बिहार में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले कई दिनों से चल रहे एक गहमागहमी भरे माहौल के बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड (Student Credit Card) योजना को लेकर स्पष्ट और निर्णायक बयान दिया है। सीएम ने साफ तौर पर कहा है कि इस योजना को बंद नहीं किया जा रहा है और ना ही इसमें किसी तरह की कटौती हो रही है।
अफवाहों ने बढ़ाई थी चिंता
दरअसल, हाल ही में बिहार के राजनीतिक गलियारों में एक अफवाह तेजी से फैल रही थी। विपक्ष के कुछ नेताओं, विशेषकर राजद के प्रवक्ताओं द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि राज्य सरकार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत छात्रों को दी जाने वाली ऋण राशि में भारी कटौती करने जा रही है। साथ ही, यह भी कहा जा रहा था कि सरकार छात्रवृत्तियां भी बंद करने के मूड में है। ऐसी खबरों के बाद उन छात्रों के परिवारों में काफी घबराहट फैल गई थी, जिनकी पढ़ाई का पूरा खर्च इसी कार्ड पर निर्भर करता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का स्पष्टीकरण
इन सभी अटकलों और भ्रामक खबरों पर विराम लगाते हुए, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) के जरिए आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के संबंध में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के मन में किसी भी प्रकार का संशय नहीं रहना चाहिए। उच्च शिक्षा हेतु ₹4 लाख तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड मिल रहा है और यह सुविधा आगे भी पूर्ववत ही जारी रहेगी।”
मुख्यमंत्री सम्राट ने आगे युवाओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि बिहार सरकार युवाओं की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा के रास्ते में आर्थिक संसाधनों की कमी को कभी भी बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने भी दी थी जानकारी
मुख्यमंत्री सम्राट के इस बयान से पहले, बिहार शिक्षा विभाग ने भी इन भ्रामक खबरों को नकारते हुए एक विस्तृत विज्ञप्ति जारी की थी। विभाग ने स्पष्ट किया था कि सरकार योजना को समाप्त नहीं कर रही है, बल्कि इसे और अधिक व्यापक बनाया जा रहा है।
असल में क्या बदलाव हुआ है?
जिस खबर को लेकर भ्रम फैलाया गया था, वह विभाग के एक नए प्रशासनिक फैसले से जुड़ी थी। शुक्रवार को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रोशन ने बताया था कि अब राज्य सरकार के स्तर पर बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से सीधे 2 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण दिया जाएगा। विपक्ष ने इसी ‘2 लाख’ शब्द को लेकर बयानबाजी शुरू कर दी थी और भ्रामक तरीके से यह प्रचारित किया गया कि ऋण की सीमा 4 लाख से घटाकर 2 लाख कर दी गई है।
लाभ घटा नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ा
शिक्षा विभाग की मानें तो सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। पहले छात्रों को राज्य सरकार से 4 लाख रुपये तक का ऋण मिलता था। अब सरकार ने इस व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के लिए इसे केंद्र सरकार की योजनाओं और बैंकों के साथ जोड़ दिया है।
अब जो नया सिस्टम बनाया गया है, उसके तहत राज्य सरकार का हिस्सा बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से 2 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण। केंद्र सरकार का हिस्सा प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी पोर्टल के जरिए अब छात्रों को 10 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना (PM-USP) और विभिन्न बैंकों के माध्यम से भी छात्र आसानी से ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य ‘संस्थागत वित्तीय सहायता’ (Institutional Financial Assistance) को बढ़ाना है। अगर किसी छात्र की पढ़ाई में 4 लाख से ज्यादा का खर्च आता है (जैसे मेडिकल या इंजीनियरिंग कॉलेजों में), तो वह पहले सिर्फ 4 लाख तक ही सरकारी मदद पा सकता था। लेकिन अब पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के जुड़ने से उसकी सीमा 10 लाख तक पहुंच गई है। यानी विपक्ष द्वारा बताई जा रही कमी असल में एक बड़ी उपलब्धता बन गई है।


























