Massive opposition to the Noida Authority: ग्रेटर नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) में बढ़ते औद्योगिकरण और शहरीकरण के दौरान किसानों की जमीन छीने जाने का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आज अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) और किसान संघर्ष मोर्चा, ग्रेटर नोएडा के संयुक्त आह्वान पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यालय पर एक विशाल और जोरदार हल्ला बोल प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य वर्षों से लंबित किसानों की बुनियादी मांगों को प्राधिकरण के सामने रखना और उनके निस्तारण के लिए दबाव बनाना था। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
किसानों की अनसुनी मांगें और प्राधिकरण की उपेक्षा
बता दें कि इस धरने-प्रदर्शन में शामिल हजारों की तादाद में किसान सुबह-सुबह प्राधिकरण कार्यालय के बाहर एकत्रित होने लगे। किसानों की प्रमुख मांगों में भूमि अधिग्रहण के समय किया गया 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट का वितरण, केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए भूमि अधिग्रहण कानून (2014) को स्थानीय स्तर पर लागू करना और गांवों की आबादियों का निस्तारण शामिल है।
किसानों का कहना है कि जब उनकी जमीनें नोएडा और ग्रेटर नोएडा बनाने के नाम पर अधिगृहीत की गई थीं, तब उन्हें पुनर्वास के तौर पर 10% आबादी प्लॉट देने का वादा किया गया था। लेकिन दशकों बीत जाने के बावजूद यह वादा पूरा नहीं हुआ। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय और हाई पावर कमेटी की सिफारिशों के बावजूद प्राधिकरण ने नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने में जानबूझकर टालमटोल की है, जिससे किसानों को मुआवजे और रोजगार के अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
किसान-मजदूर एकता की अनूठी मिसाल
किसानों के इस आंदोलन को एक नया बल मिला जब देश के अग्रणी मजदूर संगठन सीआईटीयू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) ग्रेटर नोएडा और जेएसएस (जनवादी महिला समिति) दिल्ली-एनसीआर ने इसमें सक्रिय भागीदारी ली। सैकड़ों की संख्या में मजदूर और महिला कार्यकर्ता लाल झंडों और बैनरों के साथ जुलूस की शक्ल में प्राधिकरण पहुंचे।
इस अवसर पर सीटू के जिला अध्यक्ष मुकेश कुमार राघव, महासचिव रामस्वारथ, सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा और जिला कमेटी सदस्य अरुण कुमार पटेल ने किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रदर्शन का नेतृत्व किया। वहीं, जनवादी महिला समिति की दिल्ली-एनसीआर राज्य अध्यक्ष आशा यादव, जिला अध्यक्ष रेखा चौहान, कोषाध्यक्ष गुड़िया देवी और अन्य जिला कमेटी सदस्यों के नेतृत्व में महिलाओं ने जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन स्थल पर गूंजे तेज नारे
प्राधिकरण कार्यालय के बाहर का माहौल नारेबाजी से गूंज उठा। “किसान-मजदूर एकता जिंदाबाद”, “प्राधिकरण की गुंडागर्दी बंद करो”, “10% आबादी प्लॉट हमारा हक है, इसे अभी दो”, और “नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू करो” जैसे नारे लगते रहे। महिला कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इस आंदोलन को एक अलग ही ऊर्जा दी। महिलाओं ने सरकार और प्राधिकरण पर जमीनों को लेकर परिवारों को बेघर करने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए नेताओं ने कड़े शब्दों में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर प्रहार किया। वक्ताओं ने कहा कि प्राधिकरण पूरी तरह से कॉर्पोरेट घरानों और बिल्डर माफिया के इशारों पर काम कर रहा है। हाई पावर कमेटी द्वारा दी गई सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जिस तरह से नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू नहीं किया जा रहा, उससे साफ है कि किसानों को चार गुना मुआवजा और पुनर्वास का हक देने में सरकार और प्रशासन रुचि नहीं लेता।
सीटू नेताओं ने बताया कि जिस जमीन पर आज बहुमंजिला इमारतें और फैक्ट्रियां खड़ी हैं, वह किसानों और मजदूरों के खून-पसीने की कमाई है। अब जब इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों के साथ भी अन्याय हो रहा है, तो किसान और मजदूर एक साथ आकर इस शोषण के खिलाफ एकजुट होंगे।
आंदोलन की चेतावनी, अगला कदम बड़ा होगा
प्रदर्शन के अंत में किसान नेताओं और सीटू पदाधिकारियों ने प्राधिकरण के अधिकारियों को एक स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक चेतावनी प्रदर्शन था। यदि एक सप्ताह के भीतर किसानों की इन तीनों प्रमुख मांगों—10% आबादी प्लॉट, नया भूमि अधिग्रहण कानून का अक्षरशः पालन और आबादी निस्तारण—पर कोई ठोस और लिखित समाधान नहीं निकाला गया, तो अगला आंदोलन बहुत बड़ा और उग्र होगा।
नेताओं ने चेतावनी दी है कि आगामी दिनों में सीटू और किसान सभा मिलकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय का घेराव करेंगे और यदि जरूरत पड़ी तो जिले की आर्थिक गतिविधियों को ठप करने के लिए ‘चक्का जाम’ और ‘रेल रोको’ जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि गौतम बुद्ध नगर में जमीन का मुद्दा अभी शांत नहीं हुआ है। किसान अपने अधिकारों के लिए कूदने को तैयार हैं, और उन्हें मजदूर वर्ग और महिला संगठनों का भरपूर साथ मिला हुआ है। अब देखना यह है कि प्राधिकरण इस जनादेश को कितनी गंभीरता से लेता है।

























