संध्या समय न्यूज
नागपुर। अपनी जड़ों से जुड़ने की तड़प और जन्म देने वाली मां को एक बार देखने की चाहत किसी व्यक्ति को सात समंदर पार खींच लाती है। इसी वास्तविक कहानी का साक्षी बना महाराष्ट्र का नागपुर, जहां नीदरलैंड के शहर हीम्स्टेडे (Heemstede) के मेयर फाल्गुन बिन्नेंडिज्क 40 साल बाद अपनी असली पहचान और मां की तलाश में लौटे हैं।
जन्म की कहानी: समाज के डर से टूटा रिश्ता
बता दें कि 10 फरवरी 1985 को नागपुर मेडिकल कॉलेज में जन्मे फाल्गुन की जिंदगी का पहला पड़ाव बहुत ही कठिन था। उनकी मां उस समय मात्र 21 वर्ष की थीं और अविवाहित होने के कारण सामाजिक लोक-लाज और बदनामी के डर से घिरी हुई थीं। असहाय स्थिति में उन्होंने तीन दिन के अपने बेटे को नागपुर की संस्था ‘मातृसेवा संघ’ (MSS) को सौंप दिया। भाग्य ने तब संवारा जब एक डच दंपति ने उन्हें गोद लिया और वे नीदरलैंड चले गए, जहां आज वे एक सफल जीवन और राजनीतिक सम्मान (मेयर पद) प्राप्त कर चुके हैं।
महाभारत के ‘कर्ण-कुंती’ से प्रेरणा
अपनी सफलता के बावजूद फाल्गुन के दिल में मां के लिए कोई कड़वाहट नहीं है, बल्कि प्रेम और सम्मान है। वे कहते हैं कि महाभारत में कर्ण और कुंती की कहानी ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। दुनिया का हर ‘कर्ण’ अपनी ‘कुंती’ से मिलने का हकदार है।” इसी भावना को दर्शाते हुए उन्होंने अपनी बेटी का नाम भी अपनी जैविक मां के नाम पर रखा है।
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40 साल बाद मिला नाम देने वाला हाथ
यह फाल्गुन की तीसरी भारत यात्रा है, लेकिन यह अन्य यात्राओं से बेहद खास है। इस दौरान उनकी मुलाकात मातृसेवा संघ की पूर्व अधीक्षिका मंगला भुसारी से हुई। यह वही मंगला भुसारी हैं, जिन्होंने 40 साल पहले उस अनाथ बच्चे का नामकरण ‘फाल्गुन’ किया था। अपने नाम देने वाली मां से मिलकर वे काफी भावुक हुए, हालांकि असली मां का पता अब भी एक पहेली बनी हुई है।
रिकॉर्ड्स में अधूरा पता बना सबसे बड़ी बाधा
फाल्गुन के पास जन्मतिथि और मां का नाम जरूर है, लेकिन उस वक्त सामाजिक भय के चलते मां ने अस्पताल के रिकॉर्ड में अपना सही पता नहीं लिखवाया था। इस वजह से नागपुर के जिला अधिकारी, नगर निगम आयुक्त और महिला व बाल कल्याण विभाग की टीमें 40 साल पुराने दस्तावेजों को खंगालने में जुटी हैं। अधूरी जानकारी के कारण पुलिस और प्रशासन को महिला की तलाश में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
मां के नाम संदेश: “मैं बोझ नहीं, बस एक बेटा हूं”
अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ नागपुर पहुंचे फाल्गुन ने मीडिया के माध्यम से अपनी मां को एक बेहद संवेदनशील संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मैं अपनी मां पर कोई बोझ नहीं बनना चाहता। मैं बस उन्हें एक बार मिलकर यह बताना चाहता हूं कि उनका बेटा आज बहुत खुश, सुरक्षित और सफल है। मैं सिर्फ उन्हें यह सुकून देना चाहता हूं कि उनके उस फैसले के बावजूद मैंने अपनी जिंदगी अच्छे से जी रहा हूं।

























