राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों पर संकट, आप पार्टी ने दायर की याचिका

Delhi News: प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सिंह ने कहा कि संवैधानिक विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से सलाह लेने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इन सांसदों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कपिल सिब्बल और पीडीटी आचार्य जैसे विशेषज्ञों ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया है।

आप पार्टी vs बागी सांसद: अब फैसला उपराष्ट्रपति के हाथ

HIGHLIGHTS

  • दल बदलने वाले सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग
  • संजय सिंह का वार—“सातों सांसदों की सदस्यता होगी रद्द”
  • राज्यसभा में बढ़ेगा घमासान, आप पार्टी ने उपराष्ट्रपति को भेजी याचिका
  • दल बदल पर सख्ती: आप पार्टी ने उठाया संवैधानिक मुद्दा
  • राघव चड्ढा सहित 7 सांसदों पर लटकी सदस्यता रद्द होने की तलवार

Delhi News: आप पार्टी (AAP) ने पार्टी छोड़ने वाले अपने सात राज्यसभा सांसदों के खिलाफ बड़ा राजनीतिक और कानूनी कदम उठाया है। इस कार्रवाई के केंद्र में हैं संजय सिंह, जिन्होंने राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति को एक औपचारिक याचिका भेजकर इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

इस विवाद में प्रमुख नाम राघव चड्ढा का भी शामिल होना मामले को और गंभीर बना देता है। पार्टी का आरोप है कि इन सातों सांसदों ने दल बदलकर भारतीय जनता पार्टी में विलय का रास्ता अपनाया, जो संविधान की 10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) का उल्लंघन है।

“सबकी सदस्यता खत्म होगी” — संजय सिंह

बता दें कि रविवार (26 अप्रैल) को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सिंह ने कहा कि संवैधानिक विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से सलाह लेने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इन सांसदों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कपिल सिब्बल और पीडीटी आचार्य जैसे विशेषज्ञों ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया है।

उपराष्ट्रपति से त्वरित सुनवाई की मांग

संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने उपराष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि इस याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाए और संविधान के अनुसार न्यायपूर्ण फैसला दिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर निर्णय में देरी होती है, तो पार्टी कानूनी रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगी।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला

मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रमों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप कर महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी संविधान सर्वोपरि रहेगा और न्याय मिलेगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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