ऋषी तिवारी
बिहार में शराबबंदी की नीति को लेकर सत्ताधारी गठबंधन NDA के भीतर जारी अंदरूनी तकरार अब ‘महाभारत’ का रूप लेती नज़र आ रही है। शराबबंदी की समीक्षा की मांग करने वाले सहयोगी दलों के नेताओं पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने जवाबी हमले का बिगुल बजा दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) नीरज कुमार ने समीक्षा की मांग करने वाले नेताओं को घेरते हुए उनसे कड़े सवाल पूछे हैं, जिससे सूबे की सियासत में हलचल मच गई है।
JDU का फ्रंटल अटैक: ‘बताएं, शराब से कौन सी बीमारी ठीक होती है?’
विधान परिषद में JDU के प्रवक्ता नीरज कुमार ने ऐसे नेताओं पर निशाना साधा जो शराबबंदी कानून में छूट या समीक्षा की बात कर रहे हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “शराबबंदी की समीक्षा की मांग करने वाले पहले यह बताएं कि समीक्षा किस बिंदु पर हो? क्या शराब पीने से दिल की बीमारी ठीक होती है? क्या कैंसर ठीक होता है? या फिर कोई अन्य बीमारी ठीक होती है?”
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या शराब पीने से घर में महिलाओं के साथ होने वाली मारपीट में कमी आती है?” नीरज कुमार ने तल्ख हमला करते हुे विपक्ष और असंतुष्ट सहयोगी नेताओं से कहा कि वे अपने घर की महिलाओं और बच्चों से शराबबंदी कानून की समीक्षा का ‘शपथपत्र’ दिलवाकर आएं, ताकि उनकी मंशा स्पष्ट हो सके।
मंत्री विजय चौधरी ने भी संभाला मोर्चा
इस मुद्दे पर JDU के दूसरे गोलबरा भी सक्रिय हो गए हैं। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी सदन में स्पष्ट किया कि शराब पीना जुर्म है और सरकार ने इसे रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है। उन्होंने कहा, “अगर शराब बिक रही है तो इसे रोकना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है। आजकल किसी खास पार्टी के सदस्यों का शराब से होने वाली मौतों को जोड़ना आम बात हो गई है, जो उचित नहीं है।” इससे पहले सदन में नीरज कुमार और सुनील सिंह के बीच भी इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली थी।
किसने दी थी समीक्षा की चिंगारी?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक जीतन राम मांझी ने साफ-साफ शराबबंदी नीति की समीक्षा की मांग की। NDA के ही घटक राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायक माधव आनंद ने भी इसका समर्थन किया।

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मांझी ने तर्क दिया था कि प्रतिबंध के बावजूद पड़ोसी राज्यों से महंगी शराब घर पहुंच रही है, जिससे राज्य को भारी वित्तीय (financial) नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा था, “अमीर लोग महंगी शराब खरीद लेते हैं, लेकिन गरीब जहरीली शराब पीने को मजबूर हैं। इसका सबसे ज्यादा असर दलित समुदाय, खासकर भुइयां और मुसहर समाज पर पड़ रहा है।” इसी तरह, RLM विधायक माधव आनंद ने कहा था कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय जागरूकता अभियान अधिक प्रभावी हो सकता है और राज्य को राजस्व (Revenue) का नुकसान भी नहीं होगा।
क्या आएगा सियासी भूचाल?
अब जबकि JDU ने अपने ही गठबंधन के साथी दलों (HAM और RLM) के नेताओं पर सीधे हमले की रणनीति अपना ली है, तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिहार की NDA सरकार में दरार गहरा रही है? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘शराबबंदी’ अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताते रहने के बावजूद सहयोगी दलों का खुलकर विरोध करना और फिर JDU का उस पर पलटवार करना, संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में भारी उठापटक देखने को मिल सकती है।
























