ऋषी तिवारी
राष्ट्रीय राजधानी में आज श्रमिक वर्ग और किसानों की संयुक्त ताकत का एक शक्तिशाली दृश्य देखने को मिला। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के मंच एवं संयुक्त किसान मोर्चा के संयुक्त आह्वान पर जंतर-मंतर पर ‘मजदूर-किसान संसद’ का भव्य आयोजन किया गया। इस विशाल सभा में केंद्र सरकार की कथित कॉर्पोरेट पक्षधर नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई, साथ ही मजदूरों और किसानों के ज्वलंत मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श के बाद देशव्यापी आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया गया।
सरकार की नीतियों पर भारी हमला
मजदूर-किसान संसद को संबोधित करते हुए सीटू (CITU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड सुदीप दत्ता ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। श्री दत्ता ने कहा, “वर्तमान सरकार की नीतियां देश के आम आदमी के लिए नहीं, बल्कि मुट्ठी भर बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हितों को पूरा करने के लिए तैयार की जा रही हैं। मजदूरों और किसानों के संवैधानिक अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है।” उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि श्रम कानूनों में की गई तब्दीलियां और किसानों के मुद्दों के प्रति उदासीनता देश की अर्थव्यवस्था को विनाश की ओर ले जा रही है। उन्होंने देशभर के मजदूरों और किसानों से अपील की कि वे अपने अस्तित्व की लड़ाई को लेकर सड़कों पर उतरें और एक व्यापक जनांदोलन खड़ा करें।
विभिन्न संगठनों ने दिखाई एकजुटता
इस अवसर पर विभिन्न मजदूर और किसान संगठनों के राष्ट्रीय नेताओं ने भी मंच संभाला। सभी वक्ताओं ने ‘मजदूर-किसान एकता’ को सरकार की मनमानी नीतियों को रोकने की सबसे बड़ी ताकत बताया और संघर्ष को और तीखा करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में गौतम बुध नगर के श्रमिक और किसान नेताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा व रामस्वारथ के नेतृत्व में, जनवादी महिला समिति की रेखा चौहान, शीला पांडे, गुड़िया देवी व सरोज देवी के साथ-साथ किसान सभा के नेता डॉ. रुपेश वर्मा, अजय पाल भाटी, संदीप भाटी और अजब सिंह भाटी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने नारों से जंतर-मंतर को गुंजाते हुए सरकार का घेराव किया।
खाड़ी संकट और ‘संख्या के डर’ ने बदली इंडिया ब्लॉक की रणनीति
आगे की रणनीति और बड़े ऐलान
संसद में हुई रणनीतिक बैठक के बाद सीटू जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा ने आगामी कार्ययोजना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि संगठन अब सिर्फ विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनजागरण के लिए गांव-गांव और शहर-शहर जाएंगे। इसके तहत तीन बड़े कार्यक्रमों की घोषणा की गई है कि 23 मार्च 2026 शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत की वर्षगांठ पर देश भर में ‘साम्राज्यवाद विरोधी दिवस’ मनाया जाएगा। 1 अप्रैल 2026 मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने और अन्य मांगों की पूर्ति के लिए देशव्यापी ‘काला दिवस’ (Black Day) मनाया जाएगा। आने वाले दिनों में देश के सभी राज्यों में महापंचायतों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मजदूरों और किसानों को उनकी मांगों के समर्थन में संगठित कर एक विशाल आंदोलन के लिए तैयार किया जाएगा।

























