Delhi News: दिल्ली को ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘विश्वस्तरीय राजधानी’ बनाने के तमाम दावों की हकीकत पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी में उस वक्त कुचल दिखती है, जब लोगों को अपने ही घरों में सीवर जैसे बदबूदार पानी के साथ जीने पर मजबूर होना पड़ता है। यहां साफ पानी अब आम नागरिकों के लिए एक सपना बनकर रह गया है। नल खोलो तो बदबू आए, ऐसी स्थिति में लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
हकीकत VS दिखावा: क्या सिर्फ वीवीआईपी को मिलेगा स्वच्छ पानी?
बता दें कि जनकपुरी के इलाके में आरोप लग रहे हैं कि दिल्ली में वर्ग-भेद साफ पानी की सप्लाई तक आ गया है। जहां सरकारी अधिकारियों और नेताओं के घरों में शुद्ध पानी की लाइनें हैं, वहीं मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों को गंदा पानी थोपा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भाजपा सरकार इस मामले में सिर्फ दिखावे का काम कर रही है और जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा।
86 साल की बुजुर्ग का दर्द: ‘बेटे को घर बुलाने की हिम्मत नहीं’
इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग और बीमार लोग हो रहे हैं। 86 वर्षीय विमला अरोड़ा बताती हैं कि पिछले 6-7 महीनों से उनके घर में सीवर जैसा पानी आ रहा है। ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी से जूझ रही विमला भारी पानी की बोतलें नहीं उठा सकतीं, ऐसे में उन्हें छोटी बोतलों के सहारे अपना काम चलाना पड़ रहा है। एक मां का दर्द छलकता है जब वे कहती हैं, बेटे की शादी हो चुकी है, लेकिन इस बदबूदार हालात में उन्हें खाने पर घर बुलाने की भी हिम्मत नहीं होती।
बदबू से बचने के लिए 24 घंटे चलते हैं पंखे
एक मंजिल नीचे रहने वाले 85 वर्षीय केपी महाजन पिछले 50 सालों से इसी इलाके में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैंने इतने खराब हालात कभी नहीं देखे। गंदे पानी की बदबू से बचने के लिए हमें घर में 24 घंटे पंखे चलाने पड़ते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो प्रशासन को उन्हें कहीं और शिफ्ट करना होगा।
सेहत पर भारी पड़ रही है लापरवाही
यह समस्या अब सिर्फ असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है। 61 वर्षीय जगमीत सिंह ने बताया कि सितंबर 2024 में इसी गंदे पानी के चलते उन्हें टाइफाइड हो गया और ठीक होने में दो महीने लग गए। उनकी बेटी को तो पीलिया हो चुका है। अब उनका पूरा परिवार महंगे बोतलबंद पानी पर निर्भर हो गया है। जगमीत कहते हैं कि साफ पानी नागरिकों का बुनियादी अधिकार है, प्रशासन को अब जागना होगा।
12 शिकायतें, लेकिन जमीनी हालात बदहाल
नाराजगी का आलम यह है कि लोगों ने पिछले एक साल में 12 से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई हैं। इंजीनियरों से लेकर उच्च अधिकारियों, मंत्री और यहां तक कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई गई। हर बार जवाब तो मिल रहा है, लेकिन अधिकारियों के ‘सुधार हुआ’ वाले दावों की पोल जनकपुरी के नलों से निकलने वाला गंदा पानी खोल रहा है।

















