भारत की युवा महिला स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने अपने शानदार खेल के दम पर इतिहास रच दिया है। 2026 वर्ल्ड जूनियर इंडिविजुअल स्क्वैश चैंपियनशिप में अनाहत ने अपनी अदम्य क्षमताओं का परिचय देते हुए क्वार्टर फाइनल में मिस्र की खिलाड़ी हबीबा रिज्क को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई है। इस जीत के साथ ही वह पहली बार विश्व जूनियर स्क्वैश चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। उनका यह प्रदर्शन न केवल भारतीय स्क्वैश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि आने वाले समय में उनके खिताबी विजय का सपना भी मजबूत हो रहा है।
अनाहत सिंह का करियर और उपलब्धियां
अनाहत सिंह का जन्म भारत में हुआ है और उन्होंने अपने कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। भारतीय महिला स्क्वैश में उनका स्थान नंबर वन है, और उनका ध्यान लगातार अपने खेल को निखारने पर केंद्रित रहा है। बीते वर्षों में, उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भाग लिया है और अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। 2025 में, उन्होंने अपने करियर का एक बड़ा मील का पत्थर तय करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। अब वे विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंचकर अपने कदमों को और मजबूत कर चुकी हैं।

विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का सफर
2026 की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में अनाहत सिंह ने शुरुआत से ही अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल मैच में उनका सामना मिस्र की हबीबा रिज्क से हुआ, जो एक कड़ी टक्कर साबित हुआ। पहले दो गेम्स में अनाहत का प्रदर्शन बेहतरीन रहा, उन्होंने 11-7 और 11-5 के स्कोर से आसान जीत हासिल की। हालांकि, तीसरे गेम में हबीबा ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए 6-11 से जीत दर्ज की। अंतिम और निर्णायक चौथे गेम में अनाहत ने अपने संयम और तकनीक का परिचय देते हुए 11-9 से जीत अपने नाम की। इस मुकाबले में उनकी शानदार वापसी और मानसिक दृढ़ता ने दर्शाया कि वह अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ रही हैं।
सेमीफाइनल का मुकाबला और संभावनाएं
अब अनाहत का सामना मिस्र की बार्ब सामेह से होगा। बार्ब सामेह ने हांगकांग की हेलेन टैंग को सीधे गेमों में हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया है। बार्ब का खेल आक्रमणकारी शैली का माना जाता है, जो अनाहत के लिए एक नई चुनौती साबित हो सकती है। यदि वह सेमीफाइनल जीत जाती हैं, तो वह विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप में पहली बार खिताब जीतने वाली भारतीय महिला खिलाड़ी बन जाएंगी। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर के लिए बल्कि भारतीय स्क्वैश के इतिहास में भी एक नया अध्याय जोड़ देगी।
पुरुष वर्ग का प्रदर्शन
पुरुष वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी है। शीर्ष वरीयता प्राप्त मोहम्मद जकारिया ने अमेरिका के यासीन शालाबी को सीधे गेमों में हराकर सैमीफाइनल में जगह बनाई है। इसके अलावा, सेफेलदीन रेफाय ने बेल्जियम के मैडॉक्स मोक्सहैम को 3-0 से हराया है। दूसरी ओर, एडम हवाल ने सऊदी अरब के मोहम्मद अलनसफान को 3-1 से पराजित किया, जबकि मरवान अस्साल ने फ्रांस के अमीर खालिद-जूसेलिन को पांच गेम के संघर्षपूर्ण मुकाबले में हराकर अंतिम चार का टिकट कटाया है। इन खिलाड़ियों की सफलता भारतीय पुरुष खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
भारतीय स्क्वैश का भविष्य और अनाहत सिंह का महत्व
अनाहत सिंह का यह प्रदर्शन भारतीय स्क्वैश के भविष्य के प्रति आशा की किरण है। वह लगातार अपने खेल को बेहतर बनाने में लगी हैं और अब उनकी नजरें खिताब पर हैं। यदि वे सेमीफाइनल जीत जाती हैं, तो यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल होगा। इससे पहले, भारतीय खिलाड़ियों ने जूनियर स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन विश्व चैम्पियनशिप का खिताब अभी तक भारतीय महिलाओं के खाते में नहीं आया है। अनाहत का यह कदम भारतीय स्क्वैश के इतिहास में नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।























