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बादलों के ऊपर बसा गांव, जहां लोग छूते हैं सूरज को

चिम्बोराजो की ऊंची पहाड़ियों पर बसे गांव किसी कल्पना की दुनिया जैसे लगते हैं। यहां रहने वाले लोगों के लिए बादल ऊपर नहीं, बल्कि कई बार पैरों के नीचे दिखाई देते हैं। सुबह जब सूरज की पहली किरण पहाड़ों पर पड़ती है, तो नीचे फैले बादलों का नजारा बेहद अद्भुत होता है।

बादलों के ऊपर बसे हैं ये गांव, जहां लोग रहते हैं धरती के सबसे ऊंचे इलाकों में (फाइल फोटो)

HIGHLIGHTS

  • धरती की सबसे ऊंची जगह, जहां इंसान रहते हैं बादलों संग
  • सूरज के सबसे करीब बसे गांव की अनोखी कहानी
  • धरती का वो गांव जहां सुबह बादलों के बीच होती है
  • माउंट एवरेस्ट नहीं, ये जगह है सूरज के सबसे करीब
  • जहां लोग बादलों के ऊपर बनाते हैं अपना आशियाना

जब भी दुनिया की सबसे ऊंची जगह की बात होती है, तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में माउंट एवरेस्ट का नाम आता है। लेकिन धरती के उस हिस्से की बात करें जो अंतरिक्ष और सूरज के सबसे करीब माना जाता है, तो तस्वीर बदल जाती है। यह स्थान नेपाल का एवरेस्ट नहीं, बल्कि दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर में मौजूद माउंट चिम्बोराजो है।

वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं है। भूमध्य रेखा के आसपास इसका आकार थोड़ा फैला हुआ है। माउंट चिम्बोराजो इसी उभरे हुए हिस्से पर स्थित है। यही वजह है कि समुद्र तल से ऊंचाई के मामले में भले ही एवरेस्ट आगे हो, लेकिन पृथ्वी के केंद्र से दूरी मापी जाए तो चिम्बोराजो की चोटी सबसे आगे निकल जाती है। इसी कारण इसे धरती का अंतरिक्ष के सबसे करीब स्थित बिंदु कहा जाता है।

जहां आसमान नीचे नजर आता है

चिम्बोराजो की ऊंची पहाड़ियों पर बसे गांव किसी कल्पना की दुनिया जैसे लगते हैं। यहां रहने वाले लोगों के लिए बादल ऊपर नहीं, बल्कि कई बार पैरों के नीचे दिखाई देते हैं। सुबह जब सूरज की पहली किरण पहाड़ों पर पड़ती है, तो नीचे फैले बादलों का नजारा बेहद अद्भुत होता है।

इन ऊंचाई वाले इलाकों में करीब 3,500 से 4,200 मीटर की ऊंचाई पर क्वेशुआ और पुरुहा समुदाय के लोग रहते हैं। इन समुदायों ने सदियों से इस कठिन वातावरण को अपना घर बनाया है। आज भी यहां उनकी पुरानी परंपराएं, पहनावा और जीवनशैली देखने को मिलती है।

कम ऑक्सीजन में भी जीने की कला

इतनी ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाता है। आम लोगों को यहां पहुंचने पर सांस लेने में परेशानी, सिर दर्द और थकान जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। लेकिन स्थानीय लोगों ने पीढ़ियों के दौरान इस वातावरण के अनुसार खुद को ढाल लिया है।

यहां के लोग कम ऑक्सीजन वाली परिस्थितियों में भी खेती, पशुपालन और रोजमर्रा के काम आसानी से करते हैं। वैज्ञानिकों ने भी कई बार इन समुदायों के शरीर में हुए बदलावों का अध्ययन किया है, ताकि यह समझा जा सके कि इंसान कठिन परिस्थितियों में किस तरह खुद को अनुकूल बना सकता है।

ठंड से बचने के लिए खास घर

चिम्बोराजो क्षेत्र का मौसम काफी कठोर है। यहां तेज हवाएं चलती हैं और कई बार तापमान शून्य से नीचे पहुंच जाता है। ऐसे मौसम में रहने के लिए स्थानीय लोग पारंपरिक तरीके से बने मजबूत घरों का इस्तेमाल करते हैं।

इन घरों की दीवारें मोटी मिट्टी से बनाई जाती हैं, जो अंदर की गर्मी को बनाए रखने में मदद करती हैं। छतों पर सूखी घास लगाई जाती है, जिससे ठंडी हवाओं का असर कम हो सके। दिन में धूप से गर्म हुए ये घर रात के समय परिवारों को ठंड से बचाते हैं।

पशु हैं जीवन का सबसे बड़ा सहारा

ऊंचाई और कठिन मौसम के कारण यहां खेती करना आसान नहीं है। इसलिए स्थानीय लोगों की जिंदगी में पशुपालन की अहम भूमिका है। लामा, अल्पाका और विकुना जैसे जानवर यहां के लोगों के लिए सिर्फ पशु नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा हैं।

इन जानवरों की ऊन से गर्म कपड़े, कंबल और पारंपरिक पोशाकें तैयार की जाती हैं। पहाड़ी रास्तों पर सामान पहुंचाने के लिए भी लामा का इस्तेमाल किया जाता है। जहां आधुनिक वाहन नहीं पहुंच पाते, वहां ये जानवर आज भी लोगों के भरोसेमंद साथी बने हुए हैं।

चिम्बोराजो क्षेत्र की पहचान यहां के लोगों के रंगीन पहनावे से भी होती है। पुरुष पारंपरिक पोंचो पहनते हैं, जबकि महिलाएं चमकीले रंगों वाली ऊनी स्कर्ट, शॉल और टोपी पहनती हैं। लाल, पीले, हरे और नीले रंगों के कपड़े बर्फीले पहाड़ों के बीच अलग ही आकर्षण पैदा करते हैं। यह पहनावा सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि ठंड से बचने का एक पारंपरिक तरीका भी है।

पहाड़ को मानते हैं जीवन का रक्षक

स्थानीय लोगों के लिए माउंट चिम्बोराजो केवल एक पहाड़ नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक है। वे इसे सम्मान से “पिता चिम्बोराजो” कहते हैं। उनका विश्वास है कि यह विशाल पर्वत उनकी रक्षा करता है और उनके जीवन का आधार है। किसी नए काम की शुरुआत, खेती या त्योहारों के समय लोग पहाड़ को याद करते हैं और उसका आशीर्वाद लेते हैं। यह विश्वास उनकी संस्कृति और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दिखाता है।

इस क्षेत्र की पुरानी परंपराओं में ‘हिएलेरोस’ का विशेष स्थान रहा है। पहले स्थानीय लोग चिम्बोराजो की ऊंचाइयों तक जाकर ग्लेशियर से बर्फ काटते थे और उसे नीचे शहरों तक पहुंचाते थे। इस बर्फ का इस्तेमाल बाजारों में किया जाता था। हालांकि आधुनिक रेफ्रिजरेशन तकनीक आने के बाद यह परंपरा लगभग समाप्त हो गई है। फिर भी बुजुर्गों के लिए यह उनके इतिहास और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पिघलते ग्लेशियर बढ़ा रहे चिंता

जलवायु परिवर्तन का असर चिम्बोराजो पर भी दिखाई दे रहा है। यहां के ग्लेशियर लगातार सिकुड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर पानी की उपलब्धता और स्थानीय जीवन पर पड़ सकता है। बदलते हालातों के कारण कई युवा बेहतर शिक्षा और रोजगार की तलाश में शहरों की ओर जा रहे हैं। इससे पारंपरिक ग्रामीण जीवन में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।

अब चिम्बोराजो क्षेत्र में पर्यटन लोगों की आय का एक नया साधन बन रहा है। दुनिया भर से आने वाले पर्वतारोही और पर्यटक स्थानीय गाइड की मदद लेते हैं। कई महिलाएं हाथ से बने ऊनी कपड़े और पारंपरिक सामान बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। कम्युनिटी टूरिज्म ने यहां के लोगों को अपनी संस्कृति बचाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से मजबूत होने का अवसर दिया है।

Sandhya Samay News

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