राखी बांधकर ब्रह्माकुमारीज ने दिया आत्मिक सुरक्षा का अनोखा संदेश

कार्यक्रम के समापन चरण में एक बहुत ही भावुक पल आया जब ब्रह्माकुमारीज की बहनों ने उपस्थित सभी लोगों के कलाई पर राखी बांधी। इस राखी ने किसी औपचारिक रिवाज के बजाय 'आत्मिक सुरक्षा' और 'शुभकामनाओं' के बंधन का प्रतीक दिया।

तकनीक की दौड़ में खोया सुकून, नोएडा में मिला खुद से जुड़ने का रास्ता

HIGHLIGHTS

  • चांद तक पहुंचा इंसान, मगर खुद से क्यों दूर हुआ?
  • दूसरों के व्यवहार नहीं, अपनी सोच से तय होती है खुशी
  • शुद्ध प्रेम का राज: बदलना नहीं, स्वीकार करना सीखें
  • जब ध्यान ने थामा मन, तनाव और चिंता हुई दूर

आज के दौर में तकनीक और भौतिकवाद की इस अनंत दौड़ में इंसान बाहरी दुनिया तो बहुत कुछ हासिल कर रहा है, लेकिन एक अजीब सी खालीपन उसे अंदर से खोखला कर रही है। घड़ी की सुइयों के साथ भागता हुआ आधुनिक मानव, अपनी ही आंतरिक शांति से दूर होता जा रहा है। इसी कड़वी हकीकत और मानसिक व्यस्तता के बीच ‘खुद से जुड़ने’ का एक अनूठा और व्यावहारिक संदेश देने के लिए ब्रह्माकुमारीज, सेक्टर-51, नोएडा द्वारा एक विशेष आध्यात्मिक आयोजन किया गया।

यह अनोखा कार्यक्रम रविवार को गार्डेनिया ग्लोरी, सेक्टर-46 स्थित क्लब हाउस में आयोजित हुआ, जिसका केंद्रीय विषय “Pure Love and Inner Power” (शुद्ध प्रेम और आंतरिक शक्ति) था। इस आध्यात्मिक गुफा में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और अपने जीवन की थकान को एक नई ऊर्जा के साथ धोया।

चिकित्सकों का नजरिया: मूल्यों की अनमोल धरोहर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सरकारी अस्पताल, नोएडा के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. आलोक वर्मा ने चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से भी इस विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से बीमार होता है, तो दवाइयां काम करती हैं, लेकिन आज के दौर की ज्यादातर बीमारियां मानसिक तनाव और चिंता से पैदा हो रही हैं। ऐसे में जीवन में सही मूल्यों (Values) को स्थापित करना कोई धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्यवर्धक आदत बन चुका है। उन्होंने लोगों को अपने आचरण और सोच पर ध्यान देने की सलाह दी।

विचारों की शक्ति: आपकी सोच है आपकी नियति

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता बीके फाल्गुनी (मानेसर केंद्र) ने अपने संबोधन में आधुनिक जीवनशैली की कड़वी सच्चाई को सामने रखा। उन्होंने कहा, “हमने चांद तक की यात्रा कर ली है, हमारे पास सब कुछ है, लेकिन एक चीज खो गई है और वो है ‘खुद का परिचय’।”

बीके फाल्गुनी ने विस्तार से समझाया कि हमारे विचार ही हमारी मानसिक स्थिति के निर्माता हैं। जब मन लगातार भविष्य की चिंता, वर्तमान में क्रोध, दूसरों से अनुचित अपेक्षाओं और नकारात्मकता के चक्रव्यूह में फंसा रहता है, तो व्यक्ति की आंतरिक बैटरी धीरे-धीरे डिस्चार्ज होती जाती है।

उन्होंने एक बहुत ही प्रभावशाली लाइन कही— “मेरी स्थिति मेरी सोच तय करती है, किसी दूसरे का व्यवहार नहीं।” उन्होंने समझाया कि हम अक्सर अपनी खुशी का रिमोट कंट्रोल दूसरों के हाथ में दे देते हैं। अगर कोई हमसे अच्छा बोले, तो हम खुश, और अगर कोई बुरा बोल दे, तो हम तबाह हो जाते हैं। भावनात्मक आत्मनिर्भरता उस स्थिति को कहते हैं जहां आपकी शांति दूसरों के व्यवहार से प्रभावित नहीं होती।

शुद्ध प्रेम: बदलने की जद्दोजहद नहीं, स्वीकार करने की कला

“प्योर लव” शब्द पर प्रकाश डालते हुए बीके फाल्गुनी ने रिश्तों की एक नई परिभाषा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर हमारा प्रेम इस तरह का होता है कि हम दूसरे व्यक्ति को अपनी इच्छाओं के पिंजरे में कैद करना चाहते हैं। लेकिन सच्चा और शुद्ध प्रेम किसी को बदलने का प्रयास नहीं करता, बल्कि उसे उसके हाल पर स्वीकार करता है।

आज के दौर में ‘सेल्फ-लव’ (आत्म-प्रेम) का जमकर प्रचार हो रहा है, लेकिन अक्सर इसे स्वार्थपरता से जोड़ दिया जाता है। बीके फाल्गुनी ने इस मिथ को तोड़ते हुए कहा कि असली आत्म-प्रेम वह नहीं है कि आप अपनी इच्छाओं की पूर्ति करें, बल्कि असली आत्म-प्रेम यह है कि व्यक्ति खुद को भीतर से इतना शक्तिशाली, शुद्ध और मजबूत बनाए कि बाहरी परिस्थितियां उसे न तोड़ सकें। जब आप खुद से प्यार करेंगे (अर्थात् अपनी ऊर्जा को संभाल कर रखेंगे), तभी आप दूसरों को भी निस्वार्थ भाव से शुभकामनाएं और प्रेम दे सकेंगे।

संगीत और ध्यान से आत्मा को मिली ठंडक

थ्योरी के साथ-साथ इस कार्यक्रम में व्यावहारिक अनुभव को भी विशेष स्थान दिया गया। डॉ. सुचित्रा के मधुर और आत्मीय गीतों ने पूरे वातावरण को एक अलग ही आध्यात्मिक और भावपूर्ण रंग में डुबो दिया। इसके बाद बीके लीना ने ‘निर्देशित राजयोग ध्यान’ (Guided Rajyog Meditation) का सत्र कराया।

उनकी शांत और गहरी आवाज़ के साथ आंखें बंद करने पर, उपस्थित लोगों ने ऐसा अनुभव किया जैसे दिमाग का हर एक तनावपूर्ण दबाव धीरे-धीरे गायब हो रहा है। इस ध्यान सत्र ने लोगों को तात्कालिक मानसिक शांति और गहरे विश्रांति का अहसास कराया, जो आज के व्यस्त जीवन में एक तरह से ‘मेडिटेशन थेरेपी’ के रूप में काम किया।

सांस्कृतिक रंग और भाईचारे का अनूठा संदेश

कार्यक्रम में सिर्फ व्याख्यान ही नहीं हुए, बल्कि बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया गया एक जोरदार नृत्य ने पूरे माहौल में जवानी और खुशी की ऊर्जा भर दी। वहीं, युवतियों द्वारा की गई प्रेरणादायक स्किट (नाटक) ने आधुनिक जीवन की समस्याओं और उनके आध्यात्मिक समाधान को बहुत ही सरल और प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।

कार्यक्रम के समापन चरण में एक बहुत ही भावुक पल आया जब ब्रह्माकुमारीज की बहनों ने उपस्थित सभी लोगों के कलाई पर राखी बांधी। इस राखी ने किसी औपचारिक रिवाज के बजाय ‘आत्मिक सुरक्षा’ और ‘शुभकामनाओं’ के बंधन का प्रतीक दिया। इसके बाद सभी को सात्विक (शुद्ध और स्वस्थ) भोजन तथा प्रसाद वितरित किया गया, ताकि शरीर और मन दोनों की शुद्धि हो सके।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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