संध्या समय न्यूज संवाददाता
मुंबई। नक्सल प्रभावित और पिछड़े जिलों में शामिल महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में अब बदलाव की एक नई तस्वीर सामने आ रही है। ‘हर घर नौकरी, जीवन भर रोशनी’ पहल के जरिए आदिवासी युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल में नीतू जोशी और मियाम चैरिटेबल ट्रस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका है। ट्रस्ट, सुरजागढ़ इस्पात प्रा. लि. के सहयोग से जिले के दूरदराज इलाकों के युवाओं को सरकारी और सुरक्षा सेवाओं में रोजगार के लिए तैयार कर रहा है।
सेना, पुलिस और CRPF की तैयारी के लिए निशुल्क प्रशिक्षण
अहेरी तालुका के दूरदराज क्षेत्र वड्दलापेट में संचालित इस पहल के तहत युवाओं को सेना, पुलिस, CRPF और वन विभाग जैसी सेवाओं में भर्ती के लिए तैयार किया जा रहा है।
युवाओं को निशुल्क शारीरिक प्रशिक्षण, शैक्षणिक कोचिंग और डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रशिक्षण में शामिल युवाओं के लिए पोषण और आवागमन जैसी सुविधाओं का भी ध्यान रखा जा रहा है।
इसका उद्देश्य उन आदिवासी युवाओं तक रोजगार की तैयारी का अवसर पहुंचाना है, जिनके लिए आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण हासिल करना मुश्किल होता है।

‘हर घर नौकरी, जीवन भर रोशनी’ का लक्ष्य
पहल से जुड़ीं नीतू जोशी का मानना है कि एक सरकारी नौकरी केवल एक युवा की जिंदगी नहीं बदलती, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।
उनके अनुसार, लक्ष्य यह है कि रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर गढ़चिरौली के हर आदिवासी परिवार तक पहुंचे। इस सोच के साथ युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सुरजागढ़ इस्पात और मियाम ट्रस्ट की साझेदारी
इस अभियान में सुरजागढ़ इस्पात प्रा. लि. की आर्थिक सहायता और मियाम चैरिटेबल ट्रस्ट का सामाजिक संकल्प महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दोनों के सहयोग से गढ़चिरौली के ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
दूरदराज क्षेत्रों में इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई प्रतिभाशाली युवा संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों में आगे नहीं बढ़ पाते।
युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की राह
‘हर घर नौकरी, जीवन भर रोशनी’ पहल को केवल रोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह आदिवासी युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रयास है।
शिक्षा, डिजिटल ज्ञान, शारीरिक प्रशिक्षण और पोषण को एक साथ जोड़कर युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने का प्रयास गढ़चिरौली जैसे जिले में बदलाव की मजबूत नींव तैयार कर सकता है।


























