धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक एवं प्रेरणादायी पहल के तहत “मंगलमय परिवार, नोएडा” द्वारा सेक्टर-20 स्थित श्री हनुमान मंदिर एवं शिव मंदिर परिसर में “निर्मल्या कलश पात्र” स्थापित किए गए हैं। यह कदम न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पहल का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना, धार्मिक परंपराओं का संरक्षण करना और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देना है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
“निर्मल्या कलश पात्र” का महत्व
बता दें कि “निर्मल्या कलश पात्र” का अर्थ है ऐसे पात्र जिनमें घरों से निकली खंडित देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, धार्मिक चित्र, पूजा-पाठ की पुस्तकें, भगवान के वस्त्र, चुनरी और अन्य पूजन सामग्री सम्मानपूर्वक एकत्रित की जाती हैं। इन पात्रों का उद्देश्य धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए इन सामग्री का गरिमापूर्ण और विधि-विधान से निस्तारण करना है। यह न केवल धार्मिक मान्यताओं का सम्मान है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी एक प्रयास है, क्योंकि इससे मूर्तियों और पूजन सामग्री के अनावश्यक कूड़ा-करकट से बचाव होता है।
कार्यक्रम का आयोजन और मुख्य अतिथि
बता दें कि इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत, सेक्टर-20 के हनुमान और शिव मंदिर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री संजय जिंदल जी उपस्थित रहे, जिन्होंने संतुष्टि सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष नवीन पोरवाल के नेतृत्व में इस पहल का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के दौरान मंदिरों को “निर्मल्या कलश पात्र” समर्पित किए गए।
जिंदल के साथ ही विनय गुप्ता (मंदिर की अध्यक्षा), संदीप पोरवाल (मंदिर के महासचिव), श्री गंगाराम यादव, सुनील गिरी, प्रेमशंकर चौधरी शीला वर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इन सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में एक अनुकरणीय कदम माना।
संस्कृति और पर्यावरण का मेल
“मंगलमय परिवार, नोएडा” की यह पहल सनातन संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण दोनों का संगम है। इसमें घरों से निकली खंडित मूर्तियों, धार्मिक चित्रों, पूजा सामग्री आदि को एकत्रित कर विधि-विधान से निस्तारण किया जाता है। इससे न केवल धार्मिक आस्था का सम्मान होता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। पर्यावरण का संरक्षण इस पहल का मुख्य आधार है क्योंकि इससे मूर्तियों और पूजा सामग्री के अनावश्यक कूड़ा-करकट को कम किया जाता है, जो कि अक्सर मंदिरों और घरों में फैला रहता है।
इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक शामिल हुए। मंदिर परिसर में आए श्रद्धालुओं ने इस पहल का समर्थन किया और अपने घरों से निकली मूर्तियों और पूजन सामग्री को “निर्मल्या कलश पात्र” में समर्पित किया। इन सामग्री का विधि-विधान से निस्तारण किया जाएगा, जिससे धार्मिक आस्था का सम्मान बना रहेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह पहल शहर के 201 मंदिरों में अब तक स्थापित की जा चुकी है, जिसका उद्देश्य पूरे शहर में इस जागरूकता को फैलाना है। यह सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है, जो समाज में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित कर रही है।
“मंगलमय परिवार” का योगदान
“मंगलमय परिवार, नोएडा” एक सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठन है, जो सदैव समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम करता है। इसकी स्थापना का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का संचार करना है। इस संगठन की टीम निरंतर ऐसी अनेक पहल और गतिविधियों का आयोजन करती रही है, जिनसे समाज का समृद्धि और पर्यावरण का संरक्षण संभव हो सके।
संतुष्टि सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष नवीन पोरवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम न केवल धार्मिक परंपराओं का सम्मान है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल समाज में जागरूकता फैलाएगी और हम सभी को अपने धार्मिक और सामाजिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए।























