UP News: उत्तर प्रदेश की सियासत में पूर्वांचल के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) ने बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने अपनी महिला विंग ‘समाजवादी महिला सभा’ की कमान बलिया की निवासी सीमा राजभर (उर्फ भावना) को सौंप दी है। माना जा रहा है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का यह फैसला सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बढ़ते प्रभाव को काटने के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ है।
कौन हैं नई महिला सभा अध्यक्ष?
सपा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, सीमा राजभर को समाजवादी पार्टी महिला सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नामित किया गया है। उन्होंने प्रदेश की सियासत में अपनी पहचान बनाई है और अब उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
पिछले करीब दो सालों से इस पद पर काबिज रहीं जूही सिंह को हटाया गया है। अखिलेश यादव ने 21 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को यह फैसला लिया। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि जूही सिंह को भी जल्द ही पार्टी में नई जिम्मेदारी दी जाएगी। बता दें कि जूही सिंह साल 2023 से महिला सभा की अध्यक्ष थीं और वर्ष 2013 के उपचुनाव में सपा ने उन्हें लखनऊ पूर्व सीट से टिकट भी दिया था।
सीमा राजभर कैसे बनेंगी ओपी राजभर की ‘काट’?
अखिलेश यादव के इस फैसले की सबसे बड़ी वजह ओपी राजभर को कमजोर करना माना जा रहा है। सीमा राजभर की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने खुद ओपी राजभर की पार्टी ‘सुभासपा’ में काम किया है। उनकी पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली और राजभर समुदाय की सियासी नब्ज से वह भलीभांति वाकिफ हैं।
पिछले कई मौकों पर सीमा राजभर ने ओपी राजभर और उनकी पार्टी पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सपा का मानना है कि राजभर समुदाय में ओपी के विरोध की आवाज को सीमा के जरिए मजबूती मिलेगी।
जूही सिंह ने दी बधाई, कहा- 2027 में बनेगी सपा सरकार
नई अध्यक्ष के नाम की घोषणा खुद पूर्व अध्यक्ष जूही सिंह ने की। उन्होंने सीमा राजभर के नाम पर प्रसन्नता जताते हुए कहा, “समाजवादी महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सीमा राजभर को हार्दिक शुभकामनाएं। हम सबको विश्वास है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में हम 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाएंगे।”
क्यों भड़की ओपी राजभर और सपा की जंग?
दरअसल, वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा-सुभासपा गठबंधन था। हालांकि, चुनाव के बाद ही ओपी राजभर ने सपा का साथ छोड़ दिया और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो गए। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया।
जहूराबाद से विधायक ओपी राजभर का अक्सर दावा रहता है कि 2022 के चुनाव में पूर्वांचल में सपा का बेहतर प्रदर्शन उनके साथ गठबंधन होने की वजह से ही संभव हो पाया था। लेकिन, सपा इस दावे को सिरे से खारिज करती है। सपा का करारा तर्क है कि अगर ओपी राजभर और उनकी पार्टी सियासी तौर पर इतनी ताकतवर है, तो 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्वांचल में उनका क्या लाभ मिला?
2027 के रणनीति का ऐलान
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि सीमा राजभर को यह जिम्मेदारी देकर सपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी का लक्ष्य 2022 और 2024 के चुनावों में पूर्वांचल में मिले लाभ को 2027 में भी बरकरार रखना है और राजभर समुदाय के वोटों के बंटवारे का पूरा फायदा उठाना है।
























