एक चौंकाने वाला मामला जहां रिश्तों की मर्यादा को ताक पर रखकर एक पति की जान ले ली गई और उसकी सजा उसकी ही नाबालिग बेटी ने दिलाई। ताजगंज क्षेत्र में साल 2021 में एक जूते के कारखाने के मालिक की निर्मम हत्या का मामला आखिरकार उस नतीजे पर पहुंचा है जहां अपराधियों को कड़ी सजा मिली है। इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मृतक की उसी बेटी ने अदालत में अपनी मां के खिलाफ गवाही दी, जिसने पूरे मामले की कहानी ही पलट दी।
विशेष न्यायाधीश शिव कुमार की अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए मृतक की पत्नी प्रेमिता निवासी सिद्धार्थ नगर गोबर चौकी, उसके प्रेमी रविकांत राजपूत और प्रेमी के भाई शशिकांत राजपूत (निवासी नगला केवल, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद) को दोषी करार दिया। अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, इन तीनों पर कुल दो लार अस्सी हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
ससुर की शिकायत ने खोला था राज
इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत आठ जून, 2021 की सुबह हुई थी। ताजगंज थाने में मृतक के पिता सुरेश चंद ने एक रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि सुबह उन्हें फोन पर उनके बेटे नरेश कुमार की हत्या की जानकारी मिली। जब वह अपने परिजनों के साथ नगला कली स्थित ‘पुष्पांजलि होम्स’ पहुंचे, तो वहां का नजारा हृदयविदारक था। घर के पीछे एक खाली प्लॉट में नरेश का शव एक बोरे में बंधा हुआ मिला। सुरेश चंद ने शुरू से ही अपनी बहू प्रेमिता पर ही संदेह जताया था, क्योंकि घर के हालात कुछ ठीक नहीं लग रहे थे।
राजनीतिक गतिविधियों ने दी थी हत्या को अंजाम
पुलिस के जांच में जैसे-जैसे परतें खुलती गईं, प्रेमिता के अवैध संबंधों का खुलासा हुआ। प्रेमिता और उसके प्रेमी रविकांत राजपूत एक ही राजनीतिक दल से जुड़े हुए थे। कार्यक्रमों और गतिविधियों के दौरान इन दोनों के बीच काफी नजदीकियां आ गई थीं। जब नरेश कुमार को इस बात का पता चला तो उसने इसका कड़ा विरोध किया। इसी विरोध और रोक के चलते प्रेमिता और रविकांत ने मिलकर नरेश को रास्ते से हटाने की साजिश रची। इस साजिश में रविकांत के भाई शशिकांत ने भी पूरा साथ दिया।
खून से लथपथ कमरा और फॉरेंसिक साक्ष्य
जब पुलिस ने घटनास्थल की जांच की, तो कमरे की दीवारों और फर्श पर खून के धब्बे मिले। कमरे का सामान बुरी तरह बिखरा हुआ था, जिससे लगा कि जमीन पर खूनी संघर्ष हुआ था। शव के पास से पुलिस ने खून से सनी एक ईंट और आधी खुली शराब की बोतल बरामद की।
सबसे अहम साक्ष्य शव से लगभग 100 मीटर दूर मिला। वहां एक बोरा पड़ा था, जिसके अंदर एक बेडशीट, तकिया, दस्ताने (ग्लव्स) और खून से सने हुए कपड़े थे। ये सारी चीजें विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजी गईं, जहां इनकी रिपोर्ट अभियोजन के लिए सबसे मजबूत हथियार साबित हुई। इसके अलावा, प्रेमिता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल (CDR) खींची गई, जिसमें स्पष्ट रूप से पता चला कि वह घटना से पहले और बाद में अपने प्रेमी रविकांत के साथ लगातार संपर्क में थी। इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
10 साल की बच्ची बनी सबसे बड़ी गवाह
इस पूरे मामले में सबसे निर्णायक और दिल दहला देने वाला पहलू था मृतक की नाबालिग बेटी की गवाही। घटना के वक्त इस बच्ची की उम्र महज 10 साल थी (वर्तमान में 14 वर्ष)। ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी (प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर) मृत्युंजय सिंह ने बताया कि बच्ची की गवाही के बिना यह मामला इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाता।
अदालत में बच्ची ने बताया कि उस रात उसकी मां (प्रेमिता) ने तीनों भाई-बहनों को एक कमरे में बंद कर दिया और बाहर से कुंडी लगा दी। उन्हें कोल्ड ड्रिंक पिलाई गई और जानबूझकर टीवी की आवाज इतनी तेज कर दी गई कि बाहर की कोई आवाज उन्हें सुनाई न दे।
रात करीब 3 बजे जब वह दरवाजा खुलवाने की कोशिश कर रही थी, तो शुरू में उसकी मां ने दरवाजा नहीं खोला। काफी देर बाद जब दरवाजा खुला, तो कमरे के बेड पर खून के धब्बे दिखे। बच्ची ने अदालत को बताया कि उसकी मां ने रात में स्नान भी किया था, जो यह दर्शाता था कि उसने खुद को साफ करने की कोशिश की थी।
अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी विजय वर्मा और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने पूरे दृढ़ता से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में कुल 10 गवाहों को पेश किया। इनमें वादी सुरेश चंद, मृतक के भाई सोनू, डॉ. रविंद्र कुमार सिंह, पुलिसकर्मी श्याम सुंदर, विवेचक शैलेंद्र सिंह चौहान, उपनिरीक्षक केवल सिंह, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी राजीव कुमार सिंह, निरीक्षक उमेश चंद त्रिपाठी और सबसे अहम मृतक की पुत्री शामिल थीं।
अभियोजन अधिकारियों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों (फॉरेंसिक रिपोर्ट), मोबाइल लोकेशन और नाबालिग बच्ची की आंखों देखी गवाही के आधार पर अदालत को यह सिद्ध किया कि यह हत्या पूरी तरह से प्लान्ड थी। अपराध की गंभीरता और पति-पत्नी के रिश्ते के दोहन को देखते हुए अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग रखी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए तीनों दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे उम्र भर के लिए भेज दिया।
























