FIFA World Cup 2026: फीफा विश्व कप 2026 का उत्साह धीरे-धीरे अपने चरम पर पहुंच रहा है। टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण (राउंड ऑफ 16) में जब इंग्लैंड की टीम मेक्सिको के खिलाफ मैदान पर उतरेगी, तो नजरें सिर्फ खिलाड़ियों के हुनर पर ही नहीं, बल्कि उनकी ‘मेडिकल रणनीति’ पर भी टिकी होंगी। 6 जुलाई को मेक्सिको सिटी के ऐतिहासिक ‘एस्टाडियो एज्टेका’ में होने वाले इस क्रूशियल मुकाबले से पहले इंग्लैंड कैंप से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी खेल जगत को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इंग्लैंड के फुटबॉलर्स को इस मैच के दौरान ‘वियाग्रा’ नामक दवा का सेवन करने की आधिकारिक छूट दे दी गई है।
खेल जगत में अक्सर नई तकनीकों और विज्ञान का इस्तेमाल खिलाड़ियों की फिटनेस बनाए रखने के लिए किया जाता है, लेकिन एक यौन स्वास्थ्य से जुड़ी दवा को फुटबॉल मैदान से जोड़ना बेहद अजीब जरूर लगता है। तो आइए जानते हैं कि आखिर इस पीछे की वजह क्या है और क्या यह वाकई इंग्लैंड के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
एस्टाडियो एज्टेका की चुनौती
इस पूरे मामले को समझने के लिए सबसे पहले मैदान की भौगोलिक स्थिति को समझना जरूरी है। मेक्सिको सिटी समुद्र तल से लगभग 7,350 फीट (यानी करीब 2,240 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी अधिक ऊंचाई पर वायुमंडलीय दबाव काफी कम होता है। जिसका सीधा असर यह होता है कि हवा में ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य स्तर से कहीं कम हो जाती है।
एस्टाडियो एज्टेका दुनिया के सबसे दुर्गम और कठिन मैदानों में गिना जाता है। यहां तक कि मेक्सिको की राष्ट्रीय टीम भी इस मैदान पर नियमित रूप से अभ्यास नहीं करती। ऐसे में जब इंग्लैंड जैसी टीम, जिसके खिलाड़ी समुद्र तल के करीब के इलाकों में रहते और खेलते हैं, अचानक इतनी ऊंचाई पर 90 मिनट तक उच्च तीव्रता वाला फुटबॉल खेलती है, तो उनके शरीर पर गंभीर दबाव पड़ता है। ऑक्सीजन की कमी के कारण खिलाड़ियों के फेफड़ों और दिल पर ज्यादा बोझ पड़ता है, जिससे स्टैमिना तेजी से गिरती है और मैच के बाद रिकवरी भी मुश्किल हो जाती है।
विज्ञान और वियाग्रा का कनेक्शन
अब सवाल यह है कि ऑक्सीजन की कमी से जूझने के लिए वियाग्रा (जिसका वैज्ञानिक नाम सिल्डेनाफिल है) का क्या काम? दरअसल, वियाग्रा का असली काम शरीर में ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) को चौड़ा करना है। जब कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा ऊंचाई पर जाता है, तो ऑक्सीजन की कमी के कारण शरीर की फेफड़ों से जुड़ी धमनियां सिकुड़ने लगती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ‘पल्मोनरी हाइपरटेंशन’ कहा जाता है।
इंग्लैंड के मेडिकल स्टाफ की रणनीति यह है कि वियाग्रा के सेवन से फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को आराम मिलेगा और वे चौड़ी रहेंगी। जब रक्त वाहिकाएं चौड़ी होंगी, तो दिल शरीर के हर हिस्से और फेफड़ों में खून को आसानी से पहुंचा पाएगा। इससे जो थोड़ी बहुत ऑक्सीजन हवा में मौजूद है, वह शरीर के हर अंग तक जल्दी पहुंचेगी।
WADA (विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी) का क्या है रुख?
जब कोई भी दवा खेल में इस्तेमाल होती है, तो सबसे पहला सवाल डोपिंग का होता है। लेकिन खिलाड़ियों को इस बारे में कोई डर नहीं है। विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) ने वियाग्रा को अपने निषिद्ध दवाओं की सूची में शामिल नहीं किया है।
WADA के वैज्ञानिकों ने इस दवा पर वर्षों तक गहन शोध किया। उनके अनुसार, अगर कोई खिलाड़ी समुद्र तल या सामान्य ऊंचाई वाले इलाकों में वियाग्रा खाता है, तो इससे उसकी खेल प्रदर्शन (परफॉर्मेंस) में कोई विशेष बढ़त नहीं मिलती। इसलिए इसे परफॉर्मेंस-एन्हांसिंग ड्रग (PED) नहीं माना गया। हालांकि, अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इसके चिकित्सीय लाभ स्पष्ट हैं, जिसके चलते एथलीट्स को इसका इस्तेमाल करने की पूरी छूट है।
इंग्लिश फुटबॉल में वियाग्रा का अतीत
दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब इंग्लैंड की टीम इस अनोखे तरीके के बारे में सोच रही है। साल 2010 में जब फीफा वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका में आयोजित होने वाला था, तब भी ऐसी अटकलें तेज थीं कि इंग्लैंड टीम ऊंचाई वाले स्टेडियमों पर खेलने के लिए इस दवा का सहारा ले सकती है। हालांकि, उस समय इंग्लैंड फुटबॉल एसोसिएशन (FA) ने इन खबरों का खंडन कर दिया था।
लेकिन इंग्लैंड के फुटबॉल इतिहास में वियाग्रा का एक बेहद मजेदार और चौंकाने वाला किस्सा जरूर दर्ज है। इंग्लैंड के दिग्गज स्ट्राइकर रहे कार्लटन कोल ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि ट्रेनिंग कैंप के दौरान उनके साथी खिलाड़ियों ने एक मजाक के तहत उन्हें धोखे से वियाग्रा की गोली खिला दी थी। कार्लटन कोल ने हास्यपूर्ण अंदाज में बताया था कि उस दिन प्रैक्टिस सेशन के दौरान वे “तीन पैरों” वाले खिलाड़ी की तरह दौड़ रहे थे। हालांकि, अब 2026 में अगर यह दवा इस्तेमाल होती है, तो यह किसी मजाक से बल्कि एक सीरियस और साइंटिफिक रणनीति के तौर पर होगा।
एज्टेका किले के सामने इंग्लैंड की चुनौती
अगर हम मैदानी स्थिति की बात करें, तो मेक्सिको के लिए यह मैच बेहद आसान है। मेक्सिको टीम वर्तमान में शानदार फॉर्म में चल रही है और टूर्नामेंट में अब तक अपने सभी लीग मैच जीत चुकी है। वहीं, एस्टाडियो एज्टेका मेक्सिको के लिए किसी किले जैसा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो मेक्सिको ने इस मैदान पर अब तक खेले गए 89 अंतरराष्ट्रीय मैचों में से 87 जीते हैं। यहां उन्हें सिर्फ दो बार हार का सामना करना पड़ा है, और यह आखिरी हार भी साल 2013 में आई थी।
इस हिसाब से देखें तो इंग्लैंड के लिए यह मैच ‘मिशन इम्पॉसिबल’ से कम नहीं है। लेकिन आधुनिक फुटबॉल में तकनीक, साइंस और डेटा एनालिसिस का बहुत बड़ा रोल है। इंग्लैंड के पास दुनिया के सबसे अच्छे स्टार खिलाड़ी हैं और अगर उनका मेडिकल स्टाफ वियाग्रा जैसी रणनीति के जरिए ऊंचाई के प्रभाव को न्यूट्रलाइज करने में सफल रहा, तो फिर मेक्सिको के इस अजेय किले को ढहाना इंग्लैंड के लिए असंभव नहीं होगा।























