World Conflict Deaths Report : दुनिया भर में जारी युद्ध और सैन्य संघर्षों ने हाल के वर्षों में लाखों लोगों की जान ले ली है। मिसाइल हमले, हवाई बमबारी, जमीनी लड़ाइयों और नागरिक लक्ष्यों पर हमले इन संघर्षों की मुख्य विशेषताएं हैं। इन घटनाओं का प्रभाव न केवल क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ा है, बल्कि मानव जीवन पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। खासतौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष, ईरान-इजरायल टकराव और मध्य पूर्व के अन्य संघर्षों में मृतकों की संख्या में वृद्धि देखी गई है।
ईरान में हुई मौतें
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद, ईरान में मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल मध्य तक ईरान में कुल 3,468 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 1,460 नागरिक और 2,008 सैन्यकर्मी शामिल हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट में मृतकों की संख्या 3,636 बताई गई है। इन आंकड़ों में नागरिक, बच्चे, सैन्यकर्मी और अज्ञात पहचान वाले लोग शामिल हैं। इंटरनेट बंद और सरकारी प्रतिबंधों के कारण इन आंकड़ों में वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है।

इजरायल में हताहतों की संख्या
18 जून तक, इजरायल सरकार ने बताया कि कुल 60 लोग मारे गए हैं। इनमें 29 नागरिक, 31 सैनिक और एक गलती से हुई मौत शामिल है। विशेष रूप से, ईरानी मिसाइल हमलों में 21 नागरिकों की मौत हुई है। इससे पता चलता है कि संघर्ष का स्तर नागरिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है।
मध्य पूर्व के अन्य देशों का हाल
ईरान की प्रतिक्रिया में पड़ोसी देशों में भी संघर्ष तेज हुआ है। संयुक्त अरब अमीरात में 13 मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि इराक में 100 से अधिक मौतें हुई हैं। इनमें से अधिकांश, यानी कम से कम 80 लोग, ईरान समर्थित पैरामिलिट्री समूहों के सदस्य हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई है। पेंटागन के अनुसार, 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, जिनमें से 7 ईरानियों के हमलों में और 6 इराक में एक रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटना के कारण मारे गए। इसके अलावा, समुद्री इलाकों में 14 नाविकों की जान भी गई है।

सबसे घातक युद्ध: रूस-यूक्रेन संघर्ष
2025 में, स्वीडन के उप्साला कॉन्फ्लिक्ट डेटा प्रोग्राम (UCDP) के अनुसार, विश्व में कुल 65 सक्रिय संघर्ष दर्ज किए गए हैं, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे अधिक संख्या है। इन संघर्षों में लगभग 2,44,600 लोगों की मौत हुई है।
विशेष रूप से, रूस-यूक्रेन युद्ध को सबसे घातक माना गया है। इस युद्ध में लगभग 77,700 रूसी सैनिक और 14,000 यूक्रेनी नागरिक मारे गए हैं, जो कुल मौतों का 62 प्रतिशत हिस्सा है। यह संख्या युद्ध के दौरान हुई मौतों का बहुत बड़ा हिस्सा है और इसके प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता को भी प्रभावित कर रहा है।
दूसरा सबसे घातक संघर्ष: इज़राइल-हमास
इजरायल-हमास संघर्ष, जो अब तक जारी है, में लगभग 14,400 लोगों की मौत हुई है। यह संघर्ष भी व्यापक स्तर पर नागरिक जीवन को प्रभावित कर रहा है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बना हुआ है।
तीसरे नंबर पर: सूडान का संघर्ष
सूडान का संघर्ष, जिसमें सरकारी बलों और रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच लड़ाई चल रही है, में करीब 12,200 लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा केवल सरकारी और रैपिड सपोर्ट फोर्स के बीच की लड़ाई को दर्शाता है, जबकि नागरिकों के खिलाफ हिंसा का आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है।
विभिन्न रिपोर्टें और आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि वर्तमान युद्ध और संघर्षों में सबसे अधिक मौतें रूस-यूक्रेन युद्ध में हुई हैं। यह संघर्ष न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक है, बल्कि मानव जीवन पर भी गहरा असर डाल रहा है। इसके अलावा, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में भी संघर्षों ने भारी जनहानि की है। इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि संघर्षों का स्तर और उनकी गंभीरता कितनी भयावह हो सकती है, यदि इन पर नियंत्रण नहीं पाया गया। मानवता के सामने यह चुनौती है कि युद्धों को समाप्त कर शांति स्थापित की जाए और इन संघर्षों में मारे गए लोगों की याद में स्थायी शांति का मार्ग निकाला जाए।
























