कम उम्र में ही टूट रही हैं हड्डियां? युवा पुरुषों में बढ़ रहा है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा

Low bone density: ऑस्टियोपोरोसिस और कम हड्डी घनत्व के कारण कम उम्र के पुरुषों में फ्रैक्चर (हड्डी टूटना) के मामलों में एक अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, मुंबई के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के अनुसार, यह एक चिंताजनक स्थिति है।

कम उम्र में कमजोर हड्डियां, युवाओं में बढ़ता ऑस्टियोपोरोसिस खतरा

HIGHLIGHTS

  • 30 की उम्र में टूट रहीं हड्डियां! डॉक्टरों ने दी चेतावनी
  • युवा पुरुषों में तेजी से फैल रही यह साइलेंट बीमारी
  • अगर दिख रहे हैं ये 5 संकेत, तुरंत कराएं बोन टेस्ट
  • हड्डियां हो रही हैं अंदर से खोखली, जानिए वजह
  • ऑस्टियोपोरोसिस अब युवाओं को बना रहा है अपना शिकार

Low bone density: आम धारणा यह है कि ‘ऑस्टियोपोरोसिस’ यानी हड्डियों का कमजोर होना और ‘लो बोन डेंसिटी’ की समस्या केवल उम्रदराज महिलाओं को होती है। खासकर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट के कारण यह समस्या काफी आम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब यह बीमारी पुरुषों को भी अपनी चपेट में ले रही है? और यह भी चौंकाने वाला है कि अब यह 50 या 60 की उम्र के बुजुर्गों की बजाय 30 या 40 की उम्र के युवाओं में भी देखी जा रही है।

हाल के वर्षों में ऑस्टियोपोरोसिस और कम हड्डी घनत्व के कारण कम उम्र के पुरुषों में फ्रैक्चर (हड्डी टूटना) के मामलों में एक अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, मुंबई के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के अनुसार, यह एक चिंताजनक स्थिति है। पहले इसे महिलाओं और बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन खराब जीवनशैली, असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि की कमी के चलते युवा पुरुष भी अब इसके खतरे में हैं।

आँकड़े जो चेतावनी देते हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन और विभिन्न चिकित्सा अध्ययनों के अनुसार, दुनिया भर में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग हर सात में से एक पुरुष को अपने जीवनकाल में कभी न कभी ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़ा फ्रैक्चर होने की संभावना होती है। लेकिन अब यह आंकड़ा युवाओं की ओर बढ़ रहा है। डॉ. बागड़िया की चिंता यह है कि पुरुषों में अक्सर इस बीमारी का पता देर से चल पाता है। जब तक लक्षण स्पष्ट होते हैं, तब तक हड्डियां काफी कमजोर हो चुकी होती हैं। यही कारण है कि इसे ‘साइलेंट डिजीज’ भी कहा जाता है। समय पर इलाज न होने पर फ्रैक्चर से गंभीर विकलांगता भी हो सकती है।

शुरुआती लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें

कम उम्र के पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस को पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि यह किसी बुखार या दर्द की तरह तुरंत सामने नहीं आता। हालांकि, कुछ संकेत ऐसे हैं जो आपकी हड्डियों की कमजोरी का संकेत दे सकते हैं:

  1. लगातार पीठ दर्द: अगर आपको बिना किसी स्पष्ट वजह के कमर या पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द बना रहता है, तो यह हड्डियों के कमजोर होने का संकेत हो सकता है।
  2. बार-बार स्ट्रेस फ्रैक्चर: मामूली चोट या गिरने पर भी हड्डी का टूटना या दरार आना (स्ट्रेस फ्रैक्चर) एक बड़ी चेतावनी है।
  3. कमजोर पकड़ और मुद्रा में बदलाव: अगर आपको लगता है कि आपकी पकड़ कमजोर हो गई है या आप झुककर चलने लगे हैं, तो यह रीढ़ की हड्डी के कमजोर होने का संकेत हो सकता है।
  4. चोट लगने पर देर से ठीक होना: अगर कोई छोटी-मोटी चोट या मोच आने पर वह असामान्य रूप से लंबे समय तक ठीक नहीं होती, तो इसे गंभीरता से लें।
  5. ऊंचाई में कमी: कई बार रीढ़ की हड्डियों के सिकुड़ने के कारण व्यक्ति की ऊंचाई में भी धीरे-धीरे कमी आ जाती है।

युवाओं में बढ़ती इस समस्या के प्रमुख कारण

डॉक्टर के मुताबिक, उम्र के अलावा कई अन्य कारण ऐसे हैं जो युवा पुरुषों की हड्डियों को अंदर से खोखला बना रहे हैं:

  • हार्मोनल असंतुलन: पुरुषों में ‘टेस्टोस्टेरोन’ हार्मोन का स्तर कम होना हड्डियों की सेहत के लिए घातक होता है। यह हार्मोन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
  • विटामिन डी की कमी: भारतीय जीवनशैली में धूप का संपर्क कम होना और खराब खान-पान के कारण विटामिन डी की कमी आम है। बिना विटामिन डी के, शरीर आहार से कैल्शियम को नहीं सोख पाता, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
  • सुस्त जीवनशैली : आज के युवाओं का ज्यादातर समय डेस्क पर बैठकर या मोबाइल स्क्रीन देखकर बीतता है। शारीरिक गतिविधि की कमी हड्डियों को मजबूत रखने वाले ‘पीक बोन मास’ को प्रभावित करती है।
  • खराब आहार और फैड डाइट: प्रोटीन का कम सेवन और जंक फूड पर अधिक निर्भरता शरीर को पोषण से वंचित रखती है। फैड डाइटिंग के चक्कर में युवा अक्सर जरूरी पोषक तत्वों को छोड़ देते हैं, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन: सिगरेट और अधिक मात्रा में शराब पीना सीधे हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है। यह कैल्शियम अवशोषण को कम कर देता है और हड्डियों के पुनर्निर्माण की क्षमता को धीमा कर देता है।
  • व्यायाम की कमी: युवा नियमित रूप से ‘वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज’ (जैसे भारी सामान उठाना, दौड़ना) नहीं करते। ऐसे व्यायाम से हड्डियों पर दबाव पड़ता है, जो उन्हें मजबूत बनाता है। इसके अभाव में हड्डियां कमजोर पड़ जाती हैं।

जांच और इलाज

डॉक्टर के अनुसार, साधारण एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड से ऑस्टियोपोरोसिस की पुष्टि नहीं हो पाती है। इसके लिए ‘डेक्सा स्कैन’ सबसे सटीक विधि है। यह टेस्ट बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) को मापता है और यह बता देता है कि आपकी हड्डियां आपकी उम्र के हिसाब से कितनी मजबूत या कमजोर हैं। अगर आप ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण का सामना कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर यह स्कैन कराना चाहिए।

बचाव और सावधानियां

अच्छी बात यह है कि सही समय पर सुधार करके इस समस्या को रोका जा सकता है और इसे उलटा भी किया जा सकता है।

  • पोषक तत्वों वाला आहार: अपनी डाइट में कैल्शियम (दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां) और विटामिन डी को शामिल करें। प्रोटीन का सेवन भी पर्याप्त मात्रा में होना चाहिए।
  • धूप में रहें: रोजाना कम से कम 15-20 मिनट सुबह की धूप में रहें। यह प्राकृतिक रूप से विटामिन डी बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है।
  • व्यायाम करें: अपनी दिनचर्या में वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, जॉगिंग, वेट ट्रेनिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को शामिल करें। यह हड्डियों को मजबूती देता है।
  • बुरी आदतों को छोड़ें: धूम्रपान और शराब के सेवन को तुरंत बंद करें। यह न केवल हड्डियों के लिए बल्कि समग्र सेहत के लिए भी हानिकारक है।
  •  नियमित जांच: अगर आपकी उम्र 30 के पार है या आपके परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास है, तो एक बार बोन डेंसिटी टेस्ट जरूर कराएं।

यह याद रखना जरूरी है कि हड्डियां हमारे शरीर का ढांचा हैं। यदि ढांचा ही कमजोर हो जाए, तो इमारत कैसे टिकेगी? ऑस्टियोपोरोसिस को केवल बुढ़ापे की बीमारी न समझें। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, थोड़ा सा समय निकालकर अपनी फिटनेस और आहार पर ध्यान देना ही इस ‘साइलेंड किलर’ से बचने का एकमात्र रास्ता है। लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें और समय रहते कदम उठाएं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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