Chaitra Navratri 2026 : नवरात्रि के पवित्र त्योहार में षष्ठी तिथि का विशेष महत्व है। नवदुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की उपासना इस दिन की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मां कात्यायनी का जन्म हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर मां ने उन्हीं के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसलिए उनका नाम ‘कात्यायनी’ पड़ा।
मां कात्यायनी का स्वरूप
बता दें कि मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है। इनकी चार भुजाएं हैं। इनके दाहिने हाथों में कमल का पुष्प और अभय मुद्रा (आशीर्वाद देने की मुद्रा) है, जबकि बाएं हाथों में तलवार और वर मुद्रा सुशोभित है। मां सिंह (शेर) पर सवार हैं। इनका वर्ण स्वर्ण जैसे चमकीले रंग का बताया गया है। यह स्वरूप मां दुर्गा के योद्धा रूप का प्रतीक माना जाता है।
विशेष महत्व: विवाह एवं कालसर्प दोष के लिए
मां कात्यायनी की उपासना विशेष रूप से उन युवक-युवतियों के लिए की जाती है जिन्हें विवाह में बाधाएं आ रही हों। शास्त्रों में विश्वास है कि भगवान श्री कृष्ण को प्रिय राधा जी ने मां कात्यायनी की कठोर तपस्या करके ही प्राप्त किया था। विवाह बाधा यदि कुंडली में विवाह संबंधी योग अशुभ हों या विवाह में देरी हो रही हो, तो मां कात्यायनी की कृपा से यह बाधाएं दूर होती हैं। कालसर्प दोष के निवारण के लिए भी षष्ठी तिथि पर मां की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
25 मार्च 2026 को पूजा विधि
- स्नान और ध्यान: प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।
- स्थापना: कलश की स्थापना के बाद मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र पर रोली, अक्षत, चंदन और पुष्प अर्पित करें।
- भोग: मां को इस दिन विशेष रूप से शहद (मधु) और लाल रंग के फूल अर्पित करने का विधान है। इसके अलावा खीर, हलवा या पंच भोग का भी श्रेय है।
- मंत्र जाप: मां कात्यायनी के निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें।
मंत्र: “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”
ध्यान मंत्र: “चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी।।” - आरती: पूजा समाप्त होने पर मां दुर्गा की आरती करें और ब्राह्मणों या कन्याओं को भोजन कराएं।
शुभ रंग (Color of the Day)
नवरात्रि के छठे दिन सफेद या रॉयल ब्लू (नीला) रंग पहनने का विधान है। हालांकि, मां कात्यायनी को लाल और पीले रंग के वस्त्र भी प्रिय हैं। इस दिन भक्तगण सफेद रंग के वस्त्र धारण कर शांति और मोक्ष की कामना करते हैं, जबकि नीला रंग उनकी दिव्य शक्ति का प्रतीक है।

























