Maharashtra News : राज्य में बढ़ते सड़क हादसों और निजी बसों में फैली अनियमितताओं को रोकने के लिए परिवहन विभाग (आरटीओ) एक बड़े प्रशासनिक सुधार जा रहा है। विभाग ‘सड़क सुरक्षा निधि’ से ‘डिजिटल बस पोर्टल’ विकसित करने की तैयारी में जुटा है। इस पोर्टल के आने के बाद राज्य की हर निजी बस की एक-एक गतिविधि पर प्रशासन की पैनी नजर रहेगी।
परमिट धारक और बस मालिक अलग: बन रही थी दुर्घटनाओं की वजह
बता दें कि वर्तमान समय में आरटीओ द्वारा विभिन्न संस्थाओं, कंपनियों और ट्रस्टों को बस परमिट जारी किए जाते हैं। लेकिन धरातल पर तस्वीर उलटी है—कई मामलों में परमिट धारक और वास्तविक बस संचालक अलग-अलग होते हैं। इस चक्रव्यूह के कारण विभाग के पास बसों, उनके रूट और ड्राइवरों की सही व अद्यतन जानकारी नहीं हो पाती है। अधिकारियों की मानें तो यही कमी आमतौर पर भयानक सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बनती है।
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डिजिटल पोर्टल पर क्या-क्या होगा रिकॉर्ड?
प्रस्तावित डिजिटल बस पोर्टल बेहद व्यापक और बहुउद्देश्यीय होगा। इस पोर्टल पर परमिट धारकों के लिए हर बस की जानकारी अपडेट करना अनिवार्य होगा। इसमें शामिल होगा। वाहन की फिटनेस और तकनीकी स्थिति का पूरा ब्यौरा। ड्राइवर की व्यक्तिगत जानकारी और लाइसेंस की वैधता। ड्राइवर के काम के घंटों (Duty Hours) का पूरा रिकॉर्ड।
अनियमितता होगी ‘रियल-टाइम’ रिकॉर्ड
इस डिजिटल निगरानी प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि अगर कोई बस निर्धारित रूट से भटकती है, शेड्यूल में बदलाव करती है, या ड्राइवर अपने ड्यूटी घंटों से ज्यादा ड्राइव करता है, तो यह अनियमितता तुरंत सिस्टम में रिकॉर्ड हो जाएगी। इससे आरटीओ अधिकारियों को चालान या अन्य कानूनी कार्रवाई करने में काफी आसानी होगी।
जीपीएस से जुड़ने के बाद यात्रियों को भी होगा सीधा फायदा
विभाग ने इस पोर्टल के भविष्य को लेकर एक बड़ी योजना पर भी काम शुरू कर दिया है। जल्द ही इस पोर्टल को जीपीएस (GPS) प्रणाली से इंटीग्रेट (जोड़ा) जाएगा। इसके बाद यात्रियों को बस की रियल-टाइम लोकेशन, उसकी स्पीड और स्टॉपेज की जानकारी मोबाइल पर मिल सकेगी। इससे यात्रियों को यात्रा के समय का अनुमान लगाने में आसानी होगी और ओवरस्पीडिंग का खतरा भी कम होगा।























