लालकिला मैदान में आयोजित लव कुश रामलीला के तीसरे दिन सीता स्वयंवर और शिव धनुष भंग का भव्य मंचन दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। जैसे ही भगवान श्रीराम ने शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष टूटने की गूंज उठी, पूरा रामलीला परिसर ‘सियावर रामचंद्र की जय’ और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज गया। फूलों की वर्षा, ढोल-नगाड़ों की धुन और दर्शकों की तालियों के बीच माता सीता ने श्रीराम को वरमाला पहनाई।
कमेटी अध्यक्ष अर्जुन कुमार के अनुसार, स्वयंवर प्रसंग में विभिन्न देशों से आए शक्तिशाली राजाओं ने भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया। हालांकि, कोई भी राजा इसमें सफल नहीं हुआ। लगातार असफलताओं से निराश राजा जनक ने व्यथित होकर पूछा कि क्या पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है? उनके इस कथन के बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम आगे आए।
श्रीराम ने सहज भाव से धनुष उठाया और जैसे ही उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई, धनुष टूट गया। उसकी गूंज के साथ ही दर्शकों ने जयकारे लगाए और पूरा मैदान भक्तिमय हो उठा। इसके बाद माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपना वर चुना। मंच पर सजे ताजे फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और प्रभावशाली ध्वनि व्यवस्था ने दृश्य को और भव्य बनाया। स्वयंवर देखने के लिए रामभक्तों की बड़ी संख्या मैदान में पहुंची।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधे दर्शक
शिव धनुष टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम जनक दरबार पहुंचे। धनुष भंग से क्रोधित परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए तीखे संवादों ने मंचन में नया रोमांच जोड़ा। लक्ष्मण के निर्भीक और व्यंग्यपूर्ण उत्तरों के बीच परशुराम का क्रोध बढ़ता गया। इस तनावपूर्ण प्रसंग में भगवान श्रीराम ने विनम्रता और संयम से स्थिति संभालने की कोशिश की।
कलाकारों के संवाद और भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को रामायण के इस प्रसंग की मर्यादा और गहराई से रूबरू कराया। मंचन के दौरान दर्शक पूरे समय कथा से जुड़े रहे और प्रमुख दृश्यों पर तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
रामलीला में पहुंचे केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले
कमेटी महासचिव सुभाष गोयल ने बताया कि रामलीला के तीसरे दिन केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले सहित कई गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम में पहुंचकर मंचन देखा। उन्होंने कहा कि लव कुश रामलीला कमेटी आधुनिक तकनीक और भव्य मंच प्रस्तुतियों के जरिए नई पीढ़ी तक भगवान श्रीराम के आदर्श, भारतीय संस्कृति और रामायण की शिक्षाएं पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
लालकिला मैदान की रामलीला में परंपरागत कथा को आकर्षक मंच सज्जा, प्रकाश और ध्वनि तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग और परशुराम-लक्ष्मण संवाद जैसे प्रसंगों ने आयोजन को यादगार बनाया। दर्शकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और लगातार गूंजते जयकारों ने तीसरे दिन के मंचन को विशेष बना दिया।



























