Chhattisgarh News: तकनीक की दुनिया में क्रांति लाने और आम आदमी तक आधुनिक तकनीकी शिक्षा को पहुंचाने के उद्देश्य के साथ एच० डी० शेफर मेमोरियल फाउंडेशन एवं कोडक्राफ्ट सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ के संयुक्त तत्त्वावधान में 15 दिवसीय “लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” का आयोजन विधिवत रूप से संपन्न हो गया है। सीओसीएमआई कैम्पस, ककुदंड, बिलासपुर में 11 मई से 27 मई, 2026 तक आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण सत्र नहीं था, बल्कि यह सीखने की ऐसी अद्भुत यात्रा थी, जिसने उम्र और पृष्ठभूमि की सभी सीमाओं को पार कर दिया।
उम्र की बाधाओं को पार करती सीखने की ललक
इस कार्यक्रम की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी विविधता थी। यहाँ 13 वर्ष के किशोर से लेकर 68 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक तक ने एक ही छत के नीचे बैठकर तकनीक सीखी। विद्यालयी छात्र-छात्राएं, विभिन्न क्षेत्रों के कार्यरत पेशेवर और सेवानिवृत्त व्यक्ति—सभी ने नए कौशल सीखने के लिए अपना उत्साह दिखाया। यह दृश्य वास्तव में अद्भुत था जब एक ही कक्षा में भविष्य के इंजीनियर और अनुभवी वरिष्ठ नागरिक साथ में कोडिंग और एआई (AI) टूल्स सीख रहे थे। कार्यक्रम के आयोजकों ने यह सुनिश्चित किया था कि प्रशिक्षण हेतु किसी भी प्रकार का पूर्व तकनीकी ज्ञान अनिवार्य नहीं है, जिससे तकनीक के क्षेत्र में नए लोगों को भी हिचकिचाहट के बिना सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिला।

व्यावहारिक प्रशिक्षण और आधुनिक पाठ्यक्रम
“लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” का पाठ्यक्रम काफी व्यापक और भविष्योन्मुखी था। प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं दिया गया, बल्कि उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक AI टूल्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, पायथन प्रोग्रामिंग, वेबसाइट डिज़ाइनिंग, उद्यमिता कौशल, एक्सेल तथा व्यक्तित्व विकास का व्यावहारिक और हस्तप्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण का तरीका इतना सरल था कि जिन लोगों ने कभी कंप्यूटर नहीं छुआ था, वे भी प्रोग्रामिंग के बुनियादी सिद्धांतों को समझने में सक्षम रहे। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि अगर इच्छाशक्ति हो तो सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
नवाचारपूर्ण प्रोजेक्ट्स: छात्रों ने दिखाया दमखम
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने जो प्रोजेक्ट्स तैयार किए, वे वास्तव में प्रशंसनीय थे। सभी प्रतिभागियों ने अपनी व्यक्तिगत पोर्टफोलियो वेबसाइट्स बनाईं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से प्रोफेशनल हेडशॉट्स, पोस्टर और निमंत्रण-पत्र डिज़ाइन किए। इसके अलावा, छात्रों ने पायथन प्रोग्रामिंग का उपयोग करके BMI कैलकुलेटर और विभिन्न मिनी प्रोजेक्ट्स भी तैयार किए।
कार्यक्रम में सबसे अधिक प्रभावशाली प्रदर्शन 15 वर्षीय बेनहुर और 17 वर्षीय एंजेल लहरे का रहा। इन दोनों युवा प्रतिभाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से दो संपूर्ण कंप्यूटर गेम्स (Computer Games) विकसित करके सबको हैरान कर दिया। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन मिलने पर युवा किसी भी क्षेत्र में नवाचार कर सकते हैं।
समापन समारोह: तकनीक और मानवीय मूल्यों का संगम
कार्यक्रम के समापन समारोह की अध्यक्षता एच० डी० शेफर मेमोरियल फाउंडेशन के निदेशक संजय विल्सन ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तभी सार्थक है जब उसे मानवीय विवेक, नैतिकता और कौशल के साथ जोड़ा जाए।” उनका कहना था कि “तकनीक साधन है, साध्य नहीं” और इसका उपयोग समाजहित एवं आत्मविकास के लिए होना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों को तकनीक को सिर्फ कमाने का जरिया न समझकर, समाज को आगे बढ़ाने के लिए उपयोग करने की प्रेरणा दी।
समारोह के दौरान आकांक्षा नाथानियल, एंजेल लहरे, बेनहुर, डेफनी, मेर्लिन, राजेश मकबूल एवं विस्मय सहित सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आलोक विल्सन, विनय जेम्स एवं के० एम० के० पॉल की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ाई।
प्रशिक्षकों और आयोजकों की मेहनत का परिणाम
किसी भी कार्यक्रम की सफलता में प्रशिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अप्रतिम सैमुएल और डेटा साइंटिस्ट कपिल वर्मा की अहम भूमिका रही। उन्होंने न केवल आधुनिक तकनीकी अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाया, बल्कि व्यावहारिक प्रयोगों के माध्यम से प्रतिभागियों को भविष्य के लिए तैयार किया।

इस सम्पूर्ण आयोजन के सफल संयोजन का श्रेय रेव० निखिल पॉल को जाता है। उनके समर्पण, कुशल प्रबंधन और सतत प्रयासों से कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका। उनकी दूरदृष्टि और कड़ी मेहनत ही इस कार्यक्रम की रीढ़ थी।
तकनीकी शिक्षा जन-जन के लिए
“लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” इस तथ्य का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है कि तकनीकी शिक्षा केवल इंजीनियरिंग अथवा विज्ञान के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। यह समाज के प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक आयु वर्ग के व्यक्ति के लिए खुली है। आधुनिक तकनीक सीखकर कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकता है। यह कार्यक्रम बिलासपुर के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है और भविष्य में ऐसे और भी आयोजनों को देखने की उम्मीद की जा सकती है।






















