Home Loan : हर साल केंद्र सरकार बजट सत्र के दौरान आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से लोन और ब्याज दरों से जुड़े कई प्रावधान करती है, लेकिन इसके बावजूद होम लोन लेने वाले उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि निजी होम लोन कंपनियां किसी न किसी बहाने से ब्याज दरों और ईएमआई में बढ़ोतरी कर रही हैं। एक सर्वे में पाया गया है कि इसमें टॉप पर शिकायतों के कटघरें में हीरो हाउसिंग फाइनेंस बताया जा रहा है।
8–9% बताकर बाद में 12–13% तक बढ़ा दी जाती है ब्याज दर
बता दें कि उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे होम लोन लेते हैं, उस समय उन्हें 8 से 9 प्रतिशत की ब्याज दर बताई जाती है, लेकिन कुछ ही समय बाद कंपनियां अलग-अलग कारणों का हवाला देकर इसे 12 से 13 प्रतिशत तक बढ़ा देती हैं। कभी प्रिंसिपल अमाउंट में बदलाव का तर्क दिया जाता है, तो कभी इंटरेस्ट रिवीजन या पॉलिसी चेंज के नाम पर ईएमआई बढ़ा दी जाती है। आरोप है कि यह पूरा फैसला कंपनी स्तर पर लिया जाता है, जबकि उस दौरान न तो आरबीआई और न ही सरकार की ओर से कोई आधिकारिक निर्देश जारी किया जाता है।
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हीरो हाउसिंग फाइनेंस पर सबसे ज्यादा शिकायतें
इस पूरे मामले में हीरो हाउसिंग फाइनेंस (Hero Housing Finance) को लेकर सबसे अधिक शिकायतें सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कंपनी शुरुआत में कम ब्याज दर दिखाकर ग्राहकों को आकर्षित करती है, लेकिन बाद में प्रिंसिपल, इंटरेस्ट या पॉलिसी बदलाव का हवाला देकर ब्याज दर बढ़ा दी जाती है। ग्राहकों का यह भी कहना है कि जब वे ऑनलाइन माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हैं, तो उन्हें न तो संतोषजनक जवाब मिलता है और न ही कोई ठोस कार्रवाई होती है।
ऑनलाइन शिकायत पोर्टल्स पर दो कंपनियों के नाम प्रमुख
ऑनलाइन शिकायत पोर्टल्स पर दर्ज मामलों में मुख्य रूप से दो कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं हीरो हाउसिंग फाइनेंस (Hero Housing Finance), हीरो फाइनकॉर्प (Hero Fincorp) शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन कंपनियों द्वारा लोन की शर्तों को लेकर पूरी पारदर्शिता नहीं बरती जाती और ग्राहकों को ब्याज दरों में संभावित बदलाव की स्पष्ट जानकारी पहले से नहीं दी जाती।
उपभोक्ताओं की सरकार और आरबीआई से मांग
पीड़ित उपभोक्ताओं ने सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और अन्य नियामक संस्थाओं से मांग की है कि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की जाए। साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि बिना सरकारी या आरबीआई निर्देश के ब्याज दर बढ़ाने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई हो और ऑनलाइन शिकायतों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
सरकार की कार्रवाई से हो सकते हैं बड़े खुलासे
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार या नियामक संस्थाएं इस मामले में सख्ती दिखाती हैं, तो हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। आरोप है कि कुछ कंपनियां योजनाबद्ध तरीके से आम जनता से अधिक ब्याज वसूल कर आर्थिक शोषण कर रही हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार और नियामक संस्थाएं इन शिकायतों पर क्या कदम उठाती हैं। Home Loan

























