ऋषी तिवारी
नोएडा। आत्मिक शांति, सकारात्मक सोच और श्रेष्ठ संस्कारों के विकास के उद्देश्य से ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित “शांतिपूर्ण और सुखी जीवन के लिए ध्यान” विषयक कार्यक्रम रविवार को लक्ष्मी नारायण मंदिर, सेक्टर-56, नोएडा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, युवा, गृहिणियां, वरिष्ठ नागरिक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम की शुरुआत उपस्थित जनसमूह द्वारा राजयोग ध्यान के अभ्यास से हुई। इस दौरान लोगों ने गहरी शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। माउंट आबू से पधारे वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षक बीके ओंकार ने ध्यान की गहराई को सरल शब्दों में स्पष्ट किया।
संबोधन में बीके ओंकार ने बताया
बता दें कि अपने संबोधन में बीके ओंकार ने कहा कि आज हर व्यक्ति के पास सुख के अनेक साधन हैं, फिर भी मन अशांत है। इसका मुख्य कारण आत्मिक शक्ति का क्षीण होना है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य ‘बॉडी कॉन्शस’ (देह-अभिमान) से ऊपर उठकर स्वयं को ‘सोल कॉन्शस’ (आत्मा) समझता है, तभी उसके जीवन में सच्ची शांति और स्थायी सुख का अनुभव होता है। आत्मा ही परमात्मा से संबंध बना सकती है। जब आत्मा के तार उस परमात्मा से जुड़ते हैं, तो उसके गुण और शक्तियाँ जीवन में स्वतः आने लगती हैं। यही ईश्वरीय स्मृति मनुष्य को अंदर से मज़बूत बनाती है।
‘विचार शुद्ध होते हैं’
उन्होंने बताया कि ध्यान मनुष्य को अच्छाई को धारण करने और बुराई को छोड़ने की शक्ति देता है। जब विचार शुद्ध होते हैं, तो कर्म और संस्कार अपने आप श्रेष्ठ बन जाते हैं। जीवन में मीठे बोल बोलने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि एक बच्चा दो वर्ष में ‘क्या बोलना है’ सीख जाता है, लेकिन ‘क्या नहीं बोलना है’ यह सीखने में पूरा जीवन निकल जाता है। उन्होंने शारीरिक व्रत के साथ-साथ तामसिक बातों से व्रत लेने की बात कही।
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राजयोग के अभ्यास से व्यक्ति सही निर्णय लेने में सक्षम
बीके ओंकार ने कहा कि चुनौतियाँ जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन राजयोग के अभ्यास से व्यक्ति सही निर्णय लेने में सक्षम होता है। सही समय पर लिया गया निर्णय चुनौती को अवसर में बदल देता है। इसके बाद उन्होंने उपस्थित लोगों के लिए एक निर्देशित ध्यान का सजीव अभ्यास कराया। शांत वातावरण में, स्वयं को आत्मा के रूप में अनुभव करने और परमात्मा की शक्तियों को आत्मसात करने के अभ्यास के बाद, उपस्थित सभी व्यक्तियों ने मानसिक विश्रांति, स्थिरता और एक नई ऊर्जा का अनुभव किया। कार्यक्रम के अंत में गायन एवं नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का समापन सात्विक और शुद्ध भोजन के साथ हुआ। यह आयोजन ब्रह्माकुमारीज़ सेंटर, सेक्टर-56, नोएडा द्वारा किया गया था।

























