RBI का पहला नोट कैसा था, जानिए पूरा इतिहास

History of Indian Banknotes: जानें भारतीय बैंक नोटों का इतिहास—1938 के RBI के पहले ₹5 नोट, आजाद भारत के पहले ₹1 नोट, दशमलव मुद्रा प्रणाली और महात्मा गांधी सीरीज तक का सफर।

1938 में जारी हुआ था RBI का पहला नोट

HIGHLIGHTS

  • भारत के पहले नोट पर अशोक स्तंभ कैसे आया?
  • RBI नोटों के इतिहास की ये बातें चौंका देंगी
  • ब्रिटिश दौर से गांधी सीरीज तक, नोटों का सफर
  • भारतीय नोटों का इतिहास: जानिए बड़े बदलाव

History of Indian Banknotes: भारतीय रुपये का इतिहास देश की आर्थिक व्यवस्था और बदलते राजनीतिक दौर—दोनों से जुड़ा है। आज के नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर, अशोक स्तंभ और अलग-अलग सुरक्षा विशेषताएँ दिखाई देती हैं। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शुरुआती नोटों का रूप इससे काफी अलग था। आइए जानते हैं कि RBI के पहले बैंक नोट से लेकर महात्मा गांधी सीरीज तक भारतीय बैंक नोटों में कैसे बदलाव आया।

RBI की स्थापना और पहला बैंक नोट

भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई। देश के केंद्रीय बैंक के रूप में RBI को मुद्रा जारी करने और मुद्रा प्रबंधन की जिम्मेदारी मिली। हालांकि, बैंक की स्थापना के लगभग तीन साल बाद—जनवरी 1938 में—इसने अपना पहला बैंक नोट जारी किया। यह ₹5 का नोट था।

1938 के इस नोट पर उस समय के ब्रिटिश सम्राट किंग जॉर्ज VI का चित्र छपा था। उस दौर में भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, इसलिए नोटों पर ब्रिटिश शासक का चित्र होना आम बात थी। RBI के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, इसी वर्ष ₹10, ₹100, ₹1,000 और ₹10,000 के नोट भी जारी किए गए। इन नोटों के डिजाइन और मूल्यवर्ग तत्कालीन मुद्रा व्यवस्था की जरूरतों के अनुसार तय किए गए थे।

RBI के पहले गवर्नर सर ऑस्बोर्न स्मिथ ने अपने कार्यकाल में किसी भी बैंक नोट पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसलिए शुरुआती RBI नोटों पर दूसरे गवर्नर सर जेम्स टेलर के हस्ताक्षर थे। यह तथ्य शुरुआती भारतीय नोटों को संग्रहकर्ताओं और मुद्रा इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए खास बनाता है।

आजादी के बाद भारतीय मुद्रा में बदलाव

1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, लेकिन मुद्रा व्यवस्था में बदलाव धीरे-धीरे हुए। आजादी के बाद भी कुछ समय तक पुराने नोट चलन में रहे। इसके बाद 1949 में स्वतंत्र भारत का पहला बैंक नोट जारी किया गया। यह ₹1 का नोट था।

इस नोट में किंग जॉर्ज VI के चित्र की जगह सारनाथ के अशोक स्तंभ को शामिल किया गया। यह बदलाव केवल नोट के डिजाइन तक सीमित नहीं था; इससे स्वतंत्र भारत की पहचान और राष्ट्रीय प्रतीकों को मुद्रा पर स्थान मिला। अशोक स्तंभ का प्रतीक आज भी भारत की सरकारी पहचान का अहम हिस्सा है।

₹1 के नोट की एक खास बात यह है कि इसे RBI के बजाय भारत सरकार जारी करती है। हालांकि, यह भारतीय मुद्रा व्यवस्था का हिस्सा है और इस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती नोटों में राष्ट्रीय प्रतीकों को प्रमुखता देने की प्रक्रिया ने आगे चलकर भारतीय नोटों के डिजाइन को भी प्रभावित किया।

रुपये और पैसे की दशमलव प्रणाली

भारतीय मुद्रा के इतिहास में एक बड़ा बदलाव 1957 में आया, जब भारत ने दशमलव प्रणाली अपनाई। इससे पहले एक रुपये में 16 आने होते थे। एक आने में चार पैसे और एक पैसे में तीन पाई मानी जाती थीं। इस पुरानी गणना के अनुसार, एक रुपये में कुल 192 पाई होती थीं।

दशमलव प्रणाली लागू होने के बाद एक रुपये को 100 पैसे में बांट दिया गया। इससे हिसाब-किताब सरल हुआ और मुद्रा को आधुनिक प्रणाली के अनुरूप बनाया गया। शुरुआत में नए पैसे को पुराने पैसे से अलग पहचानने के लिए “नया पैसा” कहा जाता था। बाद में “नया” शब्द हट गया और उसे केवल “पैसा” कहा जाने लगा।

इस बदलाव ने रोजमर्रा के लेन-देन, कीमतों की गणना और लेखांकन को अधिक आसान बनाया। भारतीय मुद्रा प्रणाली के विकास में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

महात्मा गांधी की तस्वीर वाले नोट

महात्मा गांधी की तस्वीर भारतीय बैंक नोटों पर पहली बार 1969 में दिखाई दी। यह नोट गांधीजी की जन्म शताब्दी के अवसर पर जारी किया गया था और इसे स्मारक नोट के रूप में देखा जाता है। उस समय यह सभी आम नोटों पर गांधीजी की तस्वीर लगाने की शुरुआत नहीं थी।

1996 में RBI ने महात्मा गांधी सीरीज के बैंक नोटों की शुरुआत की। इसके बाद आम चलन के नोटों पर गांधीजी का चित्र प्रमुखता से शामिल किया जाने लगा। इस सीरीज के नोटों में डिजाइन के साथ-साथ सुरक्षा विशेषताओं पर भी ध्यान दिया गया, ताकि नकली नोटों की पहचान और रोकथाम में मदद मिल सके।

समय के साथ नोटों के डिजाइन, आकार, रंग और सुरक्षा फीचर्स में बदलाव हुए हैं। फिर भी भारतीय नोटों की पहचान में गांधीजी का चित्र, राष्ट्रीय प्रतीक और भारतीय भाषाओं में मूल्यवर्ग जैसी विशेषताएँ अहम बनी हुई हैं।

Sandhya Samay News

संध्या समय न्यूज़ – आपके विश्वास की आवाज़ संध्या समय न्यूज़ की स्थापना वर्ष 2018 में की गई, जो कि MSME में विधिवत रूप से पंजीकृत है। हमारा उद्देश्य समाज तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद समाचार पहुँचाना है। हम देश-प्रदेश की ताज़ा खबरों, सामाजिक मुद्दों, और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को आपके सामने सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करते हैं। हम अपने सभी दर्शकों और पाठकों का दिल से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें लगातार देखा, समझा और अपना विश्वास बनाए रखा। आपकी यही सराहना और समर्थन हमें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। संध्या समय न्यूज़ हमेशा सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा के मूल्यों पर कार्य करता रहेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now