भारतीय शेयर बाजार में आज सोमवार को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत तेजी के साथ हुई। बाजार खुलते ही BSE सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक उछला और NSE निफ्टी भी बढ़त के साथ कारोबार करने लगा। हालांकि, शुरुआती तेजी ज्यादा देर नहीं टिकी। कुछ ही मिनटों में खरीदारी का जोर कमजोर पड़ा और दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में पहुंच गए।
इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा समूह की कंपनी Trent समेत कई प्रमुख शेयरों पर रही। शुरुआती कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों में खरीदारी दिखी, लेकिन ऊंचे कच्चे तेल के दाम, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारक बाजार की दिशा पर दबाव बनाए हुए हैं।
तेजी के साथ खुला बाजार, फिर बदला रुख
बाजार खुलने पर सेंसेक्स में 400 अंकों से ज्यादा की तेजी ने निवेशकों को सकारात्मक शुरुआत का संकेत दिया। निफ्टी ने भी शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की। लेकिन तेजी के बाद मुनाफावसूली और बाजार से जुड़े बाहरी जोखिमों के चलते सूचकांकों की चाल पलट गई।
शुरुआती घंटों में बाजार का तेजी से ऊपर-नीचे होना बताता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क हैं। सकारात्मक घरेलू आर्थिक संकेतों के बावजूद वैश्विक परिस्थितियां बाजार के कारोबार को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे माहौल में किसी एक कारोबारी सत्र की तेजी या गिरावट को बाजार की लंबी अवधि की दिशा मानना उचित नहीं होगा।
मीडिया और ऑटो शेयरों में खरीदारी
शुरुआती कारोबार में अधिकांश सेक्टोरल सूचकांक हरे निशान में दिखाई दिए। निफ्टी मीडिया, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल्स में करीब 1 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि शुरुआती सत्र में इन क्षेत्रों के शेयरों में खरीदारी का रुझान बना हुआ था।
इसके अलावा निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी मेटल और निफ्टी आईटी में भी लगभग 0.64 से 0.81 प्रतिशत तक सुधार देखा गया। दूसरी ओर, शुरुआती कारोबार में निफ्टी PSU बैंक सूचकांक मामूली दबाव में रहा और इसमें करीब 0.01 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरों का यह मिला-जुला प्रदर्शन दिखाता है कि बाजार में खरीदारी व्यापक जरूर थी, लेकिन हर क्षेत्र में समान मजबूती नहीं थी। निवेशकों को सेक्टर के प्रदर्शन के साथ-साथ संबंधित कंपनियों के नतीजों, मूल्यांकन और कारोबार से जुड़ी खबरों पर भी ध्यान देना चाहिए।
रिलायंस और Trent पर क्यों रही नजर?
रिलायंस इंडस्ट्रीज और Trent जैसे बड़े शेयरों में हलचल बाजार की चर्चा में रही। सूचकांकों पर इन कंपनियों के भार के कारण इनके शेयरों में होने वाला उतार-चढ़ाव व्यापक बाजार की चाल को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, किसी शेयर की शुरुआती हलचल को अपने आप में खरीद या बिक्री का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे कंपनी की ताजा घोषणाओं, कारोबार के प्रदर्शन और बाजार में उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर फैसला लें। खास तौर पर उतार-चढ़ाव वाले सत्रों में केवल कीमतों की तेज चाल देखकर जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए।
बाजार पर दबाव डाल रहे हैं वैश्विक कारक
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार पर इस समय वैश्विक संकेतों का असर महत्वपूर्ण बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय हैं। तेल महंगा रहने से आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर महंगाई, चालू खाते और बाजार की निवेश धारणा पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी उभरते बाजारों की ओर निवेश का रुझान प्रभावित हो सकता है। जब अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला प्रतिफल बढ़ता है, तो कुछ निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालकर अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों की ओर जा सकते हैं। ऐसे में भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों के प्रवाह पर नजर रखना जरूरी है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली बाजार के लिए एक और चुनौती बनी हुई है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) खरीदारी के जरिए इस दबाव को कुछ हद तक संभाल रहे हैं। विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच यह खींचतान बाजार में तेज उतार-चढ़ाव का कारण बन सकती है।
घरेलू अर्थव्यवस्था से मिल रहा लंबी अवधि का सहारा
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू आर्थिक बुनियाद बाजार के लिए सकारात्मक पहलू बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की GDP वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भरोसा बढ़ा सकता है। मजबूत आर्थिक विकास से कंपनियों की मांग, निवेश और आय में सुधार की संभावना बनती है।
फिर भी, आर्थिक विकास का अनुमान शेयर बाजार में तत्काल तेजी की गारंटी नहीं देता। ब्याज दरें, महंगाई, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक घटनाक्रम भी बाजार के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। इसलिए निवेशकों को सकारात्मक आर्थिक आंकड़ों के साथ जोखिमों का आकलन भी करना चाहिए।
निफ्टी के लिए 22,575 अहम स्तर
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,575 का स्तर महत्वपूर्ण है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर बंद होता है, तो आगे 22,800 से 23,200 के दायरे की ओर बढ़ने की संभावना पर नजर रखी जा सकती है। नीचे की तरफ 22,295 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है।
ये तकनीकी स्तर बाजार की संभावित दिशा समझने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं मानना चाहिए। बाजार में अचानक आने वाली खबरें इन स्तरों को बदल सकती हैं। निवेशकों को अपने जोखिम लेने की क्षमता और निवेश अवधि के मुताबिक निर्णय लेना चाहिए।


























