UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक समीकरणों को नई दिशा दे सकने वाला ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में ‘जातिगत जनगणना’ (Caste Census) करवाई जाने जा रही है। इस बड़े काम को अंजाम देने के लिए प्रशासनिक मशीनरी तेजी से पेचदार तैयारियों में जुट गई है।
जनगणना निदेशक और मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने इस संबंध में बड़ा अपडेट देते हुए बताया कि पूरी प्रक्रिया को दो विशेष चरणों में पूरा किया जाएगा।
जानिए कैसे होगा पूरा प्लान?
इस ऐतिहासिक जनगणना को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है:
- पहला चरण (हाउस लिस्टिंग): इस चरण में घरेलू स्तर (Household Level) पर डेटा जुटाया जाएगा। यहां परिवारों की बुनियादी जानकारी और मकानों की पूरी लिस्ट तैयार की जाएगी।
- दूसरा चरण (व्यक्तिगत डेटा): यह सबसे अहम और संवेदनशील चरण होगा, जो फरवरी माह में शुरू होगा। इस दौरान लोगों से सीधे तौर पर उनकी जाति के बारे में जानकारी ली जाएगी।
इतिहास में पहली बार: क्यों खास है ये जनगणना?
शीतल वर्मा ने स्पष्ट किया कि फरवरी में होने वाला यह दूसरा चरण आजादी के बाद से अब तक का अपनी तरह का पहला कदम है। अब तक देश में जो भी जनगणना हुई, उसमें जातियों का विवरण इस तरह से व्यक्तिगत स्तर पर शामिल नहीं किया गया था। केंद्र सरकार की नई नीति के तहत इस बार जातिगत आंकड़ों को जनगणना का अहम हिस्सा बनाया गया है।
एसओपी का इंतजार, डेटा सुरक्षा पर जोर
हालांकि तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन अभी इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का इंतजार है। सूत्रों के अनुसार, जातिगत जनगणना कैसे की जाएगी और इसके दौरान किन-किन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा, इसके लिए SOP का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।
डेटा की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार की निर्धारित गाइडलाइन के तहत ही होगी। व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करते समय नागरिकों की प्राइवेसी (गोपनीयता) का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाएगा।
यूपी की राजनीति के लिए क्यों है ‘गेम चेंजर’?
उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े राज्य में जातिगत जनगणना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में गर्मी है। आने वाले समय में ये आंकड़े राजनीतिक दलों के ‘मंडल-कमंडल’ के समीकरण को नए सिरे से तय कर सकते हैं। फरवरी में शुरू होने वाले इस दूसरे चरण पर इस समय प्रशासन और जनता दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। यह जनगणना यूपी की आबादी के असली जातीय आंकड़े सामने लाकर राज्य के सामाजिक ढांचे की एक सच्ची तस्वीर पेश करेगी।


























