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अब कचरा नहीं बोझ, बनेगा दौलत: महाराष्ट्र की बड़ी पहल

सीएम फडणवीस ने बताया कि यहां बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना तैयार की गई है। नगरपालिका कचरा जो प्रतिदिन 1200 टन प्रति दिन (TPD) है, उसके निपटान के लिए यहां प्लांट तैयार किया गया है। यह आंकड़ा खुद में काफी बड़ा है।

नागपुर में कचरे से बनेगी ऊर्जा, CM फडणवीस ने शुरू किया देश का पहला ड्राई डाइजेशन प्लांट

HIGHLIGHTS

  • ऊर्जा संकट का समाधान बनेगा नागपुर मॉडल
  • नागपुर में पैदा होगी गैस और जैविक खाद
  • देश का पहला ड्राई डाइजेशन प्लांट शुरू
  • भारत के लिए गेमचेंजर साबित होगी यह तकनीक
  • ऊर्जा संकट के बीच महाराष्ट्र की बड़ी पहल

Maharashtra News: महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने नागपुर में एक ऐसी ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन किया है, जिसे न केवल महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह वह परियोजना है जो शहर के कचरे को धन (ऊर्जा) में बदल रही है और आने वाले समय में ऊर्जा संकट से निपटने का एक सशक्त मॉडल साबित हो सकती है। इस अवसर पर सीएम फडणवीस ने परियोजना की तकनीकी और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की और साथ ही महाराष्ट्र में बढ़ती सीएनजी की कीमतों पर अपनी बात रखी और इसके पीछे की वैश्विक वजहों को समझाया।

देश का पहला ‘ड्राई डाइजेशन’ प्लांट

नागपुर में तैयार इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यह देश का पहला ऐसा प्लांट बना है, जहां ‘ड्राई डाइजेशन’ (सूखा पाचन) पद्धति का उपयोग करके कचरे से ऊर्जा की पुनर्प्राप्ति (Energy Recovery) की जा रही है। सीएम फडणवीस ने इसे एक बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए कहा कि यह तकनीक भारत के लिए बहुत अच्छी साबित होने वाली है।

सीएम फडणवीस ने बताया कि यहां बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना तैयार की गई है। नगरपालिका कचरा जो प्रतिदिन 1200 टन प्रति दिन (TPD) है, उसके निपटान के लिए यहां प्लांट तैयार किया गया है। यह आंकड़ा खुद में काफी बड़ा है। नागपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में प्रतिदिन इतनी बड़ी मात्रा में कचरे का निस्तारण एक बड़ी चुनौती होता है। पारंपरिक तरीकों में कचरे को डंप करने से जमीन और पर्यावरण दोनों का नुकसान होता है, लेकिन इस नई तकनीक से कचरा केवल गायब न कर उसका उत्पादन के लिए किया जा रहा है।

सीएम फडणवीस ने बताया कि इससे बड़े पैमाने पर गैस का निर्माण होगा, खाद तैयार होगी…” यह इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खूबी है। ड्राई डाइजेशन प्रक्रिया के माध्यम से नमी वाले कचरे को भी आसानी से प्रोसेस किया जा सकता है और उससे बायोगैस (Biogas) या सीएनजी (CNG) जैसा ईंधन तैयार किया जा सकता है। इससे निकलने वाली गैस का उपयोग वाहनों को चलाने या औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। वहीं, शेष बचा हुआ कचरा उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (Organic Fertilizer) के रूप में किसानों के काम आएगा। यह एक पूर्ण ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ (कचरे से धन) का चक्र है।

तकनीक का महत्व और भविष्य

सीएम फडणवीस ने जोर देकर बताया कि यह एक प्रकार से देश का पहला प्लांट है जहां कचड़े के द्वारा ड्राई डाइजेशन की पद्धति से ऊर्जा पुनर्प्राप्ति की जा रही है। ‘ड्राई डाइजेशन’ तकनीक पानी की कम खपत वाली तकनीक है, जो कि भारत जैसे देशों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। इसमें गीले कचरे को भी सूखी प्रक्रिया के तहत ऊर्जा में बदला जाता है। सीएम फडणवीस का दावा है कि यह तकनीक देश के लिए बहुत अच्छी साबित होने वाली है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो देश के अन्य शहर भी इसे अपना सकते हैं, जिससे कचरा प्रबंधन की समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है और ऊर्जा की कमी को भी पूरा किया जा सकता है।

सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी

बता दें कि इस खुशखबरी के बीच, महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई और अन्य हिस्सों में सीएनजी की बढ़ती कीमतों को लेकर जनता में चिंता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि यह स्थिति राज्य या देश विशेष की नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक संकट है।

हम सभी जानते हैं कि दुनिया में ऊर्जा का संकट है। विशेष रूप से ईंधन का संकट हर जगह है। सीएम फडणवीस ने बताया कि यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकट अंतरराष्ट्रीय सारे देशों में यह दाम बढ़े हैं। गत वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, जिसका असर सीधे आम आदमी पर पड़ रहा है।

आपूर्ति श्रृंखला और भविष्य की उम्मीद

सीएम फडणवीस ने स्पष्ट किया कि ईंधन की आपूर्ति को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए यह वृद्धि अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि हमें आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखना है तो हमें ज्यादा दाम भरने होंगे। यह एक कठोर आर्थिक सच्चाई है। सरकारें जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार से गैस और तेल खरीदती हैं, तब तक वैश्विक दामों का असर स्थानीय कीमतों पर पड़ेगा। आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए, इसलिए बढ़ती लागत का बोझ कुछ हद तक उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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