मजदूरों की मेहनत सस्ती, भविष्य महंगा, जानिए किन राज्यों में क्या हाल

गैर-कृषि क्षेत्र में मध्य प्रदेश सबसे नीचे है, जहां मजदूरों को औसतन लगभग 246 रुपये प्रतिदिन ही मिलते हैं। गुजरात और त्रिपुरा में भी निर्माण और कृषि कार्यों में मजदूरी दर बेहद कम बनी हुई है। पूर्वोत्तर के राज्यों—नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश—की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है।

सस्ते श्रम और बढ़ती बेरोजगारी ने खड़े किए बड़े सवाल (फाइल फोटो)

HIGHLIGHTS

  • कौन सा राज्य सबसे ज्यादा बेरोजगार?
  • देश में सस्ते श्रम बनाम बेरोजगारी संकट
  • आंकड़ों ने खोली हकीकत
  • भारत के श्रम बाजार की असली तस्वीर
  • इन राज्यों में बेरोजगारी सबसे ज्यादा

Labour Day 2026: मई दिवस के अवसर पर देशभर में मजदूरों की स्थिति, सस्ते श्रम और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच यह मुद्दा और भी प्रमुख हो गया, लेकिन आंकड़े खुद एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं—जहां एक ओर कुछ राज्यों में मजदूरी बेहद कम है, वहीं दूसरी ओर कई क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तेजी से घट रहे हैं।

कहां मिलते हैं सबसे सस्ते मजदूर?

देश में सस्ते श्रम की बात करें तो मध्य प्रदेश, गुजरात, त्रिपुरा, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य इस सूची में सबसे ऊपर आते हैं। यहां खासतौर पर ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में मजदूरी दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

गैर-कृषि क्षेत्र में मध्य प्रदेश सबसे नीचे है, जहां मजदूरों को औसतन लगभग 246 रुपये प्रतिदिन ही मिलते हैं। गुजरात और त्रिपुरा में भी निर्माण और कृषि कार्यों में मजदूरी दर बेहद कम बनी हुई है। पूर्वोत्तर के राज्यों—नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश—की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है।

इसके विपरीत, दिल्ली, केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मजदूरी अपेक्षाकृत अधिक है, जिससे क्षेत्रीय असमानता साफ झलकती है।

बेरोजगारी: कुछ क्षेत्रों में बेहद गंभीर संकट

पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (2023-24) के अनुसार, देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 15–29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 10% से अधिक है।

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा लक्षद्वीप से सामने आया है, जहां युवा बेरोजगारी दर 36.2% तक पहुंच गई है। महिलाओं की स्थिति और भी खराब है—करीब 79.7% महिलाएं बेरोजगार हैं।

इसके बाद अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (33.6%) और केरल (29.9%) का स्थान है। केरल, जो शिक्षा के लिए जाना जाता है, वहां भी रोजगार की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।

पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में भी हालात चिंताजनक हैं:

  • नागालैंड: 27.4%
  • मणिपुर: 22.9%
  • लद्दाख: 22.2%
  • अरुणाचल प्रदेश: 20.9%

इसके अलावा गोवा, पंजाब और आंध्र प्रदेश भी उच्च बेरोजगारी वाले राज्यों में शामिल हैं।

कहां है सबसे कम बेरोजगारी?

दिलचस्प बात यह है कि जिन राज्यों में मजदूरी कम है, वहीं बेरोजगारी दर भी कई बार कम दिखाई देती है।

  • मध्य प्रदेश: 2.6%
  • गुजरात: 3.1%
  • झारखंड: 3.6%
  • दिल्ली: 4.6%
  • छत्तीसगढ़: 6.3%

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कम मजदूरी पर भी काम उपलब्ध है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और आय स्तर कम है।

महिलाओं के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण

देश में कुल युवा बेरोजगारी दर 10.2% है, लेकिन इसमें लैंगिक अंतर साफ दिखाई देता है। पुरुषों की बेरोजगारी दर 9.8% है, जबकि महिलाओं के लिए यह 11% तक पहुंच जाती है।

यह दर्शाता है कि शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हैं और उन्हें कार्यबल में शामिल होने में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now