Delhi News: आप पार्टी (AAP) ने पार्टी छोड़ने वाले अपने सात राज्यसभा सांसदों के खिलाफ बड़ा राजनीतिक और कानूनी कदम उठाया है। इस कार्रवाई के केंद्र में हैं संजय सिंह, जिन्होंने राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति को एक औपचारिक याचिका भेजकर इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।
इस विवाद में प्रमुख नाम राघव चड्ढा का भी शामिल होना मामले को और गंभीर बना देता है। पार्टी का आरोप है कि इन सातों सांसदों ने दल बदलकर भारतीय जनता पार्टी में विलय का रास्ता अपनाया, जो संविधान की 10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) का उल्लंघन है।
“सबकी सदस्यता खत्म होगी” — संजय सिंह
बता दें कि रविवार (26 अप्रैल) को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सिंह ने कहा कि संवैधानिक विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से सलाह लेने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इन सांसदों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कपिल सिब्बल और पीडीटी आचार्य जैसे विशेषज्ञों ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया है।
उपराष्ट्रपति से त्वरित सुनवाई की मांग
संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने उपराष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि इस याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाए और संविधान के अनुसार न्यायपूर्ण फैसला दिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर निर्णय में देरी होती है, तो पार्टी कानूनी रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगी।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला
मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रमों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप कर महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी संविधान सर्वोपरि रहेगा और न्याय मिलेगा।

























