इंदौर की पहचान में पोहा और जलेबी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इन मिठाइयों का स्वाद हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। यदि आप भी घर पर ही ताजी, कुरकुरी और स्वादिष्ट जलेबी बनाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहाँ हम आपको पूरी प्रोसेस बताएंगे, जिससे आप बाजार जैसी पतली और रस से भरपूर जलेबी घर पर ही बना सकते हैं। यदि आप सही घोल की गाढ़ापन, तेल का तापमान और बनाने का तरीका जान लेते हैं, तो यह रेसिपी आपको इतना आसान लगेगा कि आप रोज़ ही घर पर जलेबी बनाने का मन करेगा।
जलेबी बनाने की तैयारी: सामग्री और आवश्यक उपकरण
जलेबी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री:
- मैदा (आटा) – 1 कप
- बेसन (चना का आटा) – 1/4 कप
- दही – 2 टेबलस्पून
- बेकिंग पाउडर – 1/4 टीस्पून
- बेकिंग सोडा – 1/4 टीस्पून
- इलायची पाउडर – 1/2 टीस्पून
- खाने का रंग (इच्छानुसार) – कुछ बूंदें
- तेल या घी (तलने के लिए) – पर्याप्त मात्रा में
चाशनी के लिए:
- चीनी – 1 कप
- पानी – 1 कप
- केसर (इच्छानुसार) – थोड़ी मात्रा
- इलायची पाउडर – 1/4 टीस्पून
- नींबू का रस – 1 छोटी चम्मच
जलेबी का घोल बनाना: सही गाढ़ापन बेहद जरूरी
जलेबी का घोल बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मैदा, बेसन, बेकिंग पाउडर और बेकिंग सोडा को अच्छी तरह मिलाएं। फिर इसमें दही और इलायची पाउडर डालें। अब इसमें आवश्यकतानुसार पानी डालते हुए ऐसा घोल तैयार करें, जो बहने में आसान हो, मगर बहुत पतला न हो।
ध्यान रखें कि घोल का गाढ़ापन बहुत महत्वपूर्ण है। यदि घोल बहुत पतला होगा, तो जलेबी का आकार सही नहीं बनेगा और वह फिसलने लगेगा। वहीं, यदि यह बहुत गाढ़ा है, तो जलेबी सही से नहीं बन पाएगी। सही गाढ़ापन वह होगा कि आप इसे बोतल या पाइप में आसानी से भर सकें और जब आप इसे तेल में डालें, तो यह आसानी से फैल जाए, लेकिन बहुत ही तेज न फैले।
घोल को खमीर उठाने के लिए रखना
अब इस घोल को ढककर गर्म स्थान पर 10 से 12 घंटे के लिए रख दें। यदि मौसम ठंडा है, तो इसमें ज्यादा समय लग सकता है। इस दौरान घोल में छोटे-छोटे बुलबुले और खमीर उठने के संकेत दिखेंगे। यदि आप चाहें तो कुछ बूंदें सिरका या लिक्विड खमीर भी डाल सकते हैं, ताकि फर्मेंटेशन सही से हो।
खमीर उठने के बाद घोल की सतह पर छोटे बुलबुले और हल्की खटास आ जाएगी, जो जलेबी के स्वाद को और भी खास बना देगी। इस समय घोल को हल्के हाथ से फेंट लें और यदि जरूरत हो तो थोड़ा पानी डालकर उसे सही बहने वाले गाढ़ापन में ले आएं।
चाशनी बनाना: मिठास का सही तापमान
जलेबी के साथ जरूरी है एक अच्छी, मीठी और गाढ़ी चाशनी। इसके लिए एक पैन में चीनी और पानी डालकर मध्यम आंच पर उबालें। जब पानी में चीनी घुल जाए, तो इसमें इलायची पाउडर, केसर की किरणें और नींबू का रस डालें।

अब इसे उबालते रहें जब तक कि यह हल्की चिपचिपी न हो जाए। आप एक तार की चाशनी बनाने के लिए, चाशनी का थोड़ा सा हिस्सा निकालें और अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर देखें। यदि इनके बीच एक पतली तार जैसी लकीर बन जाती है, तो यह तैयार है। यदि यह बहुत गाढ़ी हो जाए, तो थोड़ा पानी डालकर मिलाएं।
ध्यान दें कि चाशनी बहुत गाढ़ी या बहुत पतली नहीं होनी चाहिए। सही चाशनी वह है जिसमें हल्की चिपचिपाहट हो, लेकिन वह बहुत ही जमी हुई न हो।
जलेबी बनाना: आकार और तलने का सही तरीका
तैयार घोल को किसी नॉन-ड्रॉप बोतल या पाइप में भर लें। छोटी-छोटी जलेबी बनाने के लिए मुंह का आकार छोटा रखें। अब तेल या घी को मध्यम आंच पर गरम करें। तेल बहुत तेज गर्म न करें; क्योंकि तेज आंच पर जलेबी का बाहरी हिस्सा जल्दी जल सकता है और अंदर का हिस्सा ठीक से नहीं पक पाएगा।
बोतल को दबाते हुए घोल को तेल में गोलाकार घुमाते हुए डालें। आप चाहें तो पहले जलेबी का आकार बनाकर देखें और फिर तापमान को नियंत्रित करें। जब जलेबी सुनहरी और कुरकुरी हो जाए, तो उसे तुरंत ही गरम चाशनी में डालें।
जलेबी को चाशनी में डालना और परोसना
गरम जलेबी को तुरंत ही गर्म चाशनी में डालें। दोनों तरफ कुछ सेकंड तक रहने दें, ताकि जलेबी अच्छी तरह से चाशनी सोख ले। फिर उसे निकालकर प्लेट में रखें। आप ऊपर से कटे हुए मेवे या केसर डाल सकते हैं।
आप चाहें तो जलेबी को थोड़ी देर के लिए ही चाशनी में रहने दें, लेकिन ज्यादा देर तक रखने से कुरकुरापन कम हो सकता है। गरमागरम जलेबी को गर्म दूध या रबड़ी के साथ परोसें, इससे उसका स्वाद दोगुना हो जाएगा।

























