होंने सरकार की कमजोरी और तानाशाही मानसिकता का परिचायक बताया।
पेपर लीक: सरकार की बढ़ती प्रशासनिक नाकामी
इस बवाल की जड़ में जो मुख्य मुद्दा है, वह है देशव्यापी पेपर लीक का सिलसिला। पिछले कुछ समय में NEET, UGC NET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लाखों छात्रों का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया गया है। राहुल गांधी ने इसे सीधे तौर पर केंद्र सरकार की सिस्टम फेल्योर करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस गंभीर संकट के लिए जिम्मेदारी लेने के बजाय झूठे बहाने बना रही है और अपने गलतियों को छिपाने का प्रयास कर रही है। जब सरकार खुद सवालों के घेरे में हो, तब वह आंदोलनों को बल से दबाने पर मजबूर हो जाती है।
प्रधानमंत्री की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर उठाए गए सवाल
राहुल गांधी ने अपने हमले का सबसे तीखा तीर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर निशाना लगाकर मारा। उन्होंने पूछा कि जब देश के भविष्य के निर्माता (युवा) राजधानी में पुलिस की लाठियां खा रहे हैं, तो देश का प्रधानमंत्री आखिर खामोश क्यों है? उन्होंने कहा कि यह चुप्पी किसी अचरज की बात नहीं है, बल्कि इससे साफ झलकता है कि मौजूदा सत्ता को युवाओं के दर्द और उनकी जायज मांगों से कोई लेना-देना नहीं है। आम जनमानस अब इस असंवेदनशील रवैये को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
मानसून सत्र में गूंजेगा जंतर-मंतर का लाठीचार्च
अब इस मुद्दे को सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सूत्रों की मानें तो संसद के आगामी मानसून सत्र में विपक्ष इस लाठीचार्च को एक बड़ा हथियार बनाएगा। कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने अपनी कमर कस ली है। दोनों सदनों में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा होने की पूरी संभावना है। विपक्ष की मांग साफ होगी कि सरकार को इस निंदनीय कार्रवाई का जवाब देना होगा और युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए एक पारदर्शी और कानूनी ढांचा तैयार करना होगा।
यह पूरा मामला एक बार फिर से इंगित करता है कि शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार का निर्णय लेने का तरीका कितना खामियाजदेह हो चुका है। अब देखना यह होगा कि सत्ता पक्ष इस बढ़ते जनाक्रोश और विपक्ष के हमलों का सामना संसद में किस तरह से करता है।























