मानसून का मौसम हालांकि जीवनदायिनी होता है, लेकिन कभी-कभी इसके कहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में 9 जुलाई 2026 को हुई भारी बारिश और इसके बाद उपजे जलभराव ने कई परिवारों को अकेला छोड़ दिया था। इस आपदा के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने का काम किया है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ के निर्देशन में उन परिवारों के खातों में आर्थिक सहायता की राशि ट्रांसफर कर दी गई है, जिनके लोग इस भयानक अतिवृष्टि का शिकार हुए। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
तीनों परिवारों को मिला चार-चार लाख रुपये का मुआवजा
प्रशासन द्वारा चलाई गई राहत और बचाव कार्रवाई के तहत, मृतकों के आश्रितों को प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार अनुग्रह राशि दी गई है। इस राशि को सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजा गया है, ताकि किसी भी तरह की देरी या बिचौलियों को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।
यहाँ उन तीन दुखद घटनाओं का विस्तृत विवरण है, जिसके बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया:
1. तीन वर्षीया मासूम खुशबू की डूबने से मौत
9 जुलाई को शहर के एक इलाके में हुई तेज बारिश के बाद गलियों में भयंकर जलभराव हो गया था। इसी जलभराव में तीन वर्षीया बच्ची खुशबू डूब गई थी, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना के बाद बच्ची के परिजनों को आर्थिक मदद के तौर पर 4 लाख रुपये की राशि उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की गई है।
2. पांच वर्षीय मोहम्मद साद की जलभराव में डूबने से मृत्यु
इसी दिन एक अन्य हृदयविदारक घटना सामने आई, जहां 5 वर्षीय मासूम मोहम्मद साद अचानक बहते पानी में बह गया और डूबने से उसकी जान चली गई। मृतक बालक के आश्रित एवं परिजन शादाब के खाते में प्रशासन की ओर से यह चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि सफलतापूर्वक भेज दी गई है।
3. दीवार गिरने से 50 वर्षीय राम अजीत राय की दर्दनाक मौत
अतिवृष्टि का तीसरा शिकार 50 वर्षीय राम अजीत राय हुए। लगातार हो रही बारिश के कारण एक मकान की दीवार कमजोर हो गई और अचानक उसके गिरने से राम अजीत राय उसके नीचे दब गए। इस हादसे में उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। प्रशासन ने मृतक की पत्नी और आश्रित सुंदरी के खाते में 4 लाख रुपये की राहत राशि भेजकर उन्हें इस आकस्मिक संकट से उबरने में मदद की है।
डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने दी जानकारी
इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने बताया कि 9 जुलाई 2026 को दर्ज हुई इन तीनों दुखद घटनाओं में मृतकों के परिजनों को तत्काल राहत पहुँचाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी परिवार इस त्रासदी के बाद आर्थिक तंगी का सामना न करे, इसके लिए पेंशन और राहत योजनाओं की फाइलें तत्काल प्रोसेस की गईं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शहरीकरण की गति और नालों की अवैध अतिक्रमण के कारण जलभराव एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। हालांकि, प्रशासन लगातार नाला सफाई और जल निकासी के लिए नए प्लान पर काम कर रहा है।
प्रशासन ने की जनता से विशेष अपील
आपदा प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन ने शहरवासियों से एक सलाहनामा भी जारी किया है। डीएम ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम और खराब मौसम के दौरान बिना जरूरत के जलभराव वाले इलाकों में घूमने या जाने से पूरी तरह से बचें।
विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को इस दौरान घरों के अंदर ही रहने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, जो मकान जर्जर या कच्चे हैं, उनमें बारिश के दिनों में रहने से बचना चाहिए। प्रशासन ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चेतावनियों को गंभीरता से लेने की सलाह दी है।

























