महाराष्ट्र में नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक और छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। इस विवाद का केंद्र बन चुके इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के वरिष्ठ नेता संदीप देशपांडे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्र व राज्य सरकारों पर सीधे-सीधे हमला बोलते हुए उन्हें न केवल कठघरे में खड़ा किया बल्कि उनके इस्तीफे की भी मांग की है। इस पूरे प्रकरण ने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में बहस का विषय बना दिया है कि आखिर सरकार ने इस गंभीर मसले पर क्यों कोई कड़ा कदम नहीं उठाया।
धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला
बता दें कि संदीप देशपांडे ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इतनी बेशर्म कैसे हो सकते हैं कि जब लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हो, तब भी वे अपने पद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की नहीं, बल्कि अपने स्वार्थों को साधने की है। उनका कहना था कि जब देशभर के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, तब सरकार का खामोश रहना और मंत्री का पद पर बने रहना नैतिकता का उल्लंघन है।
प्रधानमंत्री मोदी पर भी हमला
संदीप देशपांडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर कहा कि मोदी जी को कम से कम अपने मोबाइल फोन का स्क्रीन देखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि देश का युवा किस हद तक आक्रोशित है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह युवाओं की आवाज को सुनें और उनके दर्द को समझें। यदि सरकार ने अभी भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया और छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल
दादर के शिवाजी पार्क में छात्रों पर पुलिस के बल प्रयोग और हिरासत की घटना पर संदीप देशपांडे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस परंपरागत रूप से संवेदनशील और शांतिपूर्ण रही है, लेकिन इस बार वह किसके दबाव में आकर युवाओं के साथ बर्बरता कर रही है? उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला माना और पूछा कि क्या भारत में वाकई में लोकतंत्र कायम है या यह खत्म हो चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने तुरंत इस मामले में कड़ा रुख नहीं अपनाया और न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया, तो देश के सामने बड़ी राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए, उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अपना दायित्व निभाना चाहिए ताकि छात्रों को न्याय मिल सके।
सोशल मीडिया और सरकारी तंत्र पर आरोप
संदीप देशपांडे ने सोशल मीडिया पर चल रहे इन्फ्लुएंसर्स और सरकारी तंत्र द्वारा विपक्षी आवाजों को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सोशल मीडिया के माध्यम से नरेटिव सेट कर रही है और अपनी छवि को बचाने के लिए पैसा देकर या प्रपगेंडा फैला कर असली तथ्यों को छुपाने का प्रयास कर रही है। यह सब सरकार की ओर से आंदोलन को दबाने की साजिश का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अन्य नेताओं के नाम लेकर संदीप देशपांडे ने कहा कि महाराष्ट्र के नेता जब आलोचना सुनते हैं, तो तुरंत अपने को अपमानित महसूस करते हैं। मगर आज, जब छात्र अपने हक के लिए सड़कों पर हैं, तब वे भी युवाओं का सम्मान करने की बजाय उनका उपहास उड़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह वक्त है कि राजनीतिक नेता अपने स्वार्थों को छोड़कर युवा पीढ़ी का समर्थन करें और उनके साथ खड़े हों।
























