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गर्मियों में डायबिटीज के मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां

गर्मी इंसुलिन और डायबिटीज की दवाओं पर भी असर डाल सकती है। यदि आप इंसुलिन का प्रयोग कर रहे हैं, तो उसे सीधे धूप में या गर्म कार के अंदर न रखें। ट्रैवल करते समय उसे कूलर में रखें और सीधे बर्फ या जेल पैक पर न रखें।

हीटस्ट्रोक और हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण जानिए

HIGHLIGHTS

  • ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए दिनचर्या सुझाव
  • हीटवेव में डिहाइड्रेशन से कैसे बचें?
  • गर्मियों में इंसुलिन का सही इस्तेमाल
  • ब्लड शुगर लेवल बढ़ने या घटने के संकेत
  • गर्मी में अपनी डायबिटीज प्रबंधन रणनीति कैसे बनाएं

Measures to Control Blood Sugar: गर्मी का मौसम अक्सर हमारे स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है, खासकर उन लोगों के लिए जो डायबिटीज से जूझ रहे हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण ब्लड शुगर का स्तर अनियमित हो सकता है, जिससे न सिर्फ बीमारी का प्रबंधन कठिन हो जाता है, बल्कि गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं। इसलिए, इस लेख में हम आपको तीन मुख्य कारणों के बारे में जानकारी देंगे कि गर्मी के दौरान ब्लड शुगर में क्यों उतार-चढ़ाव होता है और इसे नियंत्रित करने के तरीके भी बताएंगे।

1. डिहाइड्रेशन और पानी की कमी

गर्मियों में अत्यधिक पसीना आना और शरीर से पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होना आम बात है। जब शरीर का पानी का स्तर घटता है, तो खून की स्राव क्षमता प्रभावित होती है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर अनियमित हो सकता है। खासकर, जब ब्लड शुगर बढ़ता है, तो किडनी को अतिरिक्त ग्लूकोज निकालने के लिए अधिक काम करना पड़ता है, जिससे पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है। इस प्रक्रिया से शरीर में पानी की कमी और भी बढ़ जाती है।

इसके अलावा, कुछ दवाइयां जैसे ड्यूरेटिक्स (वॉटर पिल्स) जो हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए दी जाती हैं, भी शरीर में पानी की कमी का कारण बन सकती हैं। जब शरीर में पानी की मात्रा कम होती है, तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। भले ही प्यास न लगे, फिर भी शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए खूब पानी पीना चाहिए।

2. शरीर का तापमान नियंत्रण और ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी

डायबिटीज से ग्रस्त व्यक्ति की नसें, जो पसीने की ग्रंथियों को नियंत्रित करती हैं, वो नुकसान पहुंच सकती हैं। इस स्थिति को ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। नतीजतन, शरीर जरूरत के मुताबिक पसीना नहीं बना पाता या फिर शरीर का तापमान सही ढंग से नियंत्रित नहीं हो पाता। पसीना न आने से शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम (भाप बनना) बिगड़ जाता है, जिससे हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

वहीं, कुछ मरीजों को विपरीत समस्या का सामना भी करना पड़ता है, जैसे कि भोजन करते समय चेहरे या गर्दन पर अत्यधिक पसीना आना। यह समस्या, जिसे डायबिटिक गस्टेटरी स्वेटिंग कहा जाता है, लंबे समय तक उच्च ब्लड शुगर के कारण नसों को नुकसान पहुंचाने के कारण हो सकती है। इन सभी समस्याओं का प्रभाव शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता पर पड़ता है, जिससे हीटस्ट्रोक और हाइपरग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ जाता है।

3. तापमान का प्रभाव और शरीर का तापमान नियंत्रण

जब वातावरण का तापमान बढ़ता है, तो हमारी त्वचा के नीचे मौजूद खून की नसें फैल जाती हैं। इससे त्वचा की सतह के पास खून का प्रवाह बढ़ता है, जिससे शरीर की गर्मी पसीने और भाप के जरिए बाहर निकल जाती है। लेकिन, यदि हवा में नमी या गर्मी बहुत अधिक हो, तो पसीना वाष्पित नहीं हो पाता, और शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं रह पाता।

इस स्थिति में, दिल को खून पंप करने और शरीर का तापमान कम करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे कोर्टिसोल नामक तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो ब्लड शुगर को और बढ़ा सकता है। इस प्रकार, गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान नियंत्रित रखना और सही तरीके से हाइड्रेटेड रहना बहुत जरूरी है।

गर्मी में ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के उपाय

गर्मी के मौसम में ब्लड शुगर को सटीक स्तर पर बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियों का पालन करना चाहिए:

  • खूब पानी पिएं: प्यास न लगे, फिर भी शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
  • शराब और कैफीन से बचें: कॉफी, सोडा, एनर्जी ड्रिंक्स और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन और चीनी शरीर में पानी की कमी कर सकते हैं और ब्लड शुगर में वृद्धि कर सकते हैं।
  • नियमित ब्लड शुगर चेक करें: एक्टिविटी के पहले, दौरान और बाद में ब्लड शुगर जांचें ताकि आवश्यकतानुसार इंसुलिन डोज़ को समायोजित किया जा सके।
  • हल्के और सूती कपड़े पहनें: ढीले-ढाले, हल्के रंग के कपड़े गर्मी से राहत दिलाते हैं।
  • सनस्क्रीन और टोपी का इस्तेमाल करें: सूरज की किरणों से बचाव करें, ताकि सनबर्न और ब्लड शुगर स्तर पर प्रभाव न पड़े।
  • नंगे पैर न चलें: गर्मी में नंगे पैर चलने से त्वचा जल सकती है।
  • एयर कंडीशनर का प्रयोग करें: ठंडक बनाए रखने के लिए एयर कंडीशनर या ठंडे स्थानों का प्रयोग करें।

गर्मी का असर और खास देखभाल

गर्मी इंसुलिन और डायबिटीज की दवाओं पर भी असर डाल सकती है। यदि आप इंसुलिन का प्रयोग कर रहे हैं, तो उसे सीधे धूप में या गर्म कार के अंदर न रखें। ट्रैवल करते समय उसे कूलर में रखें और सीधे बर्फ या जेल पैक पर न रखें।

गर्मी में इन लक्षणों पर ध्यान दें:

  • डिहाइड्रेशन के संकेत: थकान, पेशाब कम आना, प्यास अधिक लगना, सिर चकराना, मुंह और आंखें सूखना।
  • हीट एग्जॉशन: लो ब्लड प्रेशर, बेहोशी, बहुत पसीना आना, चक्कर, मतली।
  • हीट स्ट्रोक: तुरंत मेडिकल मदद लें; यह जानलेवा हो सकता है।

हाइपोग्लाइसीमिया (कम ब्लड शुगर) के लक्षण:

  • कन्फ्यूजन, धुंधली नजर, चिंता
  • दिल की धड़कन बढ़ना, कंपकंपी
  • गंभीर मामलों में बेहोशी

गर्मी के मौसम में इन लक्षणों को पहचानना और तुरंत उपचार करना जरूरी है ताकि गंभीर जटिलताएं न हो सकें।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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