अमेरिका से जंग के बीच ईरान में तख्तापलट की साजिश

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। उनके अंतिम संस्कार के दौरान जो नजारे देखने को मिले, वे ईरानी सत्ता के लिए चेतावनी भरे थे।

ईरान में सॉफ्ट तख्तापलट: राष्ट्रपति पर लगा गद्दारी का आरोप

HIGHLIGHTS

  • राष्ट्रपति को खुली धमकी, ईरान में तख्तापलट की खतरनाक साजिश
  • कट्टरपंथियों ने मचाया बवाल, ईरान सरकार बताई देश की दुश्मन
  • खामेनेई के अंतिम संस्कार पर हुआ ईरान का राज भंग
  • अमेरिका से डरकर समझौता? ईरान में भड़का कट्टरपंथियों का गुस्सा
  • नए सुप्रीम लीडर को किनारे, ईरान में चल रही तख्तापलट

वैश्विक राजनीति के गलियारों में इन दिनों ईरान चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ जहां अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे खुले सैन्य टकराव ने मध्य पूर्व को एक नए युद्ध के कगार पर खड़ा कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान के अंदरूनी घराने में ऐसी दरारें आ चुकी हैं जिन्हें भर पाना नामुमकिन लग रहा है। हाल ही में सामने आई कुछ गंभीर रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान में सत्ता को लेकर एक गुप्त और खतरनाक खींचतान चल रही है, जिसे कट्टरपंथी गुट ‘सॉफ्ट तख्तापलट’ का नाम दे रहे हैं।

खामेनेई के अंतिम संस्कार ने खोली नई बहस

यह पूरा विवाद 28 फरवरी के उस दिन से तेज हुआ जब अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। उनके अंतिम संस्कार के दौरान जो नजारे देखने को मिले, वे ईरानी सत्ता के लिए चेतावनी भरे थे। जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन खामेनेई के ताबूत के साथ कदमताल कर रहे थे, तभी भीड़ में मौजूद कट्टरपंथी तत्वों ने उनके खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया।

इन लोगों ने खुलेआम “समझौतापसंदों की मौत हो” जैसे नारे लगाए। हद तो तब हो गई जब विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर भीड़ ने पत्थरबाजी की और उन्हें ‘देशद्रोही’ तक कह दिया। ईरानी राजनीतिक और धार्मिक मंचों से जुड़े मोहम्मद अली बख्शी जैसे हस्तियों ने तो राष्ट्रपति पेजेशकियन को खुली धमकी देते हुए कह दिया कि अगर नए सुप्रीम लीडर की शर्तें मानी नहीं गईं, तो उनकी जिंदगी को जहन्नुम बना दिया जाएगा।

‘सॉफ्ट तख्तापलट’ के आरोपों का सार क्या है?

ईरान के रूढ़िवादी और कट्टरपंथी खेमे का मानना है कि खामेनेई की शहादत का बदला लेने के बजाय पेजेशकियन सरकार ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं। उनके निशाने पर मुख्य रूप से तीन बातें हैं:

  1. सत्ता का गैर-कानूनी केंद्रीकरण: कट्टरपंथियों का कहना है कि नए सुप्रीम लीडर (जिनके नाम पर सरकार चल रही है) को किनारे करके राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और संसद के स्पीकर ने मिलकर देश की बागडोर अपने हाथ में ले ली है।
  2. संसद को निष्क्रिय करना: यह गुट सरकार पर आरोप लगा रहा है कि उसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को थामने के लिए संसद (मजलिस) को निलंबित करने की कोशिश की है।
  3. जनसमर्थन कुचलना: अमेरिका के खिलाफ रातों-रात होने वाले जनसमर्थन रैलियों पर रोक लगाकर सरकार जनादेश को दबाने की कोशिश में लगी है।

ईरान के सांसद महमूद नबावियन ने तो एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखकर देश की जनता को सीधे आगाह किया है। उन्होंने पूछा कि “क्या देश में तख्तापलट होने वाला है?”

अदृश्य नेता और सत्ता का वैक्यूम

इस पूरे घमासान के पीछे एक और बड़ी वजह है—’अदृश्य नेतृत्व’। खामेनेई के बाद उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई को ही नया सुप्रीम लीडर माना जा रहा है, लेकिन अब तक वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने ना ही देश को संबोधित किया है और ना ही कोई बड़ा फैसला खुद लिया है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार और लेखक अराश अजीजी के अनुसार, मुज्तबा के अदृश्य रहने का फायदा उठाकर संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति पेजेशकियन और विदेश मंत्री अराघची ईरान के वास्तविक चेहरे बन गए हैं। जबकि कट्टरपंथी गुटों की मुज्तबा तक कोई सीधी पहुंच नहीं बची है, जिसके चलते उनका गुस्सा इन तीनों दिग्गज नेताओं पर निकल रहा है। वे मानते हैं कि ये नेता मुज्तबा के नाम का इस्तेमाल करके अपनी तानाशाही थोप रहे हैं।

बाहरी युद्ध और अंदरूनी रणनीति का खेल

यह अंदरूनी कलह किसी वैक्यूम में नहीं हो रही है। जब किसी देश पर विदेशी शक्तियां (जैसे अमेरिका और इजराइल) हमला करती हैं, तो अक्सर उस देश की राजनीति में दो ध्रुव बन जाते हैं—एक वो जो युद्धविराम और कूटनीति चाहते हैं, और दूसरे वो जो पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई की वकालत करते हैं।

ईरान में भी यही हो रहा है। पेजेशकियन और अराघची जैसे नेता जानते हैं कि अमेरिका से लंबी जंग में ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी, इसलिए वे वार्ता के रास्ते खोज रहे हैं। लेकिन सेना और कट्टरपंथी गुटों के लिए अमेरिका से समझौता ‘इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ गद्दारी’ के समान है।

Sandhya Samay News

संध्या समय न्यूज़ – आपके विश्वास की आवाज़ संध्या समय न्यूज़ की स्थापना वर्ष 2018 में की गई, जो कि MSME में विधिवत रूप से पंजीकृत है। हमारा उद्देश्य समाज तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद समाचार पहुँचाना है। हम देश-प्रदेश की ताज़ा खबरों, सामाजिक मुद्दों, और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को आपके सामने सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करते हैं। हम अपने सभी दर्शकों और पाठकों का दिल से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें लगातार देखा, समझा और अपना विश्वास बनाए रखा। आपकी यही सराहना और समर्थन हमें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। संध्या समय न्यूज़ हमेशा सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा के मूल्यों पर कार्य करता रहेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now